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Solan News: ग्रामीणों की मलकियत भूमि पर पहुंचने लगा डंपिंग साइट का मलबा
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शिमला-परवाणू फोरलेन पर वाकनाघाट में की जा रही डंपिंग। संवाद
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छावशा व वाकना गांव में जल स्त्रोत दबे, खड्ड में पानी का प्रवाह रुका
बुधवार को एनएचएआई के अधिकारी मिले दो पंचायतों के ग्रामीणों से
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल/कंडाघाट(सोलन)। परवाणू-शिमला फोरलेन पर कंडाघाट के समीप वाकनाघाट में वर्ष 2020 से लेकर एनएचएआई द्वारा डंपिंग की जा रही है। यह डंपिंग पहले गांव की शामलात भूमि पर की जा रही थी, लेकिन डंपिंग साइट भर गई है और मलबा ग्रामीणों की मलकियत भूमि में चला गया है। इस डंपिंग साइट के नीचे ग्राम पंचायत छावशा व वाकना पंचायत के लोगों की मलकियत भूमि आती है।
इस मलबे के कारण ग्रामीणों की दो पाइपलाइन दब गई है। पीने के पानी की जल स्रोत दब गए हैं। एक पीने के पानी की बावड़ी दब गई है। वाकना मझोल खड्ड में पानी का प्रवाह रुक गया है। वाकना गांव के लिए एंबुलेंस मार्ग बनाया गया था। उस पर अब 12 टायर वाले डंपर चलते हैं। यह मार्ग कई जगह धंस गया है, जबकि लोक निर्माण विभाग ने मार्ग को मरम्मत करने से मना कर दिया है। ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस विषय में ग्रामीण स्थानीय उपमंडलाधिकारी कंडाघाट गोपाल चंद शर्मा से भी मिल चुके हैं। उन्होंने एनएचएआई को सुरक्षा दीवार बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एनएचएआई ने इस दीवार को ऊपर से ही लगाया है यह कभी भी गिर सकती है। बुधवार एनएचएआई का एक अधिकारी और दो कनिष्ठ अभियंता मौके पर पहुंचे और दो ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों से मिले। जिसमें ग्राम पंचायत वाकना के पूर्व प्रधान फूलचंद, उपप्रधान नरेश कुमार, हरजिंदर कुमार, सोमदत्त ठाकुर, श्यामलाल, ललित शर्मा, जबकि ग्राम पंचायत छावशा के मझोले गांव के रामेश्वर, रणजीत ठाकुर, ओमप्रकाश, वरेंद्र कुमार, सुरेंद्र कुमार, शकुंतला देवी पूर्व पंचायत सदस्य सहित करीब 20 लोग शामिल थे। उन लोगों ने अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। एनएचएआई से टीम ने लोगों की समस्याओं ध्यानपूर्वक सुना और उनका समाधान करने का आश्वासन दिया। इन ग्रामीणों ने एक महीने पहले प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से भी पत्राचार के माध्यम से अवगत करवाया था।
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बुधवार को एनएचएआई के अधिकारी मिले दो पंचायतों के ग्रामीणों से
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल/कंडाघाट(सोलन)। परवाणू-शिमला फोरलेन पर कंडाघाट के समीप वाकनाघाट में वर्ष 2020 से लेकर एनएचएआई द्वारा डंपिंग की जा रही है। यह डंपिंग पहले गांव की शामलात भूमि पर की जा रही थी, लेकिन डंपिंग साइट भर गई है और मलबा ग्रामीणों की मलकियत भूमि में चला गया है। इस डंपिंग साइट के नीचे ग्राम पंचायत छावशा व वाकना पंचायत के लोगों की मलकियत भूमि आती है।
इस मलबे के कारण ग्रामीणों की दो पाइपलाइन दब गई है। पीने के पानी की जल स्रोत दब गए हैं। एक पीने के पानी की बावड़ी दब गई है। वाकना मझोल खड्ड में पानी का प्रवाह रुक गया है। वाकना गांव के लिए एंबुलेंस मार्ग बनाया गया था। उस पर अब 12 टायर वाले डंपर चलते हैं। यह मार्ग कई जगह धंस गया है, जबकि लोक निर्माण विभाग ने मार्ग को मरम्मत करने से मना कर दिया है। ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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इस विषय में ग्रामीण स्थानीय उपमंडलाधिकारी कंडाघाट गोपाल चंद शर्मा से भी मिल चुके हैं। उन्होंने एनएचएआई को सुरक्षा दीवार बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एनएचएआई ने इस दीवार को ऊपर से ही लगाया है यह कभी भी गिर सकती है। बुधवार एनएचएआई का एक अधिकारी और दो कनिष्ठ अभियंता मौके पर पहुंचे और दो ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों से मिले। जिसमें ग्राम पंचायत वाकना के पूर्व प्रधान फूलचंद, उपप्रधान नरेश कुमार, हरजिंदर कुमार, सोमदत्त ठाकुर, श्यामलाल, ललित शर्मा, जबकि ग्राम पंचायत छावशा के मझोले गांव के रामेश्वर, रणजीत ठाकुर, ओमप्रकाश, वरेंद्र कुमार, सुरेंद्र कुमार, शकुंतला देवी पूर्व पंचायत सदस्य सहित करीब 20 लोग शामिल थे। उन लोगों ने अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। एनएचएआई से टीम ने लोगों की समस्याओं ध्यानपूर्वक सुना और उनका समाधान करने का आश्वासन दिया। इन ग्रामीणों ने एक महीने पहले प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से भी पत्राचार के माध्यम से अवगत करवाया था।
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