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नाहन में धूमधाम से निकलेगी श्री जगन्नाथ यात्रा
ब्यूराो, नाहन (सिरमौर)।
Updated Sat, 09 Jul 2016 11:13 PM IST
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नाहन (सिरमौर)। भगवान जगन्नाथ की आठवीं विशाल रथ यात्रा रविवार को नाहन शहर में बड़े ही धूमधाम से निकलेगी। नाहन के ऐतिहासिक चौगान मैदान से रथयात्रा सुबह साढ़े 9 बजे शुरू होगी। इससे पहले नौ बजे श्रीविग्रहों की पूजा के बाद जगन्नाथ मंदिर से पालकी यात्रा का शुभारंभ होगा। इसके बाद चौगान पहुंचकर विग्रहों को रथ पर आरुढ़ व आलौकिक छप्पन भोग अर्पित कर रथ यात्रा का शुभारंभ होगा।
रथयात्रा शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरती हुई शाम को रघुनाथ मंदिर में संपन्न होगी। इसके बाद दोबारा जगन्नाथ मंदिर के लिए पालकी यात्रा होगी। शनिवार शाम को चैतन्य गौडिय मठ चंडीगढ़ के भक्तों व श्रद्घालुओं द्वारा जगन्नाथ भगवान का संकीर्तन हुआ। 30 जून से 6 जुलाई तक श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य कथा का भी आयोजन किया गया। यात्रा से पूर्व श्री जगन्नाथ मंदिर में 56 प्रकाश के भोग तैयार किए गए।
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पुरी की तर्ज पर बना है जगन्नाथ मंदिर
नाहन (सिरमौर)। ओडिशा के पुरी के बाद उत्तर भारत के नाहन में भगवान श्री जगन्नाथ का दूसरा बड़ा मंदिर है। शहर के बड़ा चौक में स्थित यह मंदिर 1681 में सिरमौर रियासत के तत्कालीन राजा बुध प्रकाश ने बनवाया। यह मंदिर ओडिशा के जगन्नाथपुरी मंदिर की तर्ज पर बना है। इसकी स्थापत्य कला बिलकुल पुरी के मंदिर से मेल खाती है। प्राचीन नाहर (नाहन) बाबा बनवारी दास की तपोस्थली रही। उन्होंने महाराजा कर्मप्रकाश को 1622 ई. में शहर को आबाद करने का आदेश दिया। बाबा बनवारी दास की तपस्या प्राचीन कालीस्थान मंदिर में चलती थी। संवत 1728 यानी साल 1671 को सिरमौर के महाराज मही प्रकाश ने बाबा बनवारी दास के हुक्म से ही खेड़ा जी महाराज को बड़ा चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर में प्रतिष्ठित करवाया। तब से शहरवासी निरंतर खेड़ा जी महाराज व भगवान श्रीजगन्नाथ का पूजन करते हैं। इसी श्रद्घा को लेकर नाहन शहर में भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है।
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भगवान जगन्नाथ के आदेश के बाद शुरू हुआ रथयात्रा का सिलसिला
नाहन(सिरमौर)। भगवान श्री जगन्नाथ के आदेश के बाद नाहन में रथयात्रा का विचार जागा। साल 2009 में नाहन शहर में पहली रथयात्रा निकाली गई। कई श्रद्घालुओं के पुरी में होने वाली जगन्नाथ यात्रा में शरीक न होने पाने की वजह भी नाहन में रथयात्रा को शुरू करने के लिए खास मानी जाती है। राजपंडित रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि शास्त्रों व पुराणों में भी रथ यात्रा के महत्व को स्वीकार किया गया है। सकंद पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि यात्रा में जो भी व्यक्ति श्री जगन्नाथ यात्रा के नाम का कीर्तन करता है वो पूर्व जन्मों से पापों से मुक्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति रथ पर श्रीजगन्नाथ के साथ विराजमान भाई बालभद्र व बहन सुभद्रा देवी के दर्शन करता है वह मोक्ष प्राप्त करता है।