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खेत की माटी बदल सकती है बेरोजगारों की तकदीर

Mon, 15 Jan 2018 10:45 PM IST
Updated Mon, 15 Jan 2018 10:45 PM IST
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नौणी विवि के वैज्ञानिकों की बेरोजगारों को बागवानी में हाथ आजमाने की सलाह, मदद को हर वक्त वैज्ञानिक तैयार
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किन्नौर में हार्प सोसायटी की जरिये रोशन हो रहे कई घर
अमर उजाला ब्यूरो
नौणी (सोलन)।
किसान खेती के साथ अब उन्नत तकनीकों से बागवानी कर अपनी आर्थिकी दुरुस्त कर सकते हैं। इसमें किसानों की मदद करेगा नौणी विवि। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से सलाह लेकर किसान खेती से लेकर हर तरह के फलदार पौधों की बागवानी कर सकते हैं। विवि सेब, अखरोट, चूली (जंगली खुरमानी) और नाशपाती समेत कई प्रजाति के फलदार पौधे बागवानों को मुहैया करवाते हैं। किसान अपने क्षेत्रों की जलवायु के हिसाब से बागवानी कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि बेरोजगार अगर खेती और बागवानी करें तो उन्हें नौकरी की जरूरत ही महसूस नहीं होगी। नौकरी से कई गुना ज्यादा कमाई खेती और बागवानी से की जा सकती है। नौणी विवि के तहत पांच किसान विकास केंद्र हैं जिनसे संपर्क कर किसान मिट्टी का परीक्षण करवा सकते हैं। इसके अलावा लोग नौणी विवि के किसान हेल्प लाइन नंबर 01792-252426 पर संपर्क कर हर तरह की मदद प्राप्त कर सकते हैं।
नौणी विवि के वैज्ञानिक आपके खेतों की मिट्टी और जलवायु का परीक्षण कर आपको बताएंगे कि आप किस तरह की खेती और बागवानी कर सकते हैं। नौणी स्थित डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी और वानिकी विवि द्वारा तैयार किए फलदार पौधे विशेषकर सेब की किसानों के बीच काफी मांग रहती है। हिल एग्रीकल्चर और रूरल डवेल्पमेंट सोसायटी (हार्प) ने किसानों की आजीविका में सुधार लाने के लिए नाबार्ड के प्रोजेक्ट के माध्यम से सेब के बगीचे लगाने का काम शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत तीन सालों में विश्वविद्यालय ने किन्नौर जिले के आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में हार्प को 39 हजार से अधिक पौधों की आपूर्ति की है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आजीविका में सुधार करना और वर्ष 2022 तक उनकी आय को दोगुना करना है।
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किन्नौर के 643 किसानों की आय होगी दोगुनी
हार्प के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. आरएस रतन ने बताया कि नाबार्ड द्वारा प्रायोजित इस जनजातीय विकास परियोजना को सोसायटी लागू कर रही है। यह परियोजना सात साल तक चलेगी। इसमें लगभग 9.43 करोड़ रुपये खर्च होंगे। किन्नौर के निचार खंड की रुपी, छोटा कंबा और नाथपा पंचायतों के 643 किसानों की आजीविका में वृद्धि करना योजना का मकसद है। शार्बो में स्थित नौणी विवि के केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को पेड़ों की छंटाई के लिए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। इस परियोजना के चयनित क्षेत्र के लगभग 400 एकड़ में सेब, अखरोट, चूली (जंगली खुरमानी) और नाशपाती के बगीचे की स्थापना की जाएगी।
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तीन सालों से उपलब्ध करवा रहे पौधे : कुलपति
नौणी विवि के कुलपति डा. एचसी शर्मा ने कहा कि विवि किसानों की उन्नति के लिए निरंतर प्रयास करता रहा है। तीन सालों से हार्प को इस परियोजना के लिए पौधे उपलब्ध करवा रहे हैं। इस साल विवि ने सेब की स्पर और रॉयल किस्मों के 6158 और 150 अखरोट के पौधों सोसायटी को दिए हैं। हर साल विवि में किसानों को विभिन्न उन्नत किस्मों के सेब, कीवी, अनार, खुरमानी, आड़ू, चेरी, अखरोट, पेकननट, आनर, नाशपती, पलम और बादाम आदि के पौधे विवि परिसर तथा विभिन्न अनुसंधान उपलब्ध करवाए जाते हैं।
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