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मोदी के दोबारा पीएम बनने और बजट से पैकेज बढ़ने की जगी उम्मीद
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अमर उजाला ब्यूरो
नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक पैकेज बढ़ने की एक बार फिर से हिमाचल को आस जग गई है। देश में दूसरी बार प्रधानमंत्री की जिम्मेवारी संभालने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद प्रदेश को औद्योगिक पैकेज बढ़ने की उम्मीद जागी है। वर्ष 2003 में जब प्रदेश को पैकेज मिला था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिमाचल को विशेष औद्योगिक पैकेज 2017 तक दिया था।
हालांकि इसकी समयावधि को कम कर 2010 में समाप्त हो गया था। जनवरी 2014 में उद्योग जगत को राहत देते हुए 2017 तक कैपिटल सब्सिडी दी गई है। 2003 में मिले औद्योगिक पैकेज को 2010 में वापिस ले लिया था और प्रदेश में 58 हजार करोड़ का निवेश होना था जबकि सिर्फ 13 हजार करोड़ का ही निवेश हो सका था। इससे 35 हजार करोड़ के निवेश को करारा झटका लगा था।
पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल को विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद है और उद्योग जगत इसकी आस लगाए बैठा है। इसके लिए कई बार मांग उठाई और पत्राचार किए गए हैं। प्रदेश में करीब 4500 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं जिसमें से अधिकांश बीबीएन में हैं। प्रदेश सरकार को सबसे अधिक 63 फीसदी राजस्व यहीं से जाता है। ट्राई सिटी से लगते औद्योगिक हब बीबीएन उद्योगपतियों का निवेश के लिए पहली पसंद है। प्रदेश में सर्वाधिक औद्योगिक इकाइयां भी बीबीएन में ही स्थापित हैं।
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बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि पहाड़ी प्रदेश होने के कारण इसे विशेष लाभ मिलने चाहिए और प्रदेश से सौतेला व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। अगर पैकेज मिलता है तो नए औद्योगिक घराने यहां निवेश करेंगे। इसका लाभ प्रदेश और हिमाचली युवाओं को रोजगार के रूप में मिलेगा।
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नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक पैकेज बढ़ने की एक बार फिर से हिमाचल को आस जग गई है। देश में दूसरी बार प्रधानमंत्री की जिम्मेवारी संभालने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद प्रदेश को औद्योगिक पैकेज बढ़ने की उम्मीद जागी है। वर्ष 2003 में जब प्रदेश को पैकेज मिला था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिमाचल को विशेष औद्योगिक पैकेज 2017 तक दिया था।
हालांकि इसकी समयावधि को कम कर 2010 में समाप्त हो गया था। जनवरी 2014 में उद्योग जगत को राहत देते हुए 2017 तक कैपिटल सब्सिडी दी गई है। 2003 में मिले औद्योगिक पैकेज को 2010 में वापिस ले लिया था और प्रदेश में 58 हजार करोड़ का निवेश होना था जबकि सिर्फ 13 हजार करोड़ का ही निवेश हो सका था। इससे 35 हजार करोड़ के निवेश को करारा झटका लगा था।
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पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल को विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद है और उद्योग जगत इसकी आस लगाए बैठा है। इसके लिए कई बार मांग उठाई और पत्राचार किए गए हैं। प्रदेश में करीब 4500 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं जिसमें से अधिकांश बीबीएन में हैं। प्रदेश सरकार को सबसे अधिक 63 फीसदी राजस्व यहीं से जाता है। ट्राई सिटी से लगते औद्योगिक हब बीबीएन उद्योगपतियों का निवेश के लिए पहली पसंद है। प्रदेश में सर्वाधिक औद्योगिक इकाइयां भी बीबीएन में ही स्थापित हैं।
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बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि पहाड़ी प्रदेश होने के कारण इसे विशेष लाभ मिलने चाहिए और प्रदेश से सौतेला व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। अगर पैकेज मिलता है तो नए औद्योगिक घराने यहां निवेश करेंगे। इसका लाभ प्रदेश और हिमाचली युवाओं को रोजगार के रूप में मिलेगा।