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मरीजों के दर्द पर मरहम लगाने में सरकारें नाकाम
Updated Fri, 02 Feb 2018 10:00 PM IST
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जिले के चौदह स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी डॉक्टर नहीं, 101 सृजित चिकित्सकों के पदों में से चालीस पड़े हैं खाली
चौबीस घंटे नहीं चल पा रहे कई अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
सियासी मंचों से स्वास्थ्य सेवाएं चकाचक होने के दावे धरातल पर धराशायी होते नजर आ रहे हैं। दोनों दलों की सरकारें लोगों को घरद्वार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे करती आई हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जिले के 14 स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी डॉक्टर नहीं है। जिले के लिए स्वीकृत 101 चिकित्सकों के पदों में से 40 खाली पड़े हैं।
जिलाभर में डॉक्टरों की जबरदस्त कमी चल रही है और छोटे स्तर के डेढ़ दर्जन अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं है। इनमें चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे पर बना धर्मपुर का अस्पताल भी शामिल है। इन अस्पतालों में डॉक्टरों की व्यवस्था डेपुटेशन के आधार पर हो रही है। लेकिन जिन अस्पतालों से डॉक्टरों को बुलाया जा रहा है वहां हफ्ते में सिर्फ दो ही दिन डॉक्टर सेवाएं दे पा रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में मरीजों का भार बढ़ने के पीछे जिला के छोटे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को मुख्य वजह माना जा रहा है। सोलन जिले में इस समय डॉक्टरों के कुल 101 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से चालीस खाली चल रहे हैं। 61 डॉक्टरों के सहारे स्वास्थ्य विभाग पूरे जिला की व्यवस्था को हांक रहा है। इनमें सिविल अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी शामिल हैं। कई अस्पतालों में चौबीस घंटे उपचार के प्रबंध हैं। लेकिन डॉक्टर न होने की वजह से यह अस्पताल सिर्फ दिन के उजाले में ही सेवाएं दे पा रहे हैं। जिले में डॉक्टर न मिल पाने की वजह से मरीज क्षेत्रीय अस्पताल का रुख कर रहे हैं और यही वजह है जो अस्पताल में रोजाना 1200 से 1500 के बीच मरीज ओपीडी में उपचार करवा रहे हैं।
डेपुटेशन पर चला रहे हैं काम : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरके दरोच ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। इस बारे में सरकार को अवगत करवा दिया है। कहा कि जिन अस्पतालों में चिकित्सक नहीं हैं वहां डेपुटेशन के आधार पर काम चलाया जा रहा है। इस समय करीब 14 अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं जबकि 40 डॉक्टरों की कमी पूरे जिला में खल रही है।
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दो दिन दे पा रहे हैं डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग 14 चिकित्सालयों में उपचार का प्रबंध करने के लिए डॉक्टरों को डेपुटेशन पर भेज रहा है। इस वजह से एक चिकित्सक सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही तयशुदा अस्पताल में ड्यूटी पर मिलता है। इससे लोगों में भारी आक्रोश है। डॉक्टर न मिलने से उन्हें सोलन अस्पताल आना पड़ रहा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास भी शिकायतें पहुंच रही हैं।
डॉक्टरों के पद भरने से सबको होगा लाभ : डॉ. शशिकांत
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में तैनात ऑर्थो विशेषज्ञ डॉ. शशिकांत शर्मा ने कहा कि स्टाफ की कमी का असर डॉक्टरों पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर सोलन अस्पताल में नाइट ड्यूटी करते हैं। अगले दिन उन्हें आराम मिलता है। लेकिन इस आराम की कीमत वे लोग चुकाते हैं जो दूरदराज से उपचार करवाने के लिए अस्पताल आए होते हैं। इसके अलावा वीआईपी ड्यूटी और पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी भी विशेषज्ञ चिकित्सकों को निभानी पड़ रही है। यदि एमबीबीएस के नए डॉक्टरों की तैनाती की जाए तो विशेषज्ञ जरूरतमंद मरीजों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे। इससे डॉक्टरों के साथ मरीजों को भी फायदा मिलेगा। इस बारे में डॉक्टर एसोसिएशन के माध्यम से कई बार आवाज उठाई जा चुकी है।
