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बिजली पर निर्भर शहर की पेयजल व्यवस्था
Updated Wed, 16 May 2018 10:08 PM IST
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सोलन। बिजली गुल होते ही शहर की करीब साठ हजार आबादी की पेयजल आपूर्ति भी बंद हो जाती है। उठाऊ पेयजल योजना के माध्यम से गिरि और अश्वनी खड्ड से सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग शहर को पानी की सप्लाई दे रहा है। यह सप्लाई बिजली के माध्यम से पूरी हो रही है। लेकिन सप्लाई को बरकरार रखने के लिए वैकल्पिक प्रबंध नहीं हैं।
बिजली कट शुरू होते ही पानी की सप्लाई ठप हो जाती है। यदि पूरा दिन बिजली बंद रही तो उठाऊ पेयजल करीब तीन दिन तक प्रभावित रहती है। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग उठाऊ पेयजल योजना के लिए जेनरेटर का प्रबंध करने में नाकाम रहा है। इसके चलते बारिश और तूफान के दौरान बिजली कट की वजह से पानी की सप्लाई बाधित हो जाती है। मई के शुरुआत में ही मौसम खराब रहने से शहर में तीन दिन तक पानी की सप्लाई नहीं आ पाई थी। नप ने पेयजल सप्लाई प्रभावित रहने के लिए सीधे तौर पर आईपीएच को जिम्मेदार ठहराया है। आईपीएच को रोजाना शहर के लिए 20 लाख गैलेन पानी की सप्लाई करनी होती है। लेकिन बरसात के दिनों में यह सप्लाई पूरी नहीं हो पाती है। इसके चलते शहर में पानी नहीं आता है और लोगों को चौथे या पांचवें दिन पानी नसीब होता है।
नहीं है 11 हजार किलोवाट क्षमता का जेनरेटर : आईपीएच
सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता अवनीश शर्मा ने कहा कि उठाऊ पेयजल योजना में 11 हजार किलोवाट बिजली की जरूरत पड़ती है। इतनी क्षमता का जेनरेटर विभाग के पास नहीं है। बिजली बोर्ड से मिलने वाली बिजली को उठाऊ पेयजल योजना में लगाया गया है। कट के दौरान सप्लाई ठप हो जाती है। उन्होंने कहा कि इसका अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
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आईपीएच करे जेनरेटर का प्रबंध : अध्यक्ष
नप अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि बिजली कट से पानी की सप्लाई नहीं होती है। एक बार सप्लाई प्रभावित हो तो शहर में तीन दिन तक पेयजल संकट रहता है। व्यवस्था दोबारा बनाने में समय लगता है। आईपीएच को उठाऊ पेयजल योजना के लिए जेनरेटर का प्रबंध करना चाहिए।
शहर को 20 लाख गैलेन की जरूरत
शहर में पंजीकृत आबादी करीब 60 हजार है। रोजाना 20 लाख गैलेन पानी की आवश्यकता रहती है। नप आईपीएच से पानी लेता है और तय नियमों के अनुसार उसे ंसप्लाई करता है। इसके लिए स्टोरेज टैंक बनाए हैं। लेकिन बारिश के दौरान गाद आने से या कट के चलते बिजली बंद होने की वजह से पानी की सप्लाई ठप हो जाती है।
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बिजली कट शुरू होते ही पानी की सप्लाई ठप हो जाती है। यदि पूरा दिन बिजली बंद रही तो उठाऊ पेयजल करीब तीन दिन तक प्रभावित रहती है। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग उठाऊ पेयजल योजना के लिए जेनरेटर का प्रबंध करने में नाकाम रहा है। इसके चलते बारिश और तूफान के दौरान बिजली कट की वजह से पानी की सप्लाई बाधित हो जाती है। मई के शुरुआत में ही मौसम खराब रहने से शहर में तीन दिन तक पानी की सप्लाई नहीं आ पाई थी। नप ने पेयजल सप्लाई प्रभावित रहने के लिए सीधे तौर पर आईपीएच को जिम्मेदार ठहराया है। आईपीएच को रोजाना शहर के लिए 20 लाख गैलेन पानी की सप्लाई करनी होती है। लेकिन बरसात के दिनों में यह सप्लाई पूरी नहीं हो पाती है। इसके चलते शहर में पानी नहीं आता है और लोगों को चौथे या पांचवें दिन पानी नसीब होता है।
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नहीं है 11 हजार किलोवाट क्षमता का जेनरेटर : आईपीएच
सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता अवनीश शर्मा ने कहा कि उठाऊ पेयजल योजना में 11 हजार किलोवाट बिजली की जरूरत पड़ती है। इतनी क्षमता का जेनरेटर विभाग के पास नहीं है। बिजली बोर्ड से मिलने वाली बिजली को उठाऊ पेयजल योजना में लगाया गया है। कट के दौरान सप्लाई ठप हो जाती है। उन्होंने कहा कि इसका अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
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आईपीएच करे जेनरेटर का प्रबंध : अध्यक्ष
नप अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि बिजली कट से पानी की सप्लाई नहीं होती है। एक बार सप्लाई प्रभावित हो तो शहर में तीन दिन तक पेयजल संकट रहता है। व्यवस्था दोबारा बनाने में समय लगता है। आईपीएच को उठाऊ पेयजल योजना के लिए जेनरेटर का प्रबंध करना चाहिए।
शहर को 20 लाख गैलेन की जरूरत
शहर में पंजीकृत आबादी करीब 60 हजार है। रोजाना 20 लाख गैलेन पानी की आवश्यकता रहती है। नप आईपीएच से पानी लेता है और तय नियमों के अनुसार उसे ंसप्लाई करता है। इसके लिए स्टोरेज टैंक बनाए हैं। लेकिन बारिश के दौरान गाद आने से या कट के चलते बिजली बंद होने की वजह से पानी की सप्लाई ठप हो जाती है।