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अश्वनी-गिरि स्कीमों के पानी में मिल रही सोलन शहर की गंदगी
ब्यूरो, अमर उजाला/ (सोलन)।
Updated Thu, 21 Jan 2016 07:59 PM IST
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सिस्टम चल रहा है। सोलन शहर में दशकों पुरानी सरकारी और निजी पानी के पाइप जंग खा चुके हैं। अश्वनी और गिरि के संदेहजनक पानी में नालियों और सीवरेज की गंदगी भी रिसकर इन्हीं पाइपों के जरिये आपके घरों तक पहुंच रही है। तो ऐसे में पीलिया जैसे जलजनित रोग अब तक क्यों न पहुंचे।
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प्रश्न उठता है कि बदलाव की जिम्मेदारी उठाए तो उठाए कौन? हैरत है कि आईपीएच के अधिकारी बोल रहे हैं पाइपें बदलने का काम नगर परिषद का है तो नप के अधिकारियों के अनुसार पाइपें बदलना जनता की जिम्मेदारी है। गले-सड़े पाइप लोगों के हैं। इसे बदलने की जरूरत है। लेकिन वह बदलते नहीं। हालांकि नियमों के तहत मुख्य पाइपलाइन के आगे घरों तक निजी पाइप पहुंचते हैं। लेकिन एक ही प्वाइंट से मुख्य पाइपलाइन से कई प्वाइंट भी जोड़ दिए हैं जो कहीं न कहीं बीमारी फैलाने के जिम्मेदार हैं। कई स्थानों से आईपीएच के पाइप भी इनके साथ गुजर रहे हैं।
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लिहाजा अंग्रेजों के जमाने में बसे शहर में आजादी के बाद सरकार कांग्रेस की भी रही और भाजपा की भी। नगर परिषद के गठन के बाद भी दोनों पार्टियों ने कमान संभाली। लेकिन इसे शहरवासियों का दुर्भाग्य ही कहिए कि सब कुछ बदला लेकिन बदला नहीं तो गंदी नालियों और सीवरेज के गंद के बीच पीने के पानी की पाइप का गुजरना। सोलन शहर मुख्य मालरोड, अपर बाजार और राजगढ़ रोड की ग्राउंड रिएलिटी सरकार, आईपीएच, प्रशासन और नगर परिषद की नाकामी बयां कर रही है।
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डोर टू डोर मुहिम छेड़ने को तैयार नप
नगर परिषद के ईओ बीआर नेगी का कहना है कि पानी के पाइपों को बदलने के लिए नगर परिषद ने कई बार लोगों को आगाह किया है। गंदी नालियों से पाइपों को बदलने के लिए कहा है, लेकिन लोग सुनते ही नहीं हैं। अगर लोग गंदी नालियाें से गुजरने वाली व्यवस्था बदलें तो नप हरसंभव सहायता देगा। इसके लिए नगर परिषद डोर-टू-डोर मुहिम छेड़ने को तैयार है।
समय-समय पर देते हैं सुझाव
उधर आईपीएच के अधिकारियों का तर्क है कि पानी के पाइप बदलने के लिए समय-समय पर सुझाव दिए जा रहे हैं। दावा किया कि अश्वनी का पानी तो स्वच्छ रूप से पहुंचाया जा रहा है। लेकिन आगे व्यवस्था सही न होने के कारण दिक्कत है। पेयजल वितरण का जिम्मा नगर परिषद देखता है।