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Sirmour News: बांदल में हस्तशिल्प प्रशिक्षण केंद्र शुरू, स्वरोजगार को लगेंगे पंख
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सिरमौरी लोईया बनाने का मिलेगा प्रशिक्षण
उत्कृष्ट प्रशिक्षुओं को 7,500 का प्रोत्साहन
संवाद न्यूज एजेंसी
नौहराधार/हरिपुरधार (सिरमौर)। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और पारंपरिक कला को बाजार से जोड़ने के लिए हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम ने पहल की है। हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले सिरमौरी लोईया की बुनाई को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत चौकर के बांदल में विशेष हस्तशिल्प प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है।
निगम के निदेशक हितेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस केंद्र में क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को लोईया बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उन्हें स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
बांदल में शुरू किया प्रशिक्षण केंद्र करीब एक माह तक चलेगा। प्रशिक्षुओं को लोईया बनाने के साथ इसकी फिनिशिंग और बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ना और ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना है।
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उत्कृष्ट काम पर 7,500 रुपये तक प्रोत्साहन
हथकरघा उद्योग की ओर युवाओं का रुझान बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण के दौरान प्रोत्साहन की व्यवस्था भी की गई है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को निगम की ओर से प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को 7,500 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
ऊन की खपत बढ़ेगी
प्रशिक्षण केंद्र शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ऊन की खपत बढ़ने और तैयार लोईया को बड़े बाजार तक पहुंचाने की उम्मीद है। क्षेत्रवासियों ने इस पहल के लिए प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री और रेणुका के विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार का आभार जताया। ग्रामीणों के अनुसार इससे महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।
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उत्कृष्ट प्रशिक्षुओं को 7,500 का प्रोत्साहन
संवाद न्यूज एजेंसी
नौहराधार/हरिपुरधार (सिरमौर)। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और पारंपरिक कला को बाजार से जोड़ने के लिए हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम ने पहल की है। हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले सिरमौरी लोईया की बुनाई को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत चौकर के बांदल में विशेष हस्तशिल्प प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है।
निगम के निदेशक हितेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस केंद्र में क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को लोईया बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उन्हें स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
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बांदल में शुरू किया प्रशिक्षण केंद्र करीब एक माह तक चलेगा। प्रशिक्षुओं को लोईया बनाने के साथ इसकी फिनिशिंग और बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ना और ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना है।
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उत्कृष्ट काम पर 7,500 रुपये तक प्रोत्साहन
हथकरघा उद्योग की ओर युवाओं का रुझान बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण के दौरान प्रोत्साहन की व्यवस्था भी की गई है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को निगम की ओर से प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को 7,500 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
ऊन की खपत बढ़ेगी
प्रशिक्षण केंद्र शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ऊन की खपत बढ़ने और तैयार लोईया को बड़े बाजार तक पहुंचाने की उम्मीद है। क्षेत्रवासियों ने इस पहल के लिए प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री और रेणुका के विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार का आभार जताया। ग्रामीणों के अनुसार इससे महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।