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नौणी के वैज्ञानिक को मिला भारत शिक्षा रत्न पुरस्कार
Updated Wed, 11 Apr 2018 10:08 PM IST
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कीट संबंधित समस्याओं के समाधान पर किया उत्कृष्ट कार्य
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
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सोलन। डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कीट वैज्ञानिक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता को भारत शिक्षा रतन पुरस्कार से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उन्हें कृषि, शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार क्षेत्र में सेवाओं के लिए दिया गया है। ग्लोबल सोसाइटी फोर हेल्थ एंड एजुकेशनल ग्रोथ ने दिल्ली में आयोजित समारोह में डॉ. गुप्ता को पुरस्कार दिया।
इस समय डॉ. गुप्ता नौणी के कीट विज्ञान विभाग में प्रमुख वैज्ञानिक हैं। अखिल भारतीय कृषि सेवा में कुछ समय लगाने के बाद डॉ. गुप्ता ने 1990 में विश्वविद्यालय से जुड़े। उन्होंने जाछ में क्षेत्रीय स्टेशन में कार्य किया। विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में स्थानांतरण पर डॉ. गुप्ता ने अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के अलावा शैक्षणिक कार्यों में भी भाग लिया। डॉ. गुप्ता का मुख्य अनुसंधान कार्य फल मक्खियों पर हैं जो कृषि-बागवानी फसलों का एक महत्वपूर्ण कीट है।
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उन्होंने फल और वनस्पति में कीट संबंधित समस्याओं के समाधान सुझाए हैं।
उन्होंने फल मक्खियों के प्रबंधन विधियों को भी तैयार किया है। इनमें से एक है विधि में मिथाइल इयूजेनॉल के इस्तेमाल से और लकड़ी के ब्लॉक वाले जाल के उपयोग से नर मक्खी को आकर्षित कर खेतों में पकड़ा जाता है। इस तकनीक को विश्वविद्यालय के पैकेज ऑफ प्रैक्टिस और हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग की स्प्रे सारणी में भी शामिल किया गया है।
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डॉ. गुप्ता ने रसायन का भी मूल्यांकन किया है जो फल मक्खी के शरीर के अंदर अंडे को खत्म करने में मदद करता है ताकि इनकी जनसंख्या पर नियंत्रण किया जा सके। वह इस पद्धति पर और अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने 2016 में मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध पत्र पढ़ा था। कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में शोध पत्रों के अलावा डाॎ गुप्ता के पांच अध्याय, मैनुअल और कई बुलेटिन भी प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने सफलता का श्रेय कठिन परिश्रम, शिक्षकों से प्रेरणा, कृषक समुदाय के सुझाव और परिवार के सदस्यों, मित्रों और छात्रों को दिया है।