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बस हादसे में मारे गए लोगों की जेब से उड़ा लिए पैसे
Updated Tue, 12 Jun 2018 10:17 PM IST
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सोलन। हरिद्वार जा रहे कसौली के परिवार के दो सदस्यों की सड़क हादसे में मौत के बाद परिजनों ने यमुनानगर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद मृतकों और घायलों की जेब से पैसे तक निकाल लिए गए। यहां तक कि दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी में लगे स्टीरियो को भी किसी ने चोरी कर लिया।
दोनों मृतकों की जेब में पुलिस ने 62 रुपये मिलने की बात कही है। परिजनों का कहना है कि मृतक रोहित शर्मा की जेब में 13 हजार रुपये नकद थे। क्रियाकर्म के लिए 15 हजार रुपये अलग से गाड़ी में रखे थे। इनका कोई पता नहीं है। हादसा करीब साढ़े तीन बजे के बाद हुआ। ढाबा चालक ने सबसे पहले हादसे की सूचना पुलिस और एंबुलेंस को दी। मृतक रोहित के चाचा घनश्याम शर्मा ने बताया कि गाड़ी से पैसे चोरी होने का उन्हें मलाल नहीं है। लेकिन दुख सिर्फ इस बात का है कि पैसे निकालने वालों ने मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। अति व्यस्त हाइवे होने के बावजूद पुलिस की पीसीआर नहीं पहुंची। चालान काटने के वक्त हिमाचल से जाने वाली हर गाड़ी को कई बार नाकों पर रोका जाता है। सुबह चारों को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। यहां रोहित शर्मा और भगवान दत्त को मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन जिंदा बचे अमरनाथ और चालक जयकिशन को करीब साढ़े दस बजे तक रेफर नहीं किया गया। कसौली से परिजन अस्पताल पहुंचे तब उन्हें पीजीआई भेजा गया। इस बीच हताश परिजन यमुनानगर के सभी थानों में फोन मिलाते रहे। लेकिन किसी ने भी उन्हें सही ठिकाने और हालात की जानकारी नहीं दी।
पैतृक गांव मंधियाना में हुआ अंतिम संस्कार
घनश्याम शर्मा ने बताया कि दोनों शव देर रात करीब दस बजे घर पहुंचा दिए थे। इनका कसौली में मंधियाना स्थित पैतृक शमशान घाट में सुबह दस बजे अंतिम संस्कार किया गया। बताया कि हादसे में गंभीर रूप से घायल अमरनाथ और चालक जयकिशन का पीजीआई में उपचार चल रहा है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हादसे की खबर सुनकर मंगलवार को समूचे मंधियाना गांव शोक में डूबा रहा। बताया कि हादसे का शिकार हुए सभी लोग मिलनसार स्वभाव के थे। उनकी मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
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सिर पर चोट बनी मौत की वजह
यमुनानगर हादसे में रोहित और भगवान दत्त की मौत सिर पर चोट लगने की वजह से हुई है। हादसे के बाद से दोनों का सिर खुला हुआ था। घनश्याम शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि हरिद्वार या निजी कार्य से हरियाणा जाने वालों की सुरक्षा के लिए वहां की सरकार से बात की जाए ताकि भीषण हादसे में घायलों को लावारिसों की तरह सड़क पर न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि समय पर मदद मिलने से जिंदगी बचाई जा सकती थी।
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दोनों मृतकों की जेब में पुलिस ने 62 रुपये मिलने की बात कही है। परिजनों का कहना है कि मृतक रोहित शर्मा की जेब में 13 हजार रुपये नकद थे। क्रियाकर्म के लिए 15 हजार रुपये अलग से गाड़ी में रखे थे। इनका कोई पता नहीं है। हादसा करीब साढ़े तीन बजे के बाद हुआ। ढाबा चालक ने सबसे पहले हादसे की सूचना पुलिस और एंबुलेंस को दी। मृतक रोहित के चाचा घनश्याम शर्मा ने बताया कि गाड़ी से पैसे चोरी होने का उन्हें मलाल नहीं है। लेकिन दुख सिर्फ इस बात का है कि पैसे निकालने वालों ने मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। अति व्यस्त हाइवे होने के बावजूद पुलिस की पीसीआर नहीं पहुंची। चालान काटने के वक्त हिमाचल से जाने वाली हर गाड़ी को कई बार नाकों पर रोका जाता है। सुबह चारों को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। यहां रोहित शर्मा और भगवान दत्त को मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन जिंदा बचे अमरनाथ और चालक जयकिशन को करीब साढ़े दस बजे तक रेफर नहीं किया गया। कसौली से परिजन अस्पताल पहुंचे तब उन्हें पीजीआई भेजा गया। इस बीच हताश परिजन यमुनानगर के सभी थानों में फोन मिलाते रहे। लेकिन किसी ने भी उन्हें सही ठिकाने और हालात की जानकारी नहीं दी।
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पैतृक गांव मंधियाना में हुआ अंतिम संस्कार
घनश्याम शर्मा ने बताया कि दोनों शव देर रात करीब दस बजे घर पहुंचा दिए थे। इनका कसौली में मंधियाना स्थित पैतृक शमशान घाट में सुबह दस बजे अंतिम संस्कार किया गया। बताया कि हादसे में गंभीर रूप से घायल अमरनाथ और चालक जयकिशन का पीजीआई में उपचार चल रहा है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हादसे की खबर सुनकर मंगलवार को समूचे मंधियाना गांव शोक में डूबा रहा। बताया कि हादसे का शिकार हुए सभी लोग मिलनसार स्वभाव के थे। उनकी मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
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सिर पर चोट बनी मौत की वजह
यमुनानगर हादसे में रोहित और भगवान दत्त की मौत सिर पर चोट लगने की वजह से हुई है। हादसे के बाद से दोनों का सिर खुला हुआ था। घनश्याम शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि हरिद्वार या निजी कार्य से हरियाणा जाने वालों की सुरक्षा के लिए वहां की सरकार से बात की जाए ताकि भीषण हादसे में घायलों को लावारिसों की तरह सड़क पर न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि समय पर मदद मिलने से जिंदगी बचाई जा सकती थी।