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Sirmour News: छह दशकों से रेलवे लाइन का मुद्दा सर्वेक्षण से आगे नहीं बढ़ा

Fri, 12 Sep 2025 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Sep 2025 11:58 PM IST
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railway line to ponta sahib issue
रेलवे सुविधा न होने से औद्योगिकीकरण और पर्यटन विकास की रफ्तार मंद
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वर्ष 1962 से केवल रेलवे लाइन का सर्वेक्षण : मदन लाल खुराना

सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पिछले छह दशकों से जिला सिरमौर को रेलवे लाइन का इंतजार है। वर्ष 1962 में प्रथम बार जगाधरी पांवटा राजबन रेल लाइन सर्वेक्षण किया गया। तब से अब तक बात सर्व से आगे नहीं बढ़ सकी है। इस बार सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र पांवटा साहिब और कालाअंब को रेलवे लाइन सुविधा मिलने की उम्मीद है। रेलवे सुविधा से ही औद्योगिकीकरण और क्षेत्र में पर्यटन विकास के नए पंख लग सकेंगे।
हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा इकाई के प्रधान सतीश गोयल और महासचिव नवीन अग्रवाल ने बताया कि पांवटा साहिब तथा कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में हजारों छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। रेलवे सुविधा से कच्चा व तैयार माल देश के कोने-कोने में आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।
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जनपद में प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान आईआईएम सिरमौर का भवन धौलाकुआं में संचालित हो रहा है। इस संस्थान में देश विदेश से छात्र विभिन्न कोर्स करते हैं। जिला मुख्यालय नाहन में मेडिकल कॉलेज भी निर्माणाधीन है। राजगढ़ में इटरनल विश्वविद्यालय बडू साहिब, इंजीनियरिंग काॅलेज, पांवटा में डेंटल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज आदि भी खुल चुके हैं।
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हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मदन लाल खुराना, कुलवंत सिंह चौधरी, कबीरूदीन फरान, अरविंद गोयल ने बताया कि सबसे पहले 1962 में प्रथम बार जगाधरी से पांवटा साहिब-राजबन रेल लाइन सर्वेक्षण हुआ। फिर, 1973-74 में राजबन सीसीआई इकाई तक फाइनल सर्वेक्षण तक किया गया।
इसके बाद 1990 के दशक में पंजाब के घनोली-बद्दी-नालागढ़-कालाअंब-पांवटा साहिब से देहरादून रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण करवाने के निर्देश तत्कालीन रेल मंत्रालय से दिए गए, लेकिन बजट के अभाव में आधे अधूरे ही रहे। इसके बाद 2014 में जगाधरी पांवटा साहिब करीब 50 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण करवाया गया। यह भी सिरे नहीं चढ़ा।
वर्ष 2016 में बीबीएन-पांवटा-देहरादून रेल लाइन के लिए तत्कालीन राज्य मंत्री ने फिर से सर्वेक्षण के निर्देश दिए। इसके बाद मार्च 2021 में तात्कालिक रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शिमला में पांवटा साहिब जगाधरी रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण करवाने के निर्देश दिए, लेकिन आज दिन तक रेलवे लाइन सर्वे के लॉलीपॉप से बात आगे नहीं बढ़ सकी है।
हिमोत्कर्ष संस्था के अध्यक्ष आरपी तिवारी, अधिवक्ता अनिंद्र सिंह नोटी व डीएस ठाकुर का कहना है कि चुनाव के बाद हर बार यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है। रेलवे सर्वेक्षण हो जाने के बावजूद अब तक परियोजना को स्वीकृति नहीं मिल सकी है। कम राजनीतिक इच्छाशक्ति व खास दबाव नहीं बना पाने से जनता इस सुविधा से वंचित है। पांवटा साहिब और कालाअंब जैसे क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते फार्मा हब हैं, रेल सेवा की अनुपलब्धता औद्योगिक विकास में बड़ी बाधा बनती जा रही है।

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पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा
- समाजसेवी सुनील चौधरी, भरत राणा, प्रदीप चौहान व कंवर ठाकुर का कहना है कि सिरमौर में श्री रेणुकाजी, चूड़धार, मां भंगायनी मंदिर हरिपुरधार, पांवटा साहिब गुरुद्वारा समेत दर्जनों आस्था के केंद्र हैं। रेलवे लाइन सुविधा होने से देश के कोने-कोने से श्रद्धालु और पर्यटक आसानी से पहुंच सकेंगे। पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


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संसद में मजबूती से उठाते रहे रेल लाइन का मुद्दा : सुरेश कश्यप
-शिमला संंसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि लोकसभा सत्र के दौरान पांवटा साहिब और कालाअंब क्षेत्र को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की मांग को मजबूती से उठाया जाता रहा है। सांसद ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर गृहमंत्री, रेल मंत्री और वित्त मंत्री समेत कई केंद्रीय अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। प्राथमिकता के आधार पर रेल लाइन परियोजना को मंजूरी की मांग की गई है।
संवाद

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