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Solan News: गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश उत्सव पर गुरमत समागम
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नालागढ़ के सिंह सभा गुररूद्वारा में श्री गुरू गोविंद सिंह के प्रकाश उत्सव परशब्द कीर्तन का श्रव
नालागढ़ गुरुद्वारे में रागी जत्थे ने शब्द कीर्तन कर संगत को निहाल किया
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़। सिंह सभा गुरुद्वारा साहिब नालागढ़ में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर विशेष गुरमत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र की भारी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी। कार्यक्रम की शुरुआत तीन दिन से चल रहे अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ हुई। समागम में पहुंचे कथावाचक भाई सुखविंद्र सिंह थली ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया के इतिहास में ऐसा कोई दूसरा पैगंबर नहीं हुआ, जिसने धर्म और देश की रक्षा के लिए अपने पिता, माता और चारों साहिबजादों तक का बलिदान कर दिया हो। उन्होंने ही खालसा पंथ की स्थापना की और ज्योति-जोत समाने से पहले संगत को गुरु ग्रंथ साहिब को ही शाश्वत गुरु मानने का आदेश दिया। इस अवसर पर गुरमत प्रचार ट्रस्ट के प्रधान नसीब सिंह, सचिव महेंद्र सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह जोली, परमजीत सिंह ग्रेवाल, जसपाल सिंह, अजीत सिंह, नरेंद्र सिंह, हरप्रीत सिंह, कुलदीप सिंह, गुरचरण सिंह, जीत सिंह, कुलवंत सिंह, सुरमुख सिंह उपस्थित रहे।
कीर्तन से महौल भक्तिमय
तख्त श्री केशगढ़ साहिब के हजूरी रागी भाई रौनक सिंह, भाई रणधीर सिंह और भाई करण सिंह ने गुरुबाणी के मनोहर कीर्तन से संगत को निहाल किया। देहि शिवा बर मोहि इहै जैसे शबदों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। समागम के उपरांत गुरु का अटूट लंगर बरताया गया, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़। सिंह सभा गुरुद्वारा साहिब नालागढ़ में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर विशेष गुरमत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र की भारी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी। कार्यक्रम की शुरुआत तीन दिन से चल रहे अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ हुई। समागम में पहुंचे कथावाचक भाई सुखविंद्र सिंह थली ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया के इतिहास में ऐसा कोई दूसरा पैगंबर नहीं हुआ, जिसने धर्म और देश की रक्षा के लिए अपने पिता, माता और चारों साहिबजादों तक का बलिदान कर दिया हो। उन्होंने ही खालसा पंथ की स्थापना की और ज्योति-जोत समाने से पहले संगत को गुरु ग्रंथ साहिब को ही शाश्वत गुरु मानने का आदेश दिया। इस अवसर पर गुरमत प्रचार ट्रस्ट के प्रधान नसीब सिंह, सचिव महेंद्र सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह जोली, परमजीत सिंह ग्रेवाल, जसपाल सिंह, अजीत सिंह, नरेंद्र सिंह, हरप्रीत सिंह, कुलदीप सिंह, गुरचरण सिंह, जीत सिंह, कुलवंत सिंह, सुरमुख सिंह उपस्थित रहे।
कीर्तन से महौल भक्तिमय
तख्त श्री केशगढ़ साहिब के हजूरी रागी भाई रौनक सिंह, भाई रणधीर सिंह और भाई करण सिंह ने गुरुबाणी के मनोहर कीर्तन से संगत को निहाल किया। देहि शिवा बर मोहि इहै जैसे शबदों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। समागम के उपरांत गुरु का अटूट लंगर बरताया गया, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
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