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Solan News: जिले में 144 कांप्लेक्स स्कूल बनाए, पीरियड नहीं रहेगा खाली, सुविधाएं होंगी साझा
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प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूलों को वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के साथ जोड़ा
प्रधानाचार्य के नियंत्रण में होंगे सीएचटी, समस्याओं का भी होगा समाधान
आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को पढ़ाने के लिए दूसरे स्कूलों भेज सकेंगे अध्यापक
आदित्य सोफत
सोलन। शिक्षा विभाग ने जिले के 144 स्कूलों को कांप्लेक्स विद्यालयों में बदल दिया है। इससे प्रधानाचार्य की भी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। कांप्लेक्स स्कूल बनने के बाद शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। वहीं, प्रधानाचार्य को अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं। नई शिक्षा नीति के अनुसार कांप्लेक्स स्कूल का सिस्टम लागू किया गया है। इसमें प्राथमिक, मिडल, हाई स्कूलों को अब वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के साथ जोड़ दिया है। इससे सीएचटी भी प्रधानाचार्य के नियंत्रण में होंगे। जिले में 59 हाई, 136 मिडिल और 737 प्राथमिक स्कूलों को 144 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के साथ जोड़ा गया है।
इससे स्कूलों की समस्याओं का समाधान निकल सकेगा। स्कूलों में कोई भी पीरियड खाली नहीं जाएगा। अध्यापक के न होने पर बच्चों को छुट्टी भी नहीं करनी पड़ेगी। आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूलों में भी अध्यापकों को प्रधानाचार्य भेज सकेंगे। कांप्लेक्स सिस्टम लागू होने से सबसे अधिक फायदा उन स्कूलों को होगा जहां केवल एक शिक्षक के सहारे पाठशालाएं चल रही हैं। कांप्लेक्स सिस्टम से स्कूलों में संसाधनों का बेहतर प्रयोग होगा।
सभी स्कूल उपलब्ध सुविधाओं को भी आपस में साझा करेंगे। प्रयोगशालाएं, खेल सामग्री, पुस्तकालय और सांस्कृतिक गतिविधियां स्कूल स्तर पर साझा की जाएंगी। अभिभावकों शिक्षकों की संयुक्त बैठकें होंगी। प्रधानाचार्य स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे। सभी शिक्षकों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट का निर्माण एवं अवकाश स्वीकृति की जिम्मेदारी भी प्रधानाचार्य निभाएंगे। वर्ष में कांप्लेक्स स्कूलों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। मूल्यांकन के बाद स्कूलों को ए (एक्सीलेंट), बी (गुड), सी (आकांक्षी) श्रेणियों में बांटा जाएगा।
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गौरतलब है कि जिले में 1079 स्कूल हैं। यहां हजारों विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से लगातार स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। अब स्कूलों को कांप्लेक्स में तबदील किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दिक्कत विद्यार्थियों को न आए। प्रधानाचार्य को मुखिया बना दिया गया है। उन्हें सभी प्रकार की व्यवस्थाएं बनाने के निर्देश दिए हैं। उप जिला शिक्षा अधिकारी राज कुमार पराशर ने बताया कि 144 स्कूलों के प्रधानाचार्य को प्रशासनिक शक्तियां दी गई हैं।
ऐसे जुड़े हैं स्कूल
अर्की के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मांझू में मिडल स्कूल जलाना, पलौग, हटनली, धारड़ूधार और प्राथमिक स्कूल मांझू, ब्यूली, मान, पलौग, धारड़ूधार और हटनली को जोड़ा गया है। इसी तरह कुनिहार के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के साथ प्राथमिक स्कूल रामपुर और टीमली का कांप्लेक्स बनाया गया है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय धर्मपुर में मिडिल स्कूल धारआंजी, प्राथमिक स्कूल धर्मपुर, रडोपैंद, कादों, धारआंजी और भेड़े का खेच को जोड़ा गया है। छात्र वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सोलन में हाई स्कूल गलानग, मिडिल स्कूल कनोग, शिल्ली और प्राथमिक स्कूल नडोह, शिल्ली और सेरी को जोड़ा गया है। इसी तरह अन्य स्कूलों को भी कांप्लेक्स में बदला गया है।
जिले के स्कूलों को कांप्लेक्स में तबदील किया गया है। 144 कांप्लेक्स स्कूल बनाए गए हैं। प्रधानाचार्य को कई शक्तियां दी गई हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार किया जा रहा है।
-मोहिंदर चंद पिरटा, प्राथमिक शिक्षा उपनिदेशक, सोलन
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प्रधानाचार्य के नियंत्रण में होंगे सीएचटी, समस्याओं का भी होगा समाधान
आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को पढ़ाने के लिए दूसरे स्कूलों भेज सकेंगे अध्यापक
आदित्य सोफत
सोलन। शिक्षा विभाग ने जिले के 144 स्कूलों को कांप्लेक्स विद्यालयों में बदल दिया है। इससे प्रधानाचार्य की भी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। कांप्लेक्स स्कूल बनने के बाद शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। वहीं, प्रधानाचार्य को अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं। नई शिक्षा नीति के अनुसार कांप्लेक्स स्कूल का सिस्टम लागू किया गया है। इसमें प्राथमिक, मिडल, हाई स्कूलों को अब वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के साथ जोड़ दिया है। इससे सीएचटी भी प्रधानाचार्य के नियंत्रण में होंगे। जिले में 59 हाई, 136 मिडिल और 737 प्राथमिक स्कूलों को 144 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के साथ जोड़ा गया है।
इससे स्कूलों की समस्याओं का समाधान निकल सकेगा। स्कूलों में कोई भी पीरियड खाली नहीं जाएगा। अध्यापक के न होने पर बच्चों को छुट्टी भी नहीं करनी पड़ेगी। आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूलों में भी अध्यापकों को प्रधानाचार्य भेज सकेंगे। कांप्लेक्स सिस्टम लागू होने से सबसे अधिक फायदा उन स्कूलों को होगा जहां केवल एक शिक्षक के सहारे पाठशालाएं चल रही हैं। कांप्लेक्स सिस्टम से स्कूलों में संसाधनों का बेहतर प्रयोग होगा।
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सभी स्कूल उपलब्ध सुविधाओं को भी आपस में साझा करेंगे। प्रयोगशालाएं, खेल सामग्री, पुस्तकालय और सांस्कृतिक गतिविधियां स्कूल स्तर पर साझा की जाएंगी। अभिभावकों शिक्षकों की संयुक्त बैठकें होंगी। प्रधानाचार्य स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे। सभी शिक्षकों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट का निर्माण एवं अवकाश स्वीकृति की जिम्मेदारी भी प्रधानाचार्य निभाएंगे। वर्ष में कांप्लेक्स स्कूलों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। मूल्यांकन के बाद स्कूलों को ए (एक्सीलेंट), बी (गुड), सी (आकांक्षी) श्रेणियों में बांटा जाएगा।
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गौरतलब है कि जिले में 1079 स्कूल हैं। यहां हजारों विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से लगातार स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। अब स्कूलों को कांप्लेक्स में तबदील किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दिक्कत विद्यार्थियों को न आए। प्रधानाचार्य को मुखिया बना दिया गया है। उन्हें सभी प्रकार की व्यवस्थाएं बनाने के निर्देश दिए हैं। उप जिला शिक्षा अधिकारी राज कुमार पराशर ने बताया कि 144 स्कूलों के प्रधानाचार्य को प्रशासनिक शक्तियां दी गई हैं।
ऐसे जुड़े हैं स्कूल
अर्की के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मांझू में मिडल स्कूल जलाना, पलौग, हटनली, धारड़ूधार और प्राथमिक स्कूल मांझू, ब्यूली, मान, पलौग, धारड़ूधार और हटनली को जोड़ा गया है। इसी तरह कुनिहार के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के साथ प्राथमिक स्कूल रामपुर और टीमली का कांप्लेक्स बनाया गया है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय धर्मपुर में मिडिल स्कूल धारआंजी, प्राथमिक स्कूल धर्मपुर, रडोपैंद, कादों, धारआंजी और भेड़े का खेच को जोड़ा गया है। छात्र वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सोलन में हाई स्कूल गलानग, मिडिल स्कूल कनोग, शिल्ली और प्राथमिक स्कूल नडोह, शिल्ली और सेरी को जोड़ा गया है। इसी तरह अन्य स्कूलों को भी कांप्लेक्स में बदला गया है।
जिले के स्कूलों को कांप्लेक्स में तबदील किया गया है। 144 कांप्लेक्स स्कूल बनाए गए हैं। प्रधानाचार्य को कई शक्तियां दी गई हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार किया जा रहा है।
-मोहिंदर चंद पिरटा, प्राथमिक शिक्षा उपनिदेशक, सोलन