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Solan News: नशा अदरंग, बांझपन, दिल की बीमारियों का बन रहा कारण
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अस्पतालों में रोजाना आ रहे है पीड़ित युवा व लोगों के मामले
आईटीआई सोलन में विभाग ने कार्यक्रम में किए बड़े खुलासे
युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह, पीड़ित ले सकते हैं मनोचिकित्सक की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नशा अदरंग, बांझपन, दिल की बीमारी, कैंसर समेत कई भयानक बीमारियों का बड़ा कारण बनता जा रहा है। अस्पतालों में इससे संबंधित पीड़ित युवा व अन्य लोग उपचार के लिए आ रहे हैं। इसमें युवक ही नहीं अब युवतियों की संलिप्तता भी बढ़ी है। इससे न केवल सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं बल्कि हड्डियों में भी दिक्कतें पेश आती हैं। अगर समय पर नशे से दूर न हुए तो आगामी परिणाम ओर घातक हो सकते हैं।
आईटीआई सोलन में जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से नशे पर जागरूकता कार्यक्रम में कई चौकाने वाले खुलासे हुए। कार्यक्रम के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित रंजन तलवाड़ ने युवाओं को नशा निवारण पर जागरूक किया। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी और कहा कि अगर किसी को समय रहते नशे से दूर होना है तो वे मनोचिकित्सक की भी सलाह ले सकते हैं। मनोचिकित्सक के पास आकर उपचार तक ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में नशे का बढ़ता प्रचलन समाज के लिए चुनौती बनकर उभरा है। किसी भी प्रकार का नशा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, वे चाहे फिर बीडी, सिगरेट, तंबाकू, शराब, भांग, गांजा, अफीम, चिट्टा व अन्य मादक पदार्थ हो। उन्होंने कहा कि नशे में संलिप्त बच्चों की पहचान करना आवश्यक है ताकि उनका शीघ्र उपचार हो सके। किसी भी कार्य में एकाग्रता बनाए रखने में असमर्थता, निरंतर हाथों एवं शरीर में कंपन, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, दोस्तों एवं परिवार से दूरी, जीवन के प्रति नकारात्मक सोच, अत्यधिक विनम्र या आक्रामक होना, चोरी करना तथा गुम-सुम रहना नशे में संलिप्तता के लक्षण हैं। उन्होंने ने युवाओं से आग्रह किया कि नशे को न कहना सीखें। नशा एक क्षणिक सुख है, युवा इससे दूर रहें और अपने भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में कार्य करते रहें। इस मौके पर बीसीसी समन्वयक राधा चौहान, स्वास्थ्य शिक्षिका पदमिनी नेगी समेत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सोलन के प्रशिक्षु व अध्यापक उपस्थित रहे।
कैसे छोड़े नशा
-नशा छोड़ने का मन बनाएं।
-नशा करने वालों से दूर रहें।
-रचनात्मक कार्य व खेलकूद में भाग लें।
-अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताएं और ज्यादा बातचीत करें।
-खानपान व लाइफ स्टाइल को बदलें।
-नशे की कोई चीज अपने पास न रखें।
-नशे में संलिप्त किसी भी दोस्त के बहकावे में न आएं।
-पीड़ित मनोचिकित्सा से नशा छोड़ने की राय लें।
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आईटीआई सोलन में विभाग ने कार्यक्रम में किए बड़े खुलासे
युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह, पीड़ित ले सकते हैं मनोचिकित्सक की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नशा अदरंग, बांझपन, दिल की बीमारी, कैंसर समेत कई भयानक बीमारियों का बड़ा कारण बनता जा रहा है। अस्पतालों में इससे संबंधित पीड़ित युवा व अन्य लोग उपचार के लिए आ रहे हैं। इसमें युवक ही नहीं अब युवतियों की संलिप्तता भी बढ़ी है। इससे न केवल सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं बल्कि हड्डियों में भी दिक्कतें पेश आती हैं। अगर समय पर नशे से दूर न हुए तो आगामी परिणाम ओर घातक हो सकते हैं।
आईटीआई सोलन में जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से नशे पर जागरूकता कार्यक्रम में कई चौकाने वाले खुलासे हुए। कार्यक्रम के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित रंजन तलवाड़ ने युवाओं को नशा निवारण पर जागरूक किया। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी और कहा कि अगर किसी को समय रहते नशे से दूर होना है तो वे मनोचिकित्सक की भी सलाह ले सकते हैं। मनोचिकित्सक के पास आकर उपचार तक ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में नशे का बढ़ता प्रचलन समाज के लिए चुनौती बनकर उभरा है। किसी भी प्रकार का नशा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, वे चाहे फिर बीडी, सिगरेट, तंबाकू, शराब, भांग, गांजा, अफीम, चिट्टा व अन्य मादक पदार्थ हो। उन्होंने कहा कि नशे में संलिप्त बच्चों की पहचान करना आवश्यक है ताकि उनका शीघ्र उपचार हो सके। किसी भी कार्य में एकाग्रता बनाए रखने में असमर्थता, निरंतर हाथों एवं शरीर में कंपन, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, दोस्तों एवं परिवार से दूरी, जीवन के प्रति नकारात्मक सोच, अत्यधिक विनम्र या आक्रामक होना, चोरी करना तथा गुम-सुम रहना नशे में संलिप्तता के लक्षण हैं। उन्होंने ने युवाओं से आग्रह किया कि नशे को न कहना सीखें। नशा एक क्षणिक सुख है, युवा इससे दूर रहें और अपने भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में कार्य करते रहें। इस मौके पर बीसीसी समन्वयक राधा चौहान, स्वास्थ्य शिक्षिका पदमिनी नेगी समेत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सोलन के प्रशिक्षु व अध्यापक उपस्थित रहे।
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कैसे छोड़े नशा
-नशा छोड़ने का मन बनाएं।
-नशा करने वालों से दूर रहें।
-रचनात्मक कार्य व खेलकूद में भाग लें।
-अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताएं और ज्यादा बातचीत करें।
-खानपान व लाइफ स्टाइल को बदलें।
-नशे की कोई चीज अपने पास न रखें।
-नशे में संलिप्त किसी भी दोस्त के बहकावे में न आएं।
-पीड़ित मनोचिकित्सा से नशा छोड़ने की राय लें।