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चौबीस घंटे नहीं चल पा रहे कई अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
सियासी मंचों से स्वास्थ्य सेवाएं चकाचक होने के दावे धरातल पर धराशायी होते नजर आ रहे हैं। दोनों दलों की सरकारें लोगों को घरद्वार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे करती आई हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जिले के 14 स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी डॉक्टर नहीं है। जिले के लिए स्वीकृत 101 चिकित्सकों के पदों में से 40 खाली पड़े हैं।
जिलाभर में डॉक्टरों की जबरदस्त कमी चल रही है और छोटे स्तर के डेढ़ दर्जन अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं है। इनमें चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे पर बना धर्मपुर का अस्पताल भी शामिल है। इन अस्पतालों में डॉक्टरों की व्यवस्था डेपुटेशन के आधार पर हो रही है। लेकिन जिन अस्पतालों से डॉक्टरों को बुलाया जा रहा है वहां हफ्ते में सिर्फ दो ही दिन डॉक्टर सेवाएं दे पा रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में मरीजों का भार बढ़ने के पीछे जिला के छोटे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को मुख्य वजह माना जा रहा है। सोलन जिले में इस समय डॉक्टरों के कुल 101 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से चालीस खाली चल रहे हैं। 61 डॉक्टरों के सहारे स्वास्थ्य विभाग पूरे जिला की व्यवस्था को हांक रहा है। इनमें सिविल अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी शामिल हैं। कई अस्पतालों में चौबीस घंटे उपचार के प्रबंध हैं। लेकिन डॉक्टर न होने की वजह से यह अस्पताल सिर्फ दिन के उजाले में ही सेवाएं दे पा रहे हैं। जिले में डॉक्टर न मिल पाने की वजह से मरीज क्षेत्रीय अस्पताल का रुख कर रहे हैं और यही वजह है जो अस्पताल में रोजाना 1200 से 1500 के बीच मरीज ओपीडी में उपचार करवा रहे हैं।
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डेपुटेशन पर चला रहे हैं काम : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरके दरोच ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। इस बारे में सरकार को अवगत करवा दिया है। कहा कि जिन अस्पतालों में चिकित्सक नहीं हैं वहां डेपुटेशन के आधार पर काम चलाया जा रहा है। इस समय करीब 14 अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं जबकि 40 डॉक्टरों की कमी पूरे जिला में खल रही है।
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दो दिन दे पा रहे हैं डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग 14 चिकित्सालयों में उपचार का प्रबंध करने के लिए डॉक्टरों को डेपुटेशन पर भेज रहा है। इस वजह से एक चिकित्सक सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही तयशुदा अस्पताल में ड्यूटी पर मिलता है। इससे लोगों में भारी आक्रोश है। डॉक्टर न मिलने से उन्हें सोलन अस्पताल आना पड़ रहा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास भी शिकायतें पहुंच रही हैं।
डॉक्टरों के पद भरने से सबको होगा लाभ : डॉ. शशिकांत
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में तैनात ऑर्थो विशेषज्ञ डॉ. शशिकांत शर्मा ने कहा कि स्टाफ की कमी का असर डॉक्टरों पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर सोलन अस्पताल में नाइट ड्यूटी करते हैं। अगले दिन उन्हें आराम मिलता है। लेकिन इस आराम की कीमत वे लोग चुकाते हैं जो दूरदराज से उपचार करवाने के लिए अस्पताल आए होते हैं। इसके अलावा वीआईपी ड्यूटी और पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी भी विशेषज्ञ चिकित्सकों को निभानी पड़ रही है। यदि एमबीबीएस के नए डॉक्टरों की तैनाती की जाए तो विशेषज्ञ जरूरतमंद मरीजों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे। इससे डॉक्टरों के साथ मरीजों को भी फायदा मिलेगा। इस बारे में डॉक्टर एसोसिएशन के माध्यम से कई बार आवाज उठाई जा चुकी है।