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तिब्बती समुदाय की महिलाओं ने पांवटा में चीन के खिलाफ निकाली रैली
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पांवटा साहिब में चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते तिब्बती समुदाय की महिला विंग के क
- फोटो : NAHAN
पांवटा साहिब (सिरमौर)। तिब्बत राष्ट्र विद्रोह दिवस की 63वीं वर्षगांठ पर तिब्बतियन सेटलमेंट की महिलाओं ने चीन के खिलाफ पांवटा साहिब में रैली निकाली। इस दौरान महिलाओं ने तिब्बतियों पर अत्याचार बंद हो के जमकर नारे लगाए।
चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ महिलाओं ने संयुक्त राष्ट्र संघ से पंचेम लामा समेत अन्य राजनीतिक बंदियों को रिहा करवाने के लिए दबाव बनाने और चीन की दमनकारी नीतियों पर अंकुश लगाने की भी अपील की है।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय तिब्बती सेटलमेंट के महिला संगठन की भूपपुर इकाई अध्यक्ष पेमा व पुरुवाला की अध्यक्षा यंगला ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को तिब्बत मामले में आवाज उठा कर न्याय करना ही होगा। 14वें दलाई लामा के प्रतिनिधियों से वार्ता की जाए। जबरन बंदी बनाए गए पंचेम लामा को बिना शर्त रिहा करें। तिब्बत में मानवाधिकार स्थिति को चीन बेहतर बनाए।
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शनिवार को तिब्बती महिला संगठनों ने भूपपुर से मुख्य बाजार होकर पांवटा लघु सचिवालय तक रैली निकाली। इस दौरान चीन के खिलाफ रैली में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मार्च 1959 को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में चीन की नीतियों के खिलाफ विद्रोह को याद रखा जाएगा।
12 मार्च को तिब्बती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण दिन है। जब हजारों महिलाओं ने चीन के तिब्बत पर कब्जे का विरोध किया था। विद्रोह में सैकड़ों महिलाओं ने क्रू चीनी सैनिकों की कार्रवाई में जान गंवाई थी। आज तक तिब्बत के लोग विभिन्न राष्ट्रों में रहकर भी तिब्बत की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
चीन की दमनकारी नीतियों को रोकने के लिए भारत समेत विश्व समुदाय से सहायता मांग रहे हैं। आज तक भी तिब्बत में मानवाधिकारों की रक्षा, शांति व स्वतंत्रता को संघर्ष जारी है। इस दौरान तिब्बतियन सेटलमेंट पांवटा भूपपुर और पुरुवाला तिब्बतन सेटलमेंट इकाई की महिला पदाधिकारी और सदस्यों ने रैली में भाग लिया।
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चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ महिलाओं ने संयुक्त राष्ट्र संघ से पंचेम लामा समेत अन्य राजनीतिक बंदियों को रिहा करवाने के लिए दबाव बनाने और चीन की दमनकारी नीतियों पर अंकुश लगाने की भी अपील की है।
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प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय तिब्बती सेटलमेंट के महिला संगठन की भूपपुर इकाई अध्यक्ष पेमा व पुरुवाला की अध्यक्षा यंगला ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को तिब्बत मामले में आवाज उठा कर न्याय करना ही होगा। 14वें दलाई लामा के प्रतिनिधियों से वार्ता की जाए। जबरन बंदी बनाए गए पंचेम लामा को बिना शर्त रिहा करें। तिब्बत में मानवाधिकार स्थिति को चीन बेहतर बनाए।
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शनिवार को तिब्बती महिला संगठनों ने भूपपुर से मुख्य बाजार होकर पांवटा लघु सचिवालय तक रैली निकाली। इस दौरान चीन के खिलाफ रैली में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मार्च 1959 को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में चीन की नीतियों के खिलाफ विद्रोह को याद रखा जाएगा।
12 मार्च को तिब्बती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण दिन है। जब हजारों महिलाओं ने चीन के तिब्बत पर कब्जे का विरोध किया था। विद्रोह में सैकड़ों महिलाओं ने क्रू चीनी सैनिकों की कार्रवाई में जान गंवाई थी। आज तक तिब्बत के लोग विभिन्न राष्ट्रों में रहकर भी तिब्बत की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
चीन की दमनकारी नीतियों को रोकने के लिए भारत समेत विश्व समुदाय से सहायता मांग रहे हैं। आज तक भी तिब्बत में मानवाधिकारों की रक्षा, शांति व स्वतंत्रता को संघर्ष जारी है। इस दौरान तिब्बतियन सेटलमेंट पांवटा भूपपुर और पुरुवाला तिब्बतन सेटलमेंट इकाई की महिला पदाधिकारी और सदस्यों ने रैली में भाग लिया।