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मशरूम वैज्ञानिकों के समक्ष रखी मार्केटिंग की समस्या
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अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट में आयोजित 21वीं अखिल भारतीय खुंब परियोजना कार्यशाला मेें किसानों ने अपनी समस्याओं को बताया। किसानों ने मशरूम समबंधित बीमारियों एवं मार्केटिंग को मुख्य समस्या बताया। मशरूम उत्पादों के बारे में पूछा गया।
अनुसंधान के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा और अन्य मशरूम वैज्ञानिकों ने बताया कि वैल्यू-एडिशन मशरूम उत्पादों का जैसे कि मशरूम का अचार, पास्ता, कैंडी, बिस्कुट बनाने का प्रशिक्षण किसानों को दिया जाए। इसके साथ मशरूम के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इससे मशरूम मार्केटिंग, खपत एवं कुपोषण जैसी समस्याओं का निदान किया जा सके।
ऑर्गेनिक मशरूम उत्पादन और गैर पारंपरिक (वानस्पतिक) पद्धति का उपयोग मशरूम की बीमारियों से बचने के लिए किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि मशरूम हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर किसानों की समस्याओं के निदान के लिए बनाया जा सकता है। इसके अलावा मशरूम स्पेंट कंपोस्ट का उपयोग ऊर्जा उत्पादन मे किया जा सकता है। इस दौरान खुंब उत्पादन और अनुसंधान के कई पहलुओं और किसानों की समस्याओं के निदान पर चर्चा की गई।
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सोलन। खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट में आयोजित 21वीं अखिल भारतीय खुंब परियोजना कार्यशाला मेें किसानों ने अपनी समस्याओं को बताया। किसानों ने मशरूम समबंधित बीमारियों एवं मार्केटिंग को मुख्य समस्या बताया। मशरूम उत्पादों के बारे में पूछा गया।
अनुसंधान के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा और अन्य मशरूम वैज्ञानिकों ने बताया कि वैल्यू-एडिशन मशरूम उत्पादों का जैसे कि मशरूम का अचार, पास्ता, कैंडी, बिस्कुट बनाने का प्रशिक्षण किसानों को दिया जाए। इसके साथ मशरूम के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इससे मशरूम मार्केटिंग, खपत एवं कुपोषण जैसी समस्याओं का निदान किया जा सके।
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ऑर्गेनिक मशरूम उत्पादन और गैर पारंपरिक (वानस्पतिक) पद्धति का उपयोग मशरूम की बीमारियों से बचने के लिए किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि मशरूम हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर किसानों की समस्याओं के निदान के लिए बनाया जा सकता है। इसके अलावा मशरूम स्पेंट कंपोस्ट का उपयोग ऊर्जा उत्पादन मे किया जा सकता है। इस दौरान खुंब उत्पादन और अनुसंधान के कई पहलुओं और किसानों की समस्याओं के निदान पर चर्चा की गई।
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