फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   मां शूलिनी के दरबार में लगे जयकारे, नववर्ष के पहले दिन कतारों में मंदिर पहुंचे भक्तजन

मां शूलिनी के दरबार में लगे जयकारे, नववर्ष के पहले दिन कतारों में मंदिर पहुंचे भक्तजन

Tue, 01 Jan 2019 10:07 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jan 2019 10:07 PM IST
विज्ञापन
नववर्ष पर जयकारों से गूंजा मां शूलिनी दरबार
विज्ञापन

मां के दर्शन और माथा टेकने के लिए भक्तों ने कतारों में किया इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। मां शूलिनी के दरबार में साल के पहले दिन सैकड़ों भक्त हाजिरी भरने पहुंचे। दरबार में सुबह से देर शाम तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रही। अपनी बारी के इंतजार में घंटों तक कतारबद्ध खड़े भक्त इंतजार करते देखे गए। शूलिनी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। जो बाद में लंबी कतार में बदल गई। नववर्ष को लेकर जिला सोलन का शूलिनी मंदिर दुल्हन की तरह सजाया गया है।
वहीं नए साल के पहले दिन स्थानीय सहित बाहरी राज्यों के सैकड़ों लोगों ने मां के दर्शन किए। पहली जनवरी की सुबह मंदिर कपाट खुलते ही लोगों ने मंदिर की ओर रुख करना शुरू कर दिया था, वहीं दोपहर तक मंदिर में मां शूलिनी के दर्शन को भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गई। लोग मंदिर के समीप लगी प्रसाद की दुकानों में प्रसाद सहित माता के चुनरियां खरीदते दिखाई दिए। इस दौरान लोगों ने नए वर्ष की शुभकामनाओं के लिए मां से आशीर्वाद भी लिया। शूलिनी देवी सोलन सहित आसपास के क्षेत्र की कुलदेवी है। जहां पर स्थानीय लोगों सहित किसानों की ओर से उगाई गई फसल के तैयार होने के बाद यहां पर सबसे पहले फसल को चढ़ाया जाता है, जिसके बाद लोग स्वयं अपनी फसलों का सेवन करते हैं। वहीं इस तरह गाय के दूध, घी को भी पहले मां शूलिनी को चढ़ाया जाता है। जिसके तहत लोगों ने नए वर्ष अपनी फसलों, स्वास्थ्य सहित शांति प्रदान करने लिए पूजा अर्चना भी की।
विज्ञापन


बघाट रियासत की है कुल देवी
माता शूलिनी बघाट रियासत के शासकों की कुल श्रेष्ठा देवी मानी जाती हैै। वर्तमान में माता शूलिनी का मंदिर सोलन शहर के दक्षिण में विद्यमान है। इस मंदिर में माता शूलिनी के अतिरिक्त शिरगुल देवता, माली देवता इत्यादि की प्रतिमाएं मौजूद हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता शूलिनी सात बहनों में से एक हैं। अन्य बहनें हिंगलाज देवी, जेठी ज्वाला जी, लुगासना देवी, नैना देवी और तारा देवी के नाम से विख्यात हैं। माता शूलिनी देवी के नाम से सोलन शहर का नामकरण हुआ था, जो कि मां शूलिनी की अपार कृपा से दिन-प्रतिदिन समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहा है। सोलन नगर बघाट रियासत की राजधानी हुआ करती थी। इस रियासत की नींव राजा बिजली देव ने रखी थी। बारह घाटों से मिलकर बनने वाली बघाट रियासत का क्षेत्रफल 36 वर्ग मील में फैला हुआ था। इस रियासत की प्रारंभ में राजधानी जौणाजी, तदोपरांत कोटी और बाद में सोलन बनी। राजा दुर्गा सिंह इस रियासत के अंतिम शासक थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनसेट
यह है लोगों की मान्यता
मान्यता है कि माता शूलिनी के प्रसन्न होने पर क्षेत्र में किसी प्रकार की प्राकृतिक आपदा या महामारी का प्रकोप नहीं होता है, बल्कि सुख समृद्धि और खुशहाली आती है। इसके तहत काफी समय से मां शूलिनी के नाम पर सोलन में मेला भी आयोजित किया जाता है। यह मेला भी जहां जनमानस की भावनाओं से जुड़ा है, वहीं पर विशेषकर ग्रामीण लोगों को मेले में आपसी मिलने-जुलने का अवसर मिलता है, जिससे लोगों में आपसी भाईचारा, राष्ट्र की एकता और अखंडता की भावना पैदा होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed