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चूड़धार यात्रा पर रवाना हो रहे सैकड़ों श्रद्धालु
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नौहराधार (सिरमौर)। जनपद सिरमौर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चूड़धार में इन दिनों श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है। रोजाना सैकड़ों लोग इस धार्मिक यात्रा पर निकल रहे हैं। वीकेंड में शनिवार को श्रद्धालुओं की संख्या अधिक देखी गई। चूड़धार में रात्रि ठहराव, भंडारा के आयोजन और भजन-कीर्तन में अभी तक प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है। इससे नौहराधार बाजार में भी रौनक लौट आई है।
कोरोना कर्फ्यू से राहत मिलते ही चूूड़धार यात्रा भी शुरू हो गई है। रोजाना भारी संख्या में श्रद्धालु चोटी पर पहुंच रहे हैं। साढ़े 12 हजार फीट ऊंची चोटी पर पहुंचने के लिए दुर्गम जंगल के साथ साथ कठिन चढ़ाई पार कर रहे हैं। भारी भीड़ जुटने के कारण नौहराधार में कई होटल, विश्रामगृह, चूड़ेश्वर समिति की सरायं भी कम पड़ गई है। कोरोना काल के चलते चूड़धार में न ठहरने की व्यवस्था है न ही खाने पीने की। मंदिर के कपाट भी सुबह छह से शाम पांच बजे तक ही खोले जा रहे हैं। श्रद्धालु नौहराधार और चूड़धार के बीच टैंट लगाकर रात्रि ठहराव कर रहे हैं। शुक्रवार को भी नौहराधार से दस बजे से तीन बजे तक करीब 400 श्रद्धालु रवाना हुए। शनिवार को यह आंकड़ा दोगुना रहा।
उधर, स्वामी कमला नंद महाराज, चुड़ेश्वर, सेवा समिति के प्रभारी बाबूराम ने बताया कि मंदिर में प्रोटोकॉल के तहत दर्शन की समय सारिणी बनाई गई है। उसी के मुताबिक दर्शन करवाए जा रहे हैं। अभी यहां पर ठहरने, खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने अपील की है कि श्रद्धालु आएं और दर्शन कर वापस लौट जाएं।
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कोरोना कर्फ्यू से राहत मिलते ही चूूड़धार यात्रा भी शुरू हो गई है। रोजाना भारी संख्या में श्रद्धालु चोटी पर पहुंच रहे हैं। साढ़े 12 हजार फीट ऊंची चोटी पर पहुंचने के लिए दुर्गम जंगल के साथ साथ कठिन चढ़ाई पार कर रहे हैं। भारी भीड़ जुटने के कारण नौहराधार में कई होटल, विश्रामगृह, चूड़ेश्वर समिति की सरायं भी कम पड़ गई है। कोरोना काल के चलते चूड़धार में न ठहरने की व्यवस्था है न ही खाने पीने की। मंदिर के कपाट भी सुबह छह से शाम पांच बजे तक ही खोले जा रहे हैं। श्रद्धालु नौहराधार और चूड़धार के बीच टैंट लगाकर रात्रि ठहराव कर रहे हैं। शुक्रवार को भी नौहराधार से दस बजे से तीन बजे तक करीब 400 श्रद्धालु रवाना हुए। शनिवार को यह आंकड़ा दोगुना रहा।
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उधर, स्वामी कमला नंद महाराज, चुड़ेश्वर, सेवा समिति के प्रभारी बाबूराम ने बताया कि मंदिर में प्रोटोकॉल के तहत दर्शन की समय सारिणी बनाई गई है। उसी के मुताबिक दर्शन करवाए जा रहे हैं। अभी यहां पर ठहरने, खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने अपील की है कि श्रद्धालु आएं और दर्शन कर वापस लौट जाएं।
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