{"_id":"5885f8734f1c1b051fcf3e22","slug":"fire-in-residence-aria-in-solan","type":"story","status":"publish","title_hn":" शहर के रिहायशी इलाके में आग लगने से अफरातफरी ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शहर के रिहायशी इलाके में आग लगने से अफरातफरी
ब्यूरो सोलन
Updated Mon, 23 Jan 2017 10:14 PM IST
विज्ञापन
कोटलानाला अस्पताल मार्ग के पॉश इलाके में देर रात एक पांच मंजिला भवन की निचले मंजिल में चल रहे उद्योग में भड़की आग से लाखों का नुकसान हो गया।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटलानाला अस्पताल मार्ग के पॉश इलाके में देर रात एक पांच मंजिला भवन की निचले मंजिल में चल रहे उद्योग में भड़की आग से लाखों का नुकसान हो गया। रिहायशी इलाके में हुई इस घटना से आधी रात को पूरे क्षेत्र में दहशत फैली रही। लोगों ने अपने घरों से रसोई गैस के सिलेंडर बाहर निकाल दिए। मेन स्विच ऑफ कर दिए। यहां एक बिल्डिंग के साथ दूसरी सटी हुई है। ऐसे में आग लगते ही जैसे धुआं उठा तो कुछ लोगों ने आग आग चिल्लाना शुरू कर दिया।
विज्ञापन
लोगों की नींद खुल गई और आग फैलने के डर से चिल्लाना शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद करीब डेढ़ घंटे के भीतर आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में आगजनी का कारण शॉर्टसर्किट बताया जा रहा है। पांच मंजिला भवन के निचले फ्लोर में रेलवे सिग्नल बनते हैं। दमकल विभाग के अधिकारी करीब ढाई लाख का नुकसान बता रहे हैं। कंपनी प्रबंधन इससे कहीं अधिक नुकसान आंक रहा है। फिलहाल मामले की पुलिस जांच कर रही है।
विज्ञापन
अव्यवस्था! फोन करते रहे पर नहीं कटी बिजली
आपदा प्रबंधन के नाम पर की जाने वाली मॉकड्रिल क्या सिर्फ दिखावा है? आपदा के समय विभागों में आपसी तालमेल की प्रेक्टिस हकीकत में आगजनी के वक्त कैसे हवा साबित होती है, इसका अंदाजा इसी घटना से लगाया जा सकता है। हुआ यूं कि आगजनी की सूचना मिलते ही दमकल विभाग के जवान मौके पर पहुंच गए। लेकिन आग बुझाने के लिए जैसे ही आगे बड़े घटनास्थल पर करंट दौड़ गया।
विज्ञापन
आपातकाल के समय बिजली बोर्ड वालों को फोन पर बिजली बंद करने की सूचना दी। सभी इमरजेंसी नंबर डायल किए लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। लिहाजा रिस्क लेते हुए दमकल विभाग के जवानों ने ही तार कट दी। बाद में बोर्ड के अधिकारियों को जब फोन घनघनाए गए तब जाकर 33 केवी से डायरेक्ट लाइट बंद की गई। उधर बिजली बोर्ड के एसडीओ देसराज पठानिया ने कहा कि वह किसी इमरजेंसी में अस्पताल में थे। ऐसा हुआ है। पूरी सूचना एक्सइएन को दे दी है। अफसरों ने ही रात को 33 केवी से बिजली बंद करवाई है। उन्होंने कहा कि पूरी रात कोई कंप्लेंट रूम में नहीं होता। रात को ड्यूटी नहीं होती। अगर ऐसा है तो सवाल उठता है कि बिजली काटने के लिए आखिर दमकल विभाग किसे फोन करे?
रात सवा एक बजे भड़की आग
सब फायर ऑफिसर हेम राज ने बताया कि आग रात करीब सवा एक बजे लगी है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम दो फायर टैंडर के साथ मौके पर पहुंच गई। बचाव कार्य शुरू किया गया। डेढ़ घंटे बाद आग पर काबू पाया गया। आरटी विजन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक उद्योग में रेलवे सिग्नल बनाए जाते हैं। ढाई लाख का नुकसान आंका है। करोड़ों की प्रापर्टी बचाई गई है। बिजली बोर्ड के नंबरों पर फोन न करने पर जब किसी ने नहीं उठाया तो खुद बिजली काटनी पड़ी।
लोगों ने घटना पर जताया रोष
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में काफी रोष है। यहां तक की लोगों ने रिहायशी इलाकों में इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियों पर भी प्रश्न भी उठाए हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां रिहायशी इलाकों से बाहर होनी चाहिए। यह वार्ड नंबर नौ का क्षेत्र है। कहा कि नप को भी ऐसे भवन चिन्हित करने चाहिए और जिससे रिहायशी इलाकों में आग का खतरा हो।