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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   GIS mapping of natural water resources to be done soon in Solan

जिले में प्राकृतिक जल स्रोतों की होगी जीआईएस मैपिंग

Mon, 20 Jun 2022 11:33 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2022 11:33 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। जिले में प्राकृतिक जल स्रोतों की अब जीआईएस मैपिंग की जाएगी। जीआईएस मैपिंग से जल स्रोतों के वास्तविक उद्गम स्थल की जानकारी मिलेगी। वहीं इनके संरक्षण में भी मदद मिलेगी। सोमवार को कैच द रेन अभियान के तहत उपायुक्त कार्यालय में बैठक हुई।
इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त जफर इकबाल ने की। बैठक में कृषि और जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जल स्रोतों की मैपिंग करें। इसी के साथ अन्य कार्यों की जियो टैगिंग का कार्य पूरा करें। यह अभियान पूर्णतया डिजिटल इंडिया की सोच पर आधारित है।
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उन्होंने कहा कि जल की एक-एक बूंद को बचाकर और जल का सदुपयोग कर ही हम भावी पीढ़ी को उपयोग के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध करवा पाएंगे। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण के लिए सभी सरकारी भवनों, पंचायत घरों, आंगनबाड़ी केंद्रों, विद्यालयों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित अन्य सरकारी भवनों के समीप टैंक निर्मित करने के निर्देश दिए।
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इस मौके पर जिला राजस्व अधिकारी आत्माराम नेगी, जल शक्ति विभाग नालागढ़ के अधिशासी अभियंता ई. पुनीत शर्मा, जल शक्ति विभाग सोलन के अधिशासी अभियंता ई. रविकांत शर्मा, अधिशासी अभियंता बीबी गोयल मौजूद रहे।
लोगों अधीक्षण कार्यालय से ले सकते हैं जानकारी
विभिन्न विभागों के अधिकारियों और लोगों की सुविधा के लिए जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में परामर्श केंद्र बनाए गए हैं। परामर्श केंद्र में जाकर लोग कैच द रेन और जल संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में गुणवत्ता नियंत्रण मानकों का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

जल संरक्षण के लिए हो चुके कई कार्य
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी राजकुमार ने बताया कि जिले में जल संरक्षण के तहत नौ चेक डैम का कार्य पूरा हो गया है। साथ ही 11 चेक डैम का कार्य चला हुआ है और 154 रिसाव टैंक को ठीक करवा दिया है। 156 रिसाव टैंकों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अभियान के तहत जिले में 110 अमृत सरोवर चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 98 स्वीकृत किए जा चुके हैं। 91 का निर्माण कार्य पूरा कर पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।
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