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Solan News: देश की 1.5 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर पारंपरिक खेती की तैयारी
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नौणी विवि एचआईएल ने भारत में प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के लिए साझेदारी करते हुए। संवाद
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नौणी विवि ने एचआईएल के बीच किया एमओयू
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का करेंगे काम
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के सात केंद्रों में से नौणी को भी किया शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि और हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (एचआईएल) ने देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह एमओयू वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) के क्षेत्रीय चाइल्ड परियोजना जो भारत में फोस्टरिंग एग्रो केमिकल रिडक्शन एंड मैनेजमेंट पहल के माध्यम से कृषि रसायन के उपयोग को कम करने और प्रतिबंधित करने पर केंद्रित है।
इस एमओयू पर नौणी के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल और एचआईएल के प्रबंध निदेशक कुलदीप सिंह ने हस्ताक्षर किए। फार्म परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य रासायनिक कीटनाशकों के लिए सुरक्षित विकल्प देना और भारत के कृषक समुदायों के बीच प्राकृतिक खेती सहित एकीकृत कीट प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना है। इस पहल का लक्ष्य 1.5 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि को पारंपरिक रासायनिक खेती से जैविक, प्राकृतिक खेती के तरीकों में परिवर्तित करना। 1.5 मिलियन लोगों को हानिकारक कीटनाशकों के संपर्क से बचाना है।
नौणी विवि की कुलपति ने कहा कि यह सहयोग कृषि में रासायनिक उपयोग को कम करने और राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के लिए पायलट मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। विवि प्राकृतिक खेती जैसी कृषि पारिस्थितिकी प्रथाओं में अग्रणी कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय पहले से ही यूरोपीय संघ द्वारा वित्त पोषित एक्रोपिक्स कंसोर्टियम का हिस्सा है। इस संघ का लक्ष्य कृषि पारिस्थितिकीय फसल संरक्षण में सह-नवाचार को बढ़ावा देना है, जिसमें 13 देशों के 15 सदस्य हैं, जिनमें 12 शैक्षणिक संगठन और तीन कंपनियां शामिल हैं। इसका लक्ष्य कृषि पारिस्थितिकी फसल संरक्षण में प्रणालीगत नवाचारों के माध्यम से रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग में कमी को बढ़ावा देना है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओरसे लॉन्च की गए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के सात केंद्रों में से एक के रूप में विश्वविद्यालय को चुना गया है।
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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का करेंगे काम
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के सात केंद्रों में से नौणी को भी किया शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि और हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (एचआईएल) ने देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह एमओयू वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) के क्षेत्रीय चाइल्ड परियोजना जो भारत में फोस्टरिंग एग्रो केमिकल रिडक्शन एंड मैनेजमेंट पहल के माध्यम से कृषि रसायन के उपयोग को कम करने और प्रतिबंधित करने पर केंद्रित है।
इस एमओयू पर नौणी के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल और एचआईएल के प्रबंध निदेशक कुलदीप सिंह ने हस्ताक्षर किए। फार्म परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य रासायनिक कीटनाशकों के लिए सुरक्षित विकल्प देना और भारत के कृषक समुदायों के बीच प्राकृतिक खेती सहित एकीकृत कीट प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना है। इस पहल का लक्ष्य 1.5 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि को पारंपरिक रासायनिक खेती से जैविक, प्राकृतिक खेती के तरीकों में परिवर्तित करना। 1.5 मिलियन लोगों को हानिकारक कीटनाशकों के संपर्क से बचाना है।
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नौणी विवि की कुलपति ने कहा कि यह सहयोग कृषि में रासायनिक उपयोग को कम करने और राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के लिए पायलट मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। विवि प्राकृतिक खेती जैसी कृषि पारिस्थितिकी प्रथाओं में अग्रणी कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय पहले से ही यूरोपीय संघ द्वारा वित्त पोषित एक्रोपिक्स कंसोर्टियम का हिस्सा है। इस संघ का लक्ष्य कृषि पारिस्थितिकीय फसल संरक्षण में सह-नवाचार को बढ़ावा देना है, जिसमें 13 देशों के 15 सदस्य हैं, जिनमें 12 शैक्षणिक संगठन और तीन कंपनियां शामिल हैं। इसका लक्ष्य कृषि पारिस्थितिकी फसल संरक्षण में प्रणालीगत नवाचारों के माध्यम से रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग में कमी को बढ़ावा देना है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओरसे लॉन्च की गए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के सात केंद्रों में से एक के रूप में विश्वविद्यालय को चुना गया है।
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