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राजा परीक्षित को डसने फूलों छिपकर गया था तक्षक नाग : आचार्य
Thu, 13 Jun 2024 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 13 Jun 2024 11:36 PM IST
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काबां में श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर में मौजूद भक्त। संवाद
भागवत कथा में सुनाई राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा
निचला काबा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। कसौली विधानसभा क्षेत्र की काबा कलां पंचायत के निचला काबा गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथावाचक आचार्य विजय भारद्वाज ने राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को जब पता चला था कि सात दिन बाद उन्हें तक्षक नाग डसेगा और उनकी मृत्यु हो जाएगी तो उन्होंने सात दिन तक भागवत कथा सुनी। कथा के अंतिम दिन राजा के महल के चारों ओर सपेरे व साधु महात्माओं का घेरा बना दिया, ताकि कोई भी सांप वहां पर न आ सके।
कथावाचक ने कहा कि पौराणिक समय में ऋषि मुनियों का श्राप कभी व्यर्थ नहीं जाता था। वहीं राजा को सात दिन बाद मृत्यु का श्राप था तो तक्षक नाग राजा के लिए लाई जा रही फूलों की माला में छिपकर आ गया। जैसे ही माला राजा को डाली तो तक्षक नाग ने उससे निकलकर राजा को डस लिया और उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित धर्मात्मा राजा थे, ऐसे में उन्हें अंत में मोक्ष की प्राप्ति हुई। आचार्य भारद्वाज ने कहा कि हमें कलियुग के प्रभाव से बचने के लिए भगवान का नाम जपना चाहिए ताकि हमें भी मोक्ष की प्राप्ति हो सके। इस दौरान कथावाचक मदन सिंह ठाकुर समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कथा की समाप्ति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
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निचला काबा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। कसौली विधानसभा क्षेत्र की काबा कलां पंचायत के निचला काबा गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथावाचक आचार्य विजय भारद्वाज ने राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को जब पता चला था कि सात दिन बाद उन्हें तक्षक नाग डसेगा और उनकी मृत्यु हो जाएगी तो उन्होंने सात दिन तक भागवत कथा सुनी। कथा के अंतिम दिन राजा के महल के चारों ओर सपेरे व साधु महात्माओं का घेरा बना दिया, ताकि कोई भी सांप वहां पर न आ सके।
कथावाचक ने कहा कि पौराणिक समय में ऋषि मुनियों का श्राप कभी व्यर्थ नहीं जाता था। वहीं राजा को सात दिन बाद मृत्यु का श्राप था तो तक्षक नाग राजा के लिए लाई जा रही फूलों की माला में छिपकर आ गया। जैसे ही माला राजा को डाली तो तक्षक नाग ने उससे निकलकर राजा को डस लिया और उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित धर्मात्मा राजा थे, ऐसे में उन्हें अंत में मोक्ष की प्राप्ति हुई। आचार्य भारद्वाज ने कहा कि हमें कलियुग के प्रभाव से बचने के लिए भगवान का नाम जपना चाहिए ताकि हमें भी मोक्ष की प्राप्ति हो सके। इस दौरान कथावाचक मदन सिंह ठाकुर समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कथा की समाप्ति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
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