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सोलन-शिमला जाने में छूटने लगे पसीने
Solan
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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सोलन-शिमला जाने में छूटने लगे पसीने
सोलन। परिवहन कर्मचारी संघ के वर्क टू रूल के चलते सोलन से शिमला और शिमला से सोलन की ओर आने वाले कर्मचारियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शिमला से 50 किलोमीटर की दूरी पर सोलन में अधिकतर लोग सोलन में नौकरी कर रहे हैं। जिनमें कु छ सरकारी और निजी संस्थाओं में क ार्यकरत लोग शामिल हैं। अधिकत्तर सोलन शिमला का आवागमन करते हैं। वर्क टू रूल के तहत कर्मचारियों को सुबह तो अन्य परिवहनों और प्राइवेट बसों में सफ र कर पहुंच जाते हैं, लेकि न वर्क टू रूल का अधिक प्रभाव शाम पांच बजे के बाद देखने को मिलता है। शाम पांच बजे के बाद बसों की कमी खलने लगती है। अधिकतर शिमला सोलन की ओर आने जाने वाली प्राइवेट बसें शाम छह बजे के बाद बंद हो जाती हैं। जिसके बाद शिमला जाने वाले यात्रियों का एक मात्र सहारा रह जाता है, पंजाब और हरियाणा रोडवेज बसों का। यह बसें अक्सर चंडीगढ़ से पूरी तरह भरी होती हैं। कई बार तो बस में पांव फंसाने की जगह भी नहीं होती। दूसरी ओर कई बार यह बसे स्टापेज पर रुकती ही नहीं। जिसके कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना एचआरटी सोलन शिमला रूटों की बसों की राह देखनी पड़ती है। कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक वनीता वर्मा ने बताया कि वीरवार को सोलन का एक शिमला रूट धारकंाडली रूट प्रभावित हुआ है। अन्य सभी रूटों पर बसें नियमित रूप से चलाई गई।
आंखों देखा हाल...
सोलन से शिमला की ओर जा रहे चंबाघाट बस स्टाप पर सांय 6.35 पर बस इंतजार कर रहा व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से पूछता है भाई साहब.... शिमला के लिए कोई बस आएगी। दूसरा व्यक्ति जवाब देते हुए कहता है, ‘भाई में पिछले 25 मिनट से इंतजार कर रहा हूं अभी तो कोई बस नहीं और हरियाणा रोडवेज की जो बस आई उसमें पांव रखने की जगह नहीं और मेरी टांग का फ्रेक्चर अभी कुछ ही महीना पहले ठीक हुआ है। शिमला के रहने वाले व सोलन में नौकरी कर रहे सुनील राज्टा, खेम चंद, प्रीवण चंदेल, रमन कपिला, मनोज, सुरेंद्र काल्टा के अनुसार वर्क टू रूल उनके लिए आफत बन गया है।
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सोलन। परिवहन कर्मचारी संघ के वर्क टू रूल के चलते सोलन से शिमला और शिमला से सोलन की ओर आने वाले कर्मचारियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शिमला से 50 किलोमीटर की दूरी पर सोलन में अधिकतर लोग सोलन में नौकरी कर रहे हैं। जिनमें कु छ सरकारी और निजी संस्थाओं में क ार्यकरत लोग शामिल हैं। अधिकत्तर सोलन शिमला का आवागमन करते हैं। वर्क टू रूल के तहत कर्मचारियों को सुबह तो अन्य परिवहनों और प्राइवेट बसों में सफ र कर पहुंच जाते हैं, लेकि न वर्क टू रूल का अधिक प्रभाव शाम पांच बजे के बाद देखने को मिलता है। शाम पांच बजे के बाद बसों की कमी खलने लगती है। अधिकतर शिमला सोलन की ओर आने जाने वाली प्राइवेट बसें शाम छह बजे के बाद बंद हो जाती हैं। जिसके बाद शिमला जाने वाले यात्रियों का एक मात्र सहारा रह जाता है, पंजाब और हरियाणा रोडवेज बसों का। यह बसें अक्सर चंडीगढ़ से पूरी तरह भरी होती हैं। कई बार तो बस में पांव फंसाने की जगह भी नहीं होती। दूसरी ओर कई बार यह बसे स्टापेज पर रुकती ही नहीं। जिसके कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना एचआरटी सोलन शिमला रूटों की बसों की राह देखनी पड़ती है। कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक वनीता वर्मा ने बताया कि वीरवार को सोलन का एक शिमला रूट धारकंाडली रूट प्रभावित हुआ है। अन्य सभी रूटों पर बसें नियमित रूप से चलाई गई।
आंखों देखा हाल...
सोलन से शिमला की ओर जा रहे चंबाघाट बस स्टाप पर सांय 6.35 पर बस इंतजार कर रहा व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से पूछता है भाई साहब.... शिमला के लिए कोई बस आएगी। दूसरा व्यक्ति जवाब देते हुए कहता है, ‘भाई में पिछले 25 मिनट से इंतजार कर रहा हूं अभी तो कोई बस नहीं और हरियाणा रोडवेज की जो बस आई उसमें पांव रखने की जगह नहीं और मेरी टांग का फ्रेक्चर अभी कुछ ही महीना पहले ठीक हुआ है। शिमला के रहने वाले व सोलन में नौकरी कर रहे सुनील राज्टा, खेम चंद, प्रीवण चंदेल, रमन कपिला, मनोज, सुरेंद्र काल्टा के अनुसार वर्क टू रूल उनके लिए आफत बन गया है।
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