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Solan News: गर्भावस्था में लापरवाही से बढ़ सकता है गर्भपात और शिशु विकास में बाधा का खतरा
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शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है आयोडीन
सीमित मात्रा में करें आयोडीन युक्त नमक का सही इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सोलन के सौजन्य से वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर सेंट्रक्स सोलन में राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोगों को आयोडीन के महत्व, शारीरिक एवं मानसिक विकास में इसकी भूमिका और इसकी कमी से होने वाले विकारों के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य शिक्षक पद्मिनी नेगी और बीसीसी समन्वयक राधा चौहान ने बताया कि जिस प्रकार स्वस्थ जीवन के लिए अन्य पोषक तत्व आवश्यक हैं, उसी प्रकार आयोडीन भी एक बेहद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है। यह शरीर की वृद्धि, मस्तिष्क के विकास और चयापचय को सुचारु रखने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने विशेष तौर पर जोर दिया कि गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होना बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में सहायक होता है। गर्भावस्था में इसकी गंभीर कमी के कारण गर्भपात, मृत शिशु का जन्म और बच्चे के बौद्धिक विकास में बाधा आने का खतरा बढ़ जाता है। बचपन में भी इसकी कमी से सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। शरीर में आयोडीन की कमी से घेघा रोग हो सकता है, जिससे थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है और गर्दन के अगले हिस्से में सूजन या गांठ जैसी स्थिति दिख सकती है। नियमित रूप से पर्याप्त आयोडीन युक्त नमक का सेवन करना चाहिए।
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सीमित मात्रा में करें आयोडीन युक्त नमक का सही इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सोलन के सौजन्य से वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर सेंट्रक्स सोलन में राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोगों को आयोडीन के महत्व, शारीरिक एवं मानसिक विकास में इसकी भूमिका और इसकी कमी से होने वाले विकारों के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य शिक्षक पद्मिनी नेगी और बीसीसी समन्वयक राधा चौहान ने बताया कि जिस प्रकार स्वस्थ जीवन के लिए अन्य पोषक तत्व आवश्यक हैं, उसी प्रकार आयोडीन भी एक बेहद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है। यह शरीर की वृद्धि, मस्तिष्क के विकास और चयापचय को सुचारु रखने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने विशेष तौर पर जोर दिया कि गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होना बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में सहायक होता है। गर्भावस्था में इसकी गंभीर कमी के कारण गर्भपात, मृत शिशु का जन्म और बच्चे के बौद्धिक विकास में बाधा आने का खतरा बढ़ जाता है। बचपन में भी इसकी कमी से सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। शरीर में आयोडीन की कमी से घेघा रोग हो सकता है, जिससे थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है और गर्दन के अगले हिस्से में सूजन या गांठ जैसी स्थिति दिख सकती है। नियमित रूप से पर्याप्त आयोडीन युक्त नमक का सेवन करना चाहिए।
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