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जिले में बारिश के बाद नहीं मिल रही टमाटर की पौध
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में सूखे से निजात मिली तो अब टमाटर की पौध का संकट गहरा गया। किसानों को अब टमाटर की पौध नहीं मिल रही है। बीते शनिवार को हुई बारिश के बाद किसान टमाटर लगाने की तैयारी में है। उन्होंने खेत भी तैयार कर लिए हैं।
बुआई करने के साथ-साथ टमाटर लगाने के लिए खेत पूरी तरह से साफ कर दिए हैं लेकिन पौध अब कहीं नहीं मिल रही है। किसान 50 से 70 किलोमीटर दूर नर्सरियों में भी पता कर चुके हैं लेकिन उन्हें निराश होना पड़ रहा है। नर्सरी तैयार करने वाले किसान उन्हें एक से डेढ़ सप्ताह का समय दे रहे हैं। अभी भी जिले में 30 फीसदी खेत किसानों ने बिछेता टमाटर के लिए खाली छोड़ रखे हैं।
जून माह में बारिश के बाद किसान बिछेता टमाटर लगाते हैं। यह टमाटर सितंबर तक तैयार होता है। यह टमाटर इसलिए भी लगाया जाता है कि जब पहली फसल के अच्दे दाम न मिले तो इसके बेहतर दाम मिल जाते हैं। साथ ही इसमें मेहनत भी कम होती है। जल्द ही मानसून आने वाली है तो इसमें सिंचाई की दिक्कत नहीं आती।
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ऐसे में इस समय टमाटर लगाने के लिए किसान पौध नर्सरियों से खरीदते हैं। इस बार नर्सरियों में जितनी पौध लगी थी, वह खत्म हो चुकी है। इसका कारण यह भी है कि सूखा पड़ने से किसानों के खेतों में पौध खराब होती गई, वह नर्सरियों से खरीदते रहे।
नर्सरियों में पहले ही टमाटर की पौध बिक चुकी है। अब पौध न मिलने से किसान परेशान हैं। किसान हेमराज ने बताया कि उन्होंने टमाटर की बिछेता फसल लगानी है लेकिन अब पौध नहीं मिल रही है। उनके सारे खेत खाली पड़े हैं।
किसान रतन सिंह ने कहा कि खेत तैयार कर दिए हैं लेकिन अब पौध न मिलने से परेशान होना पड़ रहा है। अब एक से डेढ़ हफ्ते बाद ही नर्सरी वाले पौध देने की बात कर रहे हैं।
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सोलन। जिले में सूखे से निजात मिली तो अब टमाटर की पौध का संकट गहरा गया। किसानों को अब टमाटर की पौध नहीं मिल रही है। बीते शनिवार को हुई बारिश के बाद किसान टमाटर लगाने की तैयारी में है। उन्होंने खेत भी तैयार कर लिए हैं।
बुआई करने के साथ-साथ टमाटर लगाने के लिए खेत पूरी तरह से साफ कर दिए हैं लेकिन पौध अब कहीं नहीं मिल रही है। किसान 50 से 70 किलोमीटर दूर नर्सरियों में भी पता कर चुके हैं लेकिन उन्हें निराश होना पड़ रहा है। नर्सरी तैयार करने वाले किसान उन्हें एक से डेढ़ सप्ताह का समय दे रहे हैं। अभी भी जिले में 30 फीसदी खेत किसानों ने बिछेता टमाटर के लिए खाली छोड़ रखे हैं।
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जून माह में बारिश के बाद किसान बिछेता टमाटर लगाते हैं। यह टमाटर सितंबर तक तैयार होता है। यह टमाटर इसलिए भी लगाया जाता है कि जब पहली फसल के अच्दे दाम न मिले तो इसके बेहतर दाम मिल जाते हैं। साथ ही इसमें मेहनत भी कम होती है। जल्द ही मानसून आने वाली है तो इसमें सिंचाई की दिक्कत नहीं आती।
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ऐसे में इस समय टमाटर लगाने के लिए किसान पौध नर्सरियों से खरीदते हैं। इस बार नर्सरियों में जितनी पौध लगी थी, वह खत्म हो चुकी है। इसका कारण यह भी है कि सूखा पड़ने से किसानों के खेतों में पौध खराब होती गई, वह नर्सरियों से खरीदते रहे।
नर्सरियों में पहले ही टमाटर की पौध बिक चुकी है। अब पौध न मिलने से किसान परेशान हैं। किसान हेमराज ने बताया कि उन्होंने टमाटर की बिछेता फसल लगानी है लेकिन अब पौध नहीं मिल रही है। उनके सारे खेत खाली पड़े हैं।
किसान रतन सिंह ने कहा कि खेत तैयार कर दिए हैं लेकिन अब पौध न मिलने से परेशान होना पड़ रहा है। अब एक से डेढ़ हफ्ते बाद ही नर्सरी वाले पौध देने की बात कर रहे हैं।