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Solan News: जिलेभर के सभी अस्पतालों में लगी सीबी नाट और ट्रूनेट जांच मशीनें
Thu, 28 Dec 2023 11:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 28 Dec 2023 11:47 PM IST
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पीएचसी व सीएचसी में भी संभव हो सकेगी बलगम की जांच
प्रदेश को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए विभाग ने शुरू की मुहिम
टीबी टेस्ट के लिए अब मरीजों को नहीं भटकना पड़ेगा इधर-उधर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षय रोग का संदेह होने पर लोगों को बलगम जांच के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीबी नाट और ट्रूनेट मशीनें लगवा दी हैं। इससे अब प्राथमिक स्तर तक बलगम जांच की सुविधा मिलेगी। इससे पहले मरीजों को खंड के बड़े अस्पतालों, टीबी अस्पताल धर्मपुर और क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में जांच कराने के लिए जाना होता था। लेकिन अब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में ही इस प्रकार की सुविधा मिल गई है। इससे लोगों को काफी फायदा मिलेगा और परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में जांच संभव होने से टीबी भी नहीं फैलेगा।
गौर रहे कि भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए 2025 का लक्ष्य निर्धारित किया है। जबकि प्रदेश सरकार ने 2021 तक टीबी मुक्त बनाने का निर्णय लिया था। कोरोना संक्रमण के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त करने में देरी हो गई। इसके बाद सरकार ने 2024 का लक्ष्य रखा है। इसको लेकर विभाग ने टीम बनाई हैं जो इस कार्य को तेजी से रही हैं। इसी के साथ एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान भी प्रदेश में चल रहा है।
इस माध्यम से भी विभाग को प्रदेश में टीबी के पॉजिटिव मरीज मिले हैं। वहीं टीबी को खत्म करने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। घर-द्वार पर टीबी की जांच के बाद अब अस्पतालों की प्रत्येक ओपीडी में आने वाले मरीजों को इस संबंध जानकारी देनी होगी। वहीं ग्रामीण स्तर पर टीमें कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान भी चलाया गया है। इस माध्यम से संदेह वाले टीबी के मरीजों की जांच की जा रही है और सैंपल लिए जा रहे हैं। आशा वर्कर के माध्यम से यह संभव हो रहा है। इसी के साथ अब जिले के सभी अस्पतालों में टीबी जांच के लिए मशीनें लगा दी गई हैं और तकनीशियनाें को टेस्ट करने के लिए कहा है।
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इनसेट
दोनों ही मशीनों में 95 फीसदी विश्वसनीयता
क्षय रोग की जांच के लिए लगाई गई ट्रूनेट और सीबी नाट मशीनों की विश्वसनीयता 95 फीसदी है। सैंपल के दौरान यदि व्यक्ति पॉजिटिव आता है तो उसका उपचार शुरू किया जाता है। इसी के साथ कांटेक्ट में आने वाले लोगों के भी सैंपल जांचे जाते हैं। वहीं अधिक संपर्क में आने वाले लोगों की भी निरंतर जांच की जाती है।
इनसेट
क्षय रोग जांच के लिए सभी अस्पतालों में सीबी नाट और ट्रूनेट मशीन लगवा दी गई है। संदेह होने पर अब लोग नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भी बलगम की जांच करवा सकते हैं। इन मशीनों की विश्वसनीयता 95 फीसदी है।
-डॉ. एके सिंह
जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्वास्थ्य)
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प्रदेश को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए विभाग ने शुरू की मुहिम
टीबी टेस्ट के लिए अब मरीजों को नहीं भटकना पड़ेगा इधर-उधर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षय रोग का संदेह होने पर लोगों को बलगम जांच के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीबी नाट और ट्रूनेट मशीनें लगवा दी हैं। इससे अब प्राथमिक स्तर तक बलगम जांच की सुविधा मिलेगी। इससे पहले मरीजों को खंड के बड़े अस्पतालों, टीबी अस्पताल धर्मपुर और क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में जांच कराने के लिए जाना होता था। लेकिन अब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में ही इस प्रकार की सुविधा मिल गई है। इससे लोगों को काफी फायदा मिलेगा और परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में जांच संभव होने से टीबी भी नहीं फैलेगा।
गौर रहे कि भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए 2025 का लक्ष्य निर्धारित किया है। जबकि प्रदेश सरकार ने 2021 तक टीबी मुक्त बनाने का निर्णय लिया था। कोरोना संक्रमण के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त करने में देरी हो गई। इसके बाद सरकार ने 2024 का लक्ष्य रखा है। इसको लेकर विभाग ने टीम बनाई हैं जो इस कार्य को तेजी से रही हैं। इसी के साथ एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान भी प्रदेश में चल रहा है।
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इस माध्यम से भी विभाग को प्रदेश में टीबी के पॉजिटिव मरीज मिले हैं। वहीं टीबी को खत्म करने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। घर-द्वार पर टीबी की जांच के बाद अब अस्पतालों की प्रत्येक ओपीडी में आने वाले मरीजों को इस संबंध जानकारी देनी होगी। वहीं ग्रामीण स्तर पर टीमें कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान भी चलाया गया है। इस माध्यम से संदेह वाले टीबी के मरीजों की जांच की जा रही है और सैंपल लिए जा रहे हैं। आशा वर्कर के माध्यम से यह संभव हो रहा है। इसी के साथ अब जिले के सभी अस्पतालों में टीबी जांच के लिए मशीनें लगा दी गई हैं और तकनीशियनाें को टेस्ट करने के लिए कहा है।
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दोनों ही मशीनों में 95 फीसदी विश्वसनीयता
क्षय रोग की जांच के लिए लगाई गई ट्रूनेट और सीबी नाट मशीनों की विश्वसनीयता 95 फीसदी है। सैंपल के दौरान यदि व्यक्ति पॉजिटिव आता है तो उसका उपचार शुरू किया जाता है। इसी के साथ कांटेक्ट में आने वाले लोगों के भी सैंपल जांचे जाते हैं। वहीं अधिक संपर्क में आने वाले लोगों की भी निरंतर जांच की जाती है।
इनसेट
क्षय रोग जांच के लिए सभी अस्पतालों में सीबी नाट और ट्रूनेट मशीन लगवा दी गई है। संदेह होने पर अब लोग नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भी बलगम की जांच करवा सकते हैं। इन मशीनों की विश्वसनीयता 95 फीसदी है।
-डॉ. एके सिंह
जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्वास्थ्य)