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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Grand opening of Maa Chandi Devi fair, devotees took blessings

Solan News: मां चंडी देवी मेले का भव्य आगाज, श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

Sat, 30 May 2026 12:30 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2026 12:30 AM IST
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दो दिन तक चलने वाले मेले के पहले दिन कबड्डी और दंगल में जुटे नामी पहलवान
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। दून विधानसभा क्षेत्र की चंडी पंचायत में दो दिवसीय जिला स्तरीय मां चंडी मेला शुक्रवार से पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। मेले के पहले दिन क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। पूर्व पंचायत प्रधान बलवंत ठाकुर और मंदिर कमेटी के अध्यक्ष चंद्र मोहन शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि मेले का विधिवत शुभारंभ मां चंडी देवी की विशेष पूजा-अर्चना और आरती के साथ किया गया। मेले को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह है और पहले ही दिन मेलार्थियों ने लोकसंपर्क विभाग व अन्य नामी कलाकारों की ओर से प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जमकर आनंद लिया। मेला कमेटी के अनुसार, इस दो दिवसीय आयोजन में खेलकूद प्रतियोगिताओं का विशेष आकर्षण है। पहले दिन जूनियर व सीनियर वर्ग की कबड्डी, दंगल और शतरंज (चैस) की प्रतियोगिताएं शुरू हुईं, जिसमें प्रदेश भर से आए खिलाड़ियों ने अपना दमखम दिखाया। इसके अलावा, दूर-दराज से आने वाले भक्तों और मेलार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में विशाल लंगर का भी आयोजन किया गया है, जो दोनों दिन निरंतर जारी रहेगा। विकास खंड पट्टा महलोग की चंडी पंचायत में स्थित मां चंडी देवी का यह मंदिर आज वैश्विक मानचित्र पर एक उभरते हुए शक्ति स्थल के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस स्थान और गांव के नामकरण को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के क्षत-विक्षत शव को अपने कंधे पर उठाकर कैलाश जा रहे थे, तो जहां-जहां सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। मां चंडी का यह दरबार भी उसी शृंखला में एक जागृत और उभरता हुआ शक्ति स्थल माना जाता है।

1910 में विधिवत स्थापित हुई थी माता की पिंडी
लोक मान्यताओं के अनुसार, सदियों पहले एक स्थानीय किसान जब अपने खेत में हल जोत रहा था, तो अचानक हल की फाली (नुकीले भाग) से एक पत्थर नुमा पिंडी पर चोट लग गई। किसान यह देखकर भयभीत और अचंभित रह गया कि उस पिंडी के ऊपरी हिस्से से लगातार खून बह रहा था। इस दैवीय घटना के बाद, उसी रात मां चंडी (काली) ने किसान को स्वप्न में साक्षात दर्शन दिए। मां ने कहा कि वे इस गांव में पिंडी रूप में प्रकट हुई हैं। यदि ग्रामीण इस पिंडी को स्थापित कर नित्य पूजा करेंगे, तो पूरे क्षेत्र का कल्याण होगा। इसके बाद वर्ष 1910 में ग्रामीणों ने एक सुंदर चौकी बनाकर, पूर्ण मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ इस पावन पिंडी को स्थापित किया। आज यह मंदिर लाखों भक्तों की अगाध निष्ठा का मुख्य केंद्र बन चुका है।
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