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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Hundreds of villagers in Damli troubled by birds; seek relief from BBMB.

Solan News: डमली में पक्षियों से सैकड़ों ग्रामीणों परेशान, बीबीएमबी से मांगी राहत

Sat, 04 Jul 2026 12:15 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 12:15 AM IST
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बांस के झुरमुटों में हजारों पक्षियों ने डाला डेरा, रास्तों पर बीट से आवागमन हो रहा प्रभावित
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संक्रमण और मानसिक तनाव का हवाला देकर ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की उठाई मांग
बीबीएमबी चेयरमैन, एसडीएम, डीएफओ समेत छह अधिकारियों को भेजी गई कानूनी शिकायत

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल झंडूता की ग्राम पंचायत ऋषिकेश के डमली गांव में पक्षियों से ग्रामीण परेशान हैं। करीब 700 ग्रामीणों ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने बीबीएमबी अध्यक्ष को कानूनी शिकायत भेजकर तत्काल समाधान की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि बीबीएमबी के मुख्य सतर्कता अधिकारी, एसडीएम झंडूता, डीएफओ बिलासपुर, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और ग्राम पंचायत ऋषिकेश को भी भेजी गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बीबीएमबी की भूमि पर वर्षों से घने बांस के झुरमुट और ऊंचे पेड़ खड़े हैं। इनकी नियमित छंटाई नहीं होने के कारण हजारों जंगली पक्षियों ने वहां स्थायी बसेरा बना लिया है। पक्षियों की लगातार बढ़ती संख्या के चलते पूरा गांव गंभीर स्वास्थ्य संकट, पर्यावरण प्रदूषण और आवागमन की समस्या से जूझ रहा है। गांव के लोग हर दिन भय और असुविधा के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव की मुख्य सड़कें और पैदल रास्ते पक्षियों की बीट से पूरी तरह गंदे हो चुके हैं। इन्हीं रास्तों से स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और मरीज रोजाना आवाजाही करते हैं। रास्तों पर लगातार गिर रही बीट के कारण फिसलने का खतरा बना रहता है। लोगों को संक्रमण का डर भी सता रहा है। कई बार ग्रामीणों को मजबूरी में खेतों और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। कुछ दिन पहले एक वरिष्ठ नागरिक पर पक्षियों की बीट गिरी थी, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।
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पक्षियों द्वारा मछलियों के अवशेष और अन्य जैविक कचरा आसपास गिराया जा रहा है। इसके कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका लगातार बनी हुई है। गांव में बड़ी संख्या में बुजुर्ग और बच्चे रहते हैं। वे इस तरह के संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। हजारों पक्षियों का दिन-रात लगातार होने वाला शोर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। रातभर पक्षियों की आवाज के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। लगातार शोर और गंदगी के कारण पूरे गांव में तनाव और असहजता का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति उनके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित भूमि, बांस के झुरमुट और पेड़ बीबीएमबी की संपत्ति हैं। ऐसे में उनकी देखरेख, छंटाई और रखरखाव की जिम्मेदारी भी बीबीएमबी की है। स्थानीय लोग स्वयं इन पेड़ों की कटाई या छंटाई नहीं कर सकते।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
वरिष्ठ नागरिक जगदंबा शर्मा, कला देवी, रुक्मणी देवी और ओम प्रकाश शर्मा सहित विवेक शर्मा, सीमा देवी, यशस्विनी नड्डा, प्रियंका, सीमा, संतोष, विकास शर्मा, मंजुला शर्मा, अभ्युदय, निया, आदित्य केशव एवं अन्य ग्रामीणों ने बीबीएमबी से तत्काल वैज्ञानिक तरीके से पेड़ों की छंटाई कराने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित रास्तों की विशेष सफाई, धुलाई और कीटाणुशोधन कराने को भी कहा। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला प्रशासन, राज्य सरकार और न्यायालय के समक्ष मुद्दा उठाएंगे। यह मामला पूरे गांव के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा है।
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