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Sirmour News: अदालत 3
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सैन्य कर्मी की मुश्किलें बढ़ीं, अदालत ने चेक बाउंस मामले में बरकरार रखी सजा
11 मार्च 2025 को निचली अदालत ने आरोपी को सुनाई थी 1 साल की सजा और 2.50 लाख का जुर्माना
मध्यप्रदेश निवासी दोषी ने फैसले के खिलाफ की थी अपील, अब सत्र न्यायालय ने की खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस के मामले में सैन्य कर्मी की कैद की सजा को बरकरार रखते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। 11 मार्च 2025 को निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने आरोपी हृदय कुमार को एक वर्ष का कारावास और 2.50 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। साथ ही मुआवजा अदा न करने पर दो महीने की सजा भुगतने का आदेश दिया था। दोषी मध्यप्रदेश के जिले सतना के रहने वाला है। सत्र अदालत के फैसले के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
नाहन निवासी शिकायतकर्ता हरीश चंद्र शर्मा के अनुसार जनवरी 2019 में घरेलू कानूनी आवश्यकताओं के लिए आरोपी ने उससे 1.70 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने आश्वासन दिया था कि उक्त राशि अगस्त के पहले सप्ताह में वापस कर दी जाएगी। तय समय पर रकम वापस न मिलने पर आरोपी ने 8 अगस्त 2019 को एसबीआई अंबाला शाखा (हरियाणा) का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान न होने पर न्यायालय में मामला दायर किया गया। इस दौरान निचली अदालत ने हृदय कुमार को कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ दोषी ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।
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अदालत ने कहा कि केवल यह कहना कि चेक खाली हस्ताक्षरित था, आरोपी को दोषमुक्त नहीं कर सकता। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन ने एक साल की सजा सुनाने वाली निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।
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अदालत ने कहा, विधिसम्मत माना जाएगा नोटिस
दलील दी गई कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और नोटिस की विधिवत सेवा नहीं हुई। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सेना में कार्यरत आरोपी को भेजा गया नोटिस विधिसम्मत माना जाएगा और चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार होने के बाद कानूनी अनुमान आरोपी के खिलाफ जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी का जारी चेक कानूनी देनदारी के निर्वहन के लिए था और आरोपी आरोपों का खंडन करने में असफल रहा।
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11 मार्च 2025 को निचली अदालत ने आरोपी को सुनाई थी 1 साल की सजा और 2.50 लाख का जुर्माना
मध्यप्रदेश निवासी दोषी ने फैसले के खिलाफ की थी अपील, अब सत्र न्यायालय ने की खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस के मामले में सैन्य कर्मी की कैद की सजा को बरकरार रखते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। 11 मार्च 2025 को निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने आरोपी हृदय कुमार को एक वर्ष का कारावास और 2.50 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। साथ ही मुआवजा अदा न करने पर दो महीने की सजा भुगतने का आदेश दिया था। दोषी मध्यप्रदेश के जिले सतना के रहने वाला है। सत्र अदालत के फैसले के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
नाहन निवासी शिकायतकर्ता हरीश चंद्र शर्मा के अनुसार जनवरी 2019 में घरेलू कानूनी आवश्यकताओं के लिए आरोपी ने उससे 1.70 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने आश्वासन दिया था कि उक्त राशि अगस्त के पहले सप्ताह में वापस कर दी जाएगी। तय समय पर रकम वापस न मिलने पर आरोपी ने 8 अगस्त 2019 को एसबीआई अंबाला शाखा (हरियाणा) का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान न होने पर न्यायालय में मामला दायर किया गया। इस दौरान निचली अदालत ने हृदय कुमार को कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ दोषी ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।
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अदालत ने कहा कि केवल यह कहना कि चेक खाली हस्ताक्षरित था, आरोपी को दोषमुक्त नहीं कर सकता। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन ने एक साल की सजा सुनाने वाली निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।
अदालत ने कहा, विधिसम्मत माना जाएगा नोटिस
दलील दी गई कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और नोटिस की विधिवत सेवा नहीं हुई। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सेना में कार्यरत आरोपी को भेजा गया नोटिस विधिसम्मत माना जाएगा और चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार होने के बाद कानूनी अनुमान आरोपी के खिलाफ जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी का जारी चेक कानूनी देनदारी के निर्वहन के लिए था और आरोपी आरोपों का खंडन करने में असफल रहा।