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Sirmour News: कर्मचारियों ने बद्रीपुर में की नारेबाजी, प्रबंधक का पुतला फूंका
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बिजली बोर्ड कर्मियों व पेंशनरों द्वारा बद्रीपुर में जमकर नारेबाजी व एमडी पुतला फूंका: संवाद
कर्मचारियों ने बद्रीपुर में की नारेबाजी, प्रबंधक का पुतला फूंका
कमाऊ पूत बिजली बोर्ड के कर्मियों को 52 वर्षों में पहली बार वेतन नहीं : दास
कहा, पुरानी पेंशन लागू न करने, वेतन व पेंशन न मिलने पर रोष व्याप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। विद्युत बोर्ड कर्मचारी एवं पेंशन धारकों को अब तक पेंशन और मानदेय नहीं मिल सका है। इसके विरोध में भोजन अवकाश के दौरान बोर्ड के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों समेत पेंशनर वेलफेयर संघ और संयुक्त मोर्चा संगठनों ने जमकर नारेबाजी की।
विद्युत संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर इस दौरान बद्रीपुर कार्यालय परिसर में बोर्ड के प्रबंधन निदेशक का पुतला फूंका गया।
यूनियन के वरिष्ठ राज्य उपाध्यक्ष भगवान दास, उपाध्यक्ष सुनील कुमार ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन निदेशक की कार्यप्रणाली से 52 वर्षों के इतिहास में पहली बार कमाऊपूत बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है।
सेवानिवृत्तों को पेंशन 5 जनवरी तक नहीं मिल सकी है। जब तक वेतन और पेंशन नहीं मिलता धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। अब 6 जनवरी के बाद संयुक्त मोर्चा निर्णय के बाद आगामी संघर्ष की रूप रेखा तैयार करेगा।
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सरकार को इस धरना प्रर्दशन के माध्यम से संदेश है कि बोर्ड प्रबंधन स्थायी नियुक्ति कर बोर्ड प्रबंधक हरिकेश मीणा को तुरंत प्रभाव से हटाए, पुरानी पेंशन बहाल, कर्मचारियों को वेतन व पेंशनरों को पेंंशन जारी नहीं की तो प्रदर्शन उग्र रूप से सकता है, जिसकी जिम्मेदार सरकार व बोर्ड प्रबंधन खुद होगा।
पांवटा इकाई के अध्यक्ष निर्मल सिंह और महामंत्री संजय कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष इम्तियाज हाशमी, पेंशनर संघ पांवटा इकाई के प्रधान एससी गुप्ता, एस खंभा, नगर इकाई प्रधान हंसराज, महामंत्री जगदीश चंद्र व टेक्नीकल कर्मचारी अध्यक्ष राकेश चौहान व सचिव बहादुर सिंह नेगी संबोधित करते हुए कहा कि प्रबंधन के प्रति लगातार रोष बढ़ता जा रहा है।
कोरोना काल में अपनी जान की परवाह न करते हुए कर्मचारियों ने बेहतरीन कार्य किया। कई कर्मचारियों ने अपनी जान तक गंवा दी। आज कर्मचारियों के बलिदान और सेवा भावना को दरकिनार किया जा रहा है। कहा कि सरकार और बोर्ड प्रदेश में करीब 50 हजार परिवार ऐसे हैं जो सीधा सीधा बिजली बोर्ड कर्मचारियों के वेतन पर व आय पर निर्भर रहते हैं। परिवार का पालन पोषण, बच्चों की शिक्षा समेत सभी खर्चे भी कर्मचारियों के वेतन से ही होते हैं।
कर्मचारियों को अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है। सरकार एवं बोर्ड ने शीघ्र कोई फैसला नहीं लिया तो प्रदेश संयुक्त मोर्चा के हर फैसले के साथ कर्मचारी साथ खड़ा मिलेगा।
संवाद
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कमाऊ पूत बिजली बोर्ड के कर्मियों को 52 वर्षों में पहली बार वेतन नहीं : दास
कहा, पुरानी पेंशन लागू न करने, वेतन व पेंशन न मिलने पर रोष व्याप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। विद्युत बