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सोलन अस्पताल में हालात न सुधरने से नाराज युवाओं ने प्रबंधन को सौंपा ताला
Updated Mon, 04 Jun 2018 10:27 PM IST
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चिकित्सकों की कमी के चलते आंदोलन कर रहे युवाओं ने एमएस को सौंपा ताला, आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी
युवाओं के समर्थन में उतरने लगे सामाजिक संगठन
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
क्षेत्रीय अस्पताल में चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अनशन पर बैठे लोगों ने सोमवार को चिकित्सा अधीक्षक को ताला सौंप कर विरोध जताया। उन्होंने एमएस से कहा कि अस्पताल में ताला लगा दिया जाए। अस्पताल में लोगों को बेहतर सुविधाएं न मिलने से कुछ स्थानीय युवा करीब एक सप्ताह से अनशन पर बैठे हैं लेकिन अभी तक सरकार द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। दो दिन से तीन लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं।
अनशन पर बैठे लोगों की आवाज न प्रशासन सुन रहा है और न ही सरकार। जिला के सबसे बड़े अस्पताल में लोगों को कई तरह की दिक्क्तें झेलनी पड़ रही हैं। अस्पताल में डॉक्टर न होने से मरीज परेशान हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों से अनशन पर बैठे लोगों को मिलने के लिए प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी नहीं आया है। आमरण अनशन पर बैठे लोगों ने पानी तक त्याग दिया है। छह दिन से अनशन पर बैठे युवाओं ने सोमवार को चिकित्सा अधीक्षक से मुलाकात कर उन्हें अस्पताल बंद करवाने की नसीहत दे डाली। इस दौरान लोगों ने एमएस को ताला सौंपकर कहा कि इस अस्पताल को अब बंद कर देना चाहिए।
अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं बेहद खराब है। डॉक्टरों की भारी कमी है। इसका खामियाजा आए दिनों आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अनशन पर बैठे राजीव अरोड़ा ने कहा कि सात दिन हो गए हैं लेकिन प्रशासन और सरकार द्वारा अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है यह तक कि कोई अधिकारी उनसे मिलने तक नहीं आया है। दो दिन तीन लोग आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। अस्पताल में सरकार द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजीव चोपड़ा ने कहा कि एमएस को ताला देने के बाद वह ऐसे ताले मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तथा प्रधानमंत्री को भी भेजेंगे ताकि उन्हें अस्पताल की असली स्थिति बारे पता चल सके।
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अस्पताल प्रबंधन नहीं ले सकता फैसले : एमएस
चिकित्सा अधीक्षक महेश गुप्ता ने कहा कि अस्पताल में चल रही समस्याओं को लेकर उच्च अधिकारियों को प्रतिदिन अवगत करवाया जा रहा है। अस्पताल में अनशन पर बैठे लोगों के बारे में बताया है। कहा कि अस्पताल के संबंध में कोई भी निर्णय वह अपने स्तर पर नहीं कर सकते हैं निर्णय सरकार को ही लेना है।
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युवाओं के समर्थन में उतरने लगे सामाजिक संगठन
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
क्षेत्रीय अस्पताल में चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अनशन पर बैठे लोगों ने सोमवार को चिकित्सा अधीक्षक को ताला सौंप कर विरोध जताया। उन्होंने एमएस से कहा कि अस्पताल में ताला लगा दिया जाए। अस्पताल में लोगों को बेहतर सुविधाएं न मिलने से कुछ स्थानीय युवा करीब एक सप्ताह से अनशन पर बैठे हैं लेकिन अभी तक सरकार द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। दो दिन से तीन लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं।
अनशन पर बैठे लोगों की आवाज न प्रशासन सुन रहा है और न ही सरकार। जिला के सबसे बड़े अस्पताल में लोगों को कई तरह की दिक्क्तें झेलनी पड़ रही हैं। अस्पताल में डॉक्टर न होने से मरीज परेशान हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों से अनशन पर बैठे लोगों को मिलने के लिए प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी नहीं आया है। आमरण अनशन पर बैठे लोगों ने पानी तक त्याग दिया है। छह दिन से अनशन पर बैठे युवाओं ने सोमवार को चिकित्सा अधीक्षक से मुलाकात कर उन्हें अस्पताल बंद करवाने की नसीहत दे डाली। इस दौरान लोगों ने एमएस को ताला सौंपकर कहा कि इस अस्पताल को अब बंद कर देना चाहिए।
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अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं बेहद खराब है। डॉक्टरों की भारी कमी है। इसका खामियाजा आए दिनों आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अनशन पर बैठे राजीव अरोड़ा ने कहा कि सात दिन हो गए हैं लेकिन प्रशासन और सरकार द्वारा अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है यह तक कि कोई अधिकारी उनसे मिलने तक नहीं आया है। दो दिन तीन लोग आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। अस्पताल में सरकार द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजीव चोपड़ा ने कहा कि एमएस को ताला देने के बाद वह ऐसे ताले मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तथा प्रधानमंत्री को भी भेजेंगे ताकि उन्हें अस्पताल की असली स्थिति बारे पता चल सके।
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अस्पताल प्रबंधन नहीं ले सकता फैसले : एमएस
चिकित्सा अधीक्षक महेश गुप्ता ने कहा कि अस्पताल में चल रही समस्याओं को लेकर उच्च अधिकारियों को प्रतिदिन अवगत करवाया जा रहा है। अस्पताल में अनशन पर बैठे लोगों के बारे में बताया है। कहा कि अस्पताल के संबंध में कोई भी निर्णय वह अपने स्तर पर नहीं कर सकते हैं निर्णय सरकार को ही लेना है।