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वायु प्रदूषण रोकने को प्रशासन लगाएगा एक लाख पौधे
Updated Wed, 25 Apr 2018 10:34 PM IST
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नालागढ़ (सोलन)। जिला प्रशासन बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए खुले और बंद स्थानों पर एक लाख पौधे लगाएगा। इसके लिए 43 प्रजातियों का चयन कर लिया है। इनमें से 27 प्रजातियों के पौधे खुले आसमान तले और अन्य अंदरूनी या छायादार जगहों पर लगाए जाएंगे।
यह जानकारी डीसी विनोद कुमार ने दी। वह बुधवार को सोलन जिले के नालागढ़ में वायु प्रदूषण रोकथाम पौधारोपण अभियान (पाल्यूशन अबेटिंग प्लांटस अभियान-पापा) के तहत आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदूषण को न्यूनतम स्तर तक लाने और हिमाचल के पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए सभी को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। विनोद कुमार ने कहा कि हिमाचल का शुद्ध पर्यावरण उत्तरी भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पौधारोपण के माध्यम से हरित हिमालय के सपने को साकार करने के मकसद से सीएम जयराम ठाकुर ने 28 मार्च को वायु प्रदूषण रोकथाम पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया है।
अभियान के लिए मुख्य रूप से जिले के बद्दी, नालागढ़, परवाणू, कांगड़ा जिले के डमटाल, सिरमौर जिले के कालाअंब और पावंटा साहिब, मंडी जिले के सुंदरनगर तथा ऊना जिले के औद्योगिक क्षेत्रों को चिन्हित किया है। डीसी ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश के इन शहरों तथा कस्बों में विभिन्न कारणों से वायु प्रदूषण अधिक है। वायु प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए ऐसे वृक्षों का रोपा जाना आवश्यक है जो वायु प्रदूषण के लिए उत्तरदायी विभिन्न अवयवों को सोखने की क्षमता रखते हों। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए 27 ऐसे पेड़ और पौधे चिन्हित किए हैं जिन्हें लगाकर वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। 16 ऐसे पौधे भी चिन्हित किए गए हैं जो इंडोर लगाकर वायु प्रदूषण को सोख सकते हैं।
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इन पौधों से नियंत्रित होगा वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण रोकने के लिए पीपल, बरगद, अर्जुन, बहेड़ा, जामुन, सिरिस, नीम, मुस्की कपूर, महानीम, करंज, बेल, कचनार, अमलतास, आंवला, सुहानजन, हारसिंगार, चाईना रोज, जटरोपा, पीत कनेर, सफेद चमेली, रात की रानी, कपूर तुलसी, घृतकुमारी, स्पाईडर प्लांट, रोजमेरी, कड़ी पत्ता और बसूटी के पौधे लगाए जाएंगे। इंडोर लगाए जाने वाले पौधों में स्पाईडर प्लांट, गोल्डन पोथोस, पीस लिल्ली, चाईनीज सदाबहार, घृतकुमारी, गेरबेरा डेजी, गुलदाउदी, इंगलिश आइवी, स्नेक प्लांट, रेफिस पाम, ऐरेका पाम, रेड एज्ड ड्रेसेना, बांस पाम, वीपिंग फिग, डेरेमेन्सिस वार्नकी और चांदनी शामिल है।
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यह जानकारी डीसी विनोद कुमार ने दी। वह बुधवार को सोलन जिले के नालागढ़ में वायु प्रदूषण रोकथाम पौधारोपण अभियान (पाल्यूशन अबेटिंग प्लांटस अभियान-पापा) के तहत आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदूषण को न्यूनतम स्तर तक लाने और हिमाचल के पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए सभी को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। विनोद कुमार ने कहा कि हिमाचल का शुद्ध पर्यावरण उत्तरी भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पौधारोपण के माध्यम से हरित हिमालय के सपने को साकार करने के मकसद से सीएम जयराम ठाकुर ने 28 मार्च को वायु प्रदूषण रोकथाम पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया है।
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अभियान के लिए मुख्य रूप से जिले के बद्दी, नालागढ़, परवाणू, कांगड़ा जिले के डमटाल, सिरमौर जिले के कालाअंब और पावंटा साहिब, मंडी जिले के सुंदरनगर तथा ऊना जिले के औद्योगिक क्षेत्रों को चिन्हित किया है। डीसी ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश के इन शहरों तथा कस्बों में विभिन्न कारणों से वायु प्रदूषण अधिक है। वायु प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए ऐसे वृक्षों का रोपा जाना आवश्यक है जो वायु प्रदूषण के लिए उत्तरदायी विभिन्न अवयवों को सोखने की क्षमता रखते हों। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए 27 ऐसे पेड़ और पौधे चिन्हित किए हैं जिन्हें लगाकर वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। 16 ऐसे पौधे भी चिन्हित किए गए हैं जो इंडोर लगाकर वायु प्रदूषण को सोख सकते हैं।
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इन पौधों से नियंत्रित होगा वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण रोकने के लिए पीपल, बरगद, अर्जुन, बहेड़ा, जामुन, सिरिस, नीम, मुस्की कपूर, महानीम, करंज, बेल, कचनार, अमलतास, आंवला, सुहानजन, हारसिंगार, चाईना रोज, जटरोपा, पीत कनेर, सफेद चमेली, रात की रानी, कपूर तुलसी, घृतकुमारी, स्पाईडर प्लांट, रोजमेरी, कड़ी पत्ता और बसूटी के पौधे लगाए जाएंगे। इंडोर लगाए जाने वाले पौधों में स्पाईडर प्लांट, गोल्डन पोथोस, पीस लिल्ली, चाईनीज सदाबहार, घृतकुमारी, गेरबेरा डेजी, गुलदाउदी, इंगलिश आइवी, स्नेक प्लांट, रेफिस पाम, ऐरेका पाम, रेड एज्ड ड्रेसेना, बांस पाम, वीपिंग फिग, डेरेमेन्सिस वार्नकी और चांदनी शामिल है।