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लापरवाही : अल्ट्रासाउंड मशीनें तो लगा दीं, रेडियोलॉजिस्ट नहीं किए तैनात
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अर्की व कुनिहार अस्पताल में पड़े-पड़े खराब हो गईं लाखों की अल्ट्रासाउंड मशीनें
धर्मपुर व चायल अस्पताल में बिना रेडियोलॉजिस्ट के ही पड़ी हैं दो मशीनें
सोलन अस्पताल में पुरानी मशीन, मरीज निजी क्लीनिकों का रुख करने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के अस्पतालों में सरकार की ओर से अल्ट्रासाउंड मशीनें तो लगाई जा रही हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की गई। ऐसे में अस्पतालों में पड़ी-पड़ी मशीनें धूल फांक रही हैं। सरकार और विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड मशीनें लगाकर केवल पल्ला झाड़ने का ही काम किया गया है। इसी के कारण अब अर्की व कुनिहार अस्पताल में लगी अल्ट्रासाउंड मशीनें खराब हो गई हैं। अब अर्की अस्पताल प्रशासन की ओर से दोबारा से मशीन की मांग भेजी गई है।
इसके अलावा धर्मपुर अस्पताल में कई वर्षों की मांग के बाद अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है, लेकिन अब वह भी रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण धूल ही फांक रही है। वहीं चायल अस्पताल में भी पिछले करीब छह माह में एक भी मरीज का अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ है। मरीजों को अस्पताल में मशीनें होने के बाद भी निजी क्लीनिकों में 500 से 600 रुपये तक देकर अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। जिले में अभी केवल दो ही रेडियोलॉजिस्ट मौजूद हैं। इनमें से एक रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर अलग-अलग अस्पतालों में जाकर सेवाएं देनी पड़ रही हैं। जिले के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में अल्ट्रासाउंड मशीन करीब 10 से 12 साल पुरानी है। यह कुछ टेस्ट करने के बाद ही बंद हो जाती है। इस कारण अस्पताल में एक दिन में केवल 25 से 30 टेस्ट ही हो पा रहे हैं। वहीं रोजाना करीब 100 मरीजों को अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा जाता है। करीब 75 मरीजों को निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में लगी अल्ट्रासाउंड मशीन कई बार हांफ चुकी है। मरीजों को टेस्ट के लिए निजी क्लीनिक के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रशासन की ओर से नई आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग सरकार से की गई है।
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कोट
विभाग की ओर से रेडियोलॉजिस्ट की कमी को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। इसके अलावा अस्पताल में मौजूद अन्य डॉक्टरों को भी मशीन को चलाने और टेस्ट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। चायल अस्पताल में भी एक डॉक्टर की ट्रेनिंग चल रही है।
- डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग सोलन
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धर्मपुर व चायल अस्पताल में बिना रेडियोलॉजिस्ट के ही पड़ी हैं दो मशीनें
सोलन अस्पताल में पुरानी मशीन, मरीज निजी क्लीनिकों का रुख करने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के अस्पतालों में सरकार की ओर से अल्ट्रासाउंड मशीनें तो लगाई जा रही हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की गई। ऐसे में अस्पतालों में पड़ी-पड़ी मशीनें धूल फांक रही हैं। सरकार और विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड मशीनें लगाकर केवल पल्ला झाड़ने का ही काम किया गया है। इसी के कारण अब अर्की व कुनिहार अस्पताल में लगी अल्ट्रासाउंड मशीनें खराब हो गई हैं। अब अर्की अस्पताल प्रशासन की ओर से दोबारा से मशीन की मांग भेजी गई है।
इसके अलावा धर्मपुर अस्पताल में कई वर्षों की मांग के बाद अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है, लेकिन अब वह भी रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण धूल ही फांक रही है। वहीं चायल अस्पताल में भी पिछले करीब छह माह में एक भी मरीज का अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ है। मरीजों को अस्पताल में मशीनें होने के बाद भी निजी क्लीनिकों में 500 से 600 रुपये तक देकर अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। जिले में अभी केवल दो ही रेडियोलॉजिस्ट मौजूद हैं। इनमें से एक रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिनियुक्ति पर अलग-अलग अस्पतालों में जाकर सेवाएं देनी पड़ रही हैं। जिले के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में अल्ट्रासाउंड मशीन करीब 10 से 12 साल पुरानी है। यह कुछ टेस्ट करने के बाद ही बंद हो जाती है। इस कारण अस्पताल में एक दिन में केवल 25 से 30 टेस्ट ही हो पा रहे हैं। वहीं रोजाना करीब 100 मरीजों को अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा जाता है। करीब 75 मरीजों को निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ रहा है।
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क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में लगी अल्ट्रासाउंड मशीन कई बार हांफ चुकी है। मरीजों को टेस्ट के लिए निजी क्लीनिक के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रशासन की ओर से नई आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग सरकार से की गई है।
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कोट
विभाग की ओर से रेडियोलॉजिस्ट की कमी को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। इसके अलावा अस्पताल में मौजूद अन्य डॉक्टरों को भी मशीन को चलाने और टेस्ट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। चायल अस्पताल में भी एक डॉक्टर की ट्रेनिंग चल रही है।
- डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग सोलन