{"_id":"5b436dad4f1c1b0b278b5663","slug":"31531145645-solan-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंबाघाट से कैंथलीघाट तक पेड़ काटने की नहीं इजाजत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंबाघाट से कैंथलीघाट तक पेड़ काटने की नहीं इजाजत
Updated Mon, 09 Jul 2018 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राकेश शर्मा
विज्ञापन
सोलन। शिमला को सुपरफास्ट चंडीगढ़ से जोड़ने वाले फोरलेन मार्ग के चंबाघाट से कैंथलीघाट तक का पार्ट-2 प्रोजेक्ट वन विभाग कार्यालय में फंस गया है। करीब 25 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण की फाइल वन विभाग की प्रक्रिया से बाहर नहीं निकल पा रही है। 1258 पेड़ों को काटने की प्रक्रिया पूरी होने में देरी का असर निर्माण प्रक्रिया शुरू होने पर पड़ रहा है। वन विभाग की अनापत्ति सहित फाइल निगम कार्यालय को भेजी जानी है। उसके बाद निगम पेड़ों को काटने का काम शुरू करेगा। अभी तक फाइल निगम कार्यालय तक नहीं पहुंची है। अब तक सिर्फ वन विभाग की एनओसी के लिए ही काम रुका हुआ है। फोरलेन के लिए कब्जे हटाने और खाली भूमि को नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के हवाले करने की प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो चुकी है।
अब इस मार्ग में आने वाले वन विभाग और निजी पेड़ों को काटने का काम विभागीय अनुमति न मिलने से अटका हुआ है। एनएचएआई प्रबंधन ने फोरलेन का ठेका हासिल करने वाली कंपनी को 910 दिन में प्रोजेक्ट तैयार करने का टेंडर दिया है। यह अवधि तब शुरू होगी जब सभी चिह्नित पेड़ों को काट कर जमीन बिल्कुल खाली कर दी जाएगी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि परवाणू से शिमला तक प्रस्तावित फोरलेन नेशनल हाईवे को तीन चरणों में पूरा किया जाना है। इसमें परवाणू से चंबाघाट के बीच पहले चरण का काम प्रगति पर है। चंबाघाट से कैंथलीघाट के दूसरे चरण का काम वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र न मिलनक से अटका हुआ है। तीसरा चरण शिमला से कैंथलीघाट के बीच होगा जिसके लिए एनएचएआई प्रबंधन टेंडर जारी कर चुका है।
विज्ञापन
प्रक्रिया पूरी, जल्द निगम को सौंपे देंगे फाइल : डीएफओ
वन मंडल अधिकारी आरएस जसवाल ने बताया कि 1258 पेड़ों को काटने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही फाइल वन निगम के हवाले कर दी जाएगी। इसके बाद निगम पेड़ों को काटने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह सभी पेड़ तय अवधि में काट लिए जाएंगे ताकि फोरलेन निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके।
जब तक जमीन नहीं मिलेगी, काम शुरू नहीं होगा : स्वामी
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एके स्वामी का कहना है कि अभी तक वन विभाग ने पेड़ काटने का काम शुरू नहीं किया है। जब तक जमीन खाली नहीं होगी, काम शुरू नहीं हो पाएगा। वन विभाग के अलावा निजी पेड़ भी नहीं काटे गए हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ काटने की प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू हो जाएगा।
910 दिन में फोरलेन बनेगा 25 किलोमीटर लंबा मार्ग
चंबाघाट से कैंथलीघाट के बीच करीब 25 किलोमीटर लंबे मार्ग को फोरलेन में बदलने का काम 910 दिन में पूरा करना होगा। एनएचएआई ने निजी कंपनी को टेंडर इसी आधार पर जारी किया है। प्रबंधन निर्माण प्रक्रिया को पूरा करने में ढाई साल का लक्ष्य लेकर चल रही है। पेड़ काटने के बाद जमीन खाली होते ही कंपनी को काम शुरू करना होगा और उसी दिन को पहला दिन गिना जाएगा।
आसान नहीं होगा फोरलेन का काम
चंबाघाट से कैंथलीघाट के बीच फोरलेन का निर्माण आसान नहीं होगा। निर्माण की पूरी प्रक्रिया में 25 किलोमीटर का यह हिस्सा सबसे खतरनाक है। इस हिस्से में चंडीगढ़ से शिमला को जोड़ने वाला कोई बाईपास नहीं है। ऐसे में निर्माण और यातायात दोनों एक साथ ही चलेंगे। इससे मार्ग जाम होने या हादसे की संभावना रहेगी। एनएचएआई प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि हादसे की जिम्मेदारी टेंडर लेने वाली कंपनी की होगी। उन्होंने बताया कि यह बात टेंडर में पहले ही साफ कर दी गई है।