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जंगली रास्ता होने से स्कूल छोड़ रहे बुई गांव के बच्चे
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अमर उजाला ब्यूरो
अर्की (सोलन)। जिले के अंतिम छोर पर बसे मांगल पंचायत के कुछ ऐसे गांव हैं जो आजादी के 70 साल बाद भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। मांगल पंचायत के ऐसे ही एक गांव बुई में सड़क तो दूर एंबुलेंस मार्ग तक नहीं बन पाया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना या नाबार्ड की अन्य योजनाएं इस गांव को सड़क सुविधा मुहैया करवाने में नाकाम रहीं हैं।
इस कारण स्थानीय लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सड़क सुविधा न मिलने के कारण करीब एक दर्जन से अधिक विद्यार्थी स्कूल छोड़ कर घर पर बैठ गए हैं। वहीं अन्य बच्चों ने भी धीरे-धीरे स्कूल जाना बंद कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण क्षेत्र के लिए सड़क सुविधा न होना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार उक्त क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्कूल जाने के लिए सुबह छह बजे घर से पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद वे सुबह की प्रार्थना सभा के बाद स्कूल पहुंचते हैं। वहीं शाम को घर पहुंचने में काफी समय लग जाता है। घने और सुनसान जंगल में देर शाम घर आने में बच्चे डरते हैं और रोज जान हथेली में रखकर घर पहुंचते हैं। वहीं विभाग का कहना है कि लोग अपनी जमीन देने को तैयार नहीं लेकिन ग्रामीण इसे कोई मुद्दा नहीं मानते। लोगों का कहना है कि अगर विभाग सड़क का प्रस्ताव बनाए तो जमीन का मुद्दा आसानी से सुलझ सकता है।
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एंबुलेंस मार्ग न होने से दम चुकी हैं कई जिंदगियां
स्थानीय निवासी चमन सहित अन्य ने बताया कि उनके गांव के करीब डेढ़ दर्जन लड़के-लड़कियां इसी कारण शिक्षा से वंचित रह गए। इनमें लड़कों की ज्यादा संख्या है। वे अपनी पढ़ाई छोड़ चुके हैं। यहां दुर्गम जंगली रास्ता होने से हमेशा जंगली जानवरों का भय रहता है। क्षेत्र में कई बार जंगली जानवर लोगों पर हमला कर लोगों की जान तक ले चुके हैं। इसी पंचायत की वार्ड सदस्य गीता देवी ने बताया कि एक महिला को प्रसव पीड़ा हो रही थी। उसे पालकी में ले जाया जा रहा था लेकिन रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया लेकिन नवजात बच्चे की जान चली गई।
चुनाव के समय ही नजर आते नेता
क्षेत्र के लोगों के लिए सरकार की 108 तथा 102 योजना का कोई मायने नहीं है।इस क्षेत्र लगभग 40 से ज्यादा परिवार रहते हैं जिसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा दलित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े प्रलोभन दे जाते हैं लेकिन बाद में नजर नहीं आते। उसके बाद वे अगले चुनाव में ही नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि प्राइवेट जमीन का हवाला देकर अधिकारी टाल देते हैं। युवाओं में दिलीप कुमार, नरेंद्र, पवन, चमन लाल, सुमन, सोनू कुमार ने गुहार लगाई है कि सड़क का प्रबंध किया जाए जिससे कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रह सके।
लोगों के जमीन देने पर ही हो सकता है सड़क निर्माण
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एके सोनी ने बताया कि बुई क्षेत्र में सड़क सुविधा नहीं होने का मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग यदि अपनी भूमि सड़क के लिए देने को तैयार रहें, तभी सड़क का निर्माण हो सकता है। स्थानीय लोगों को सड़क के लिए जगह की एनओसी विभाग के नाम करनी होगी।
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अर्की (सोलन)। जिले के अंतिम छोर पर बसे मांगल पंचायत के कुछ ऐसे गांव हैं जो आजादी के 70 साल बाद भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। मांगल पंचायत के ऐसे ही एक गांव बुई में सड़क तो दूर एंबुलेंस मार्ग तक नहीं बन पाया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना या नाबार्ड की अन्य योजनाएं इस गांव को सड़क सुविधा मुहैया करवाने में नाकाम रहीं हैं।
इस कारण स्थानीय लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सड़क सुविधा न मिलने के कारण करीब एक दर्जन से अधिक विद्यार्थी स्कूल छोड़ कर घर पर बैठ गए हैं। वहीं अन्य बच्चों ने भी धीरे-धीरे स्कूल जाना बंद कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण क्षेत्र के लिए सड़क सुविधा न होना बताया जा रहा है।
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जानकारी के अनुसार उक्त क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्कूल जाने के लिए सुबह छह बजे घर से पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद वे सुबह की प्रार्थना सभा के बाद स्कूल पहुंचते हैं। वहीं शाम को घर पहुंचने में काफी समय लग जाता है। घने और सुनसान जंगल में देर शाम घर आने में बच्चे डरते हैं और रोज जान हथेली में रखकर घर पहुंचते हैं। वहीं विभाग का कहना है कि लोग अपनी जमीन देने को तैयार नहीं लेकिन ग्रामीण इसे कोई मुद्दा नहीं मानते। लोगों का कहना है कि अगर विभाग सड़क का प्रस्ताव बनाए तो जमीन का मुद्दा आसानी से सुलझ सकता है।
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एंबुलेंस मार्ग न होने से दम चुकी हैं कई जिंदगियां
स्थानीय निवासी चमन सहित अन्य ने बताया कि उनके गांव के करीब डेढ़ दर्जन लड़के-लड़कियां इसी कारण शिक्षा से वंचित रह गए। इनमें लड़कों की ज्यादा संख्या है। वे अपनी पढ़ाई छोड़ चुके हैं। यहां दुर्गम जंगली रास्ता होने से हमेशा जंगली जानवरों का भय रहता है। क्षेत्र में कई बार जंगली जानवर लोगों पर हमला कर लोगों की जान तक ले चुके हैं। इसी पंचायत की वार्ड सदस्य गीता देवी ने बताया कि एक महिला को प्रसव पीड़ा हो रही थी। उसे पालकी में ले जाया जा रहा था लेकिन रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया लेकिन नवजात बच्चे की जान चली गई।
चुनाव के समय ही नजर आते नेता
क्षेत्र के लोगों के लिए सरकार की 108 तथा 102 योजना का कोई मायने नहीं है।इस क्षेत्र लगभग 40 से ज्यादा परिवार रहते हैं जिसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा दलित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े प्रलोभन दे जाते हैं लेकिन बाद में नजर नहीं आते। उसके बाद वे अगले चुनाव में ही नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि प्राइवेट जमीन का हवाला देकर अधिकारी टाल देते हैं। युवाओं में दिलीप कुमार, नरेंद्र, पवन, चमन लाल, सुमन, सोनू कुमार ने गुहार लगाई है कि सड़क का प्रबंध किया जाए जिससे कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रह सके।
लोगों के जमीन देने पर ही हो सकता है सड़क निर्माण
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एके सोनी ने बताया कि बुई क्षेत्र में सड़क सुविधा नहीं होने का मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग यदि अपनी भूमि सड़क के लिए देने को तैयार रहें, तभी सड़क का निर्माण हो सकता है। स्थानीय लोगों को सड़क के लिए जगह की एनओसी विभाग के नाम करनी होगी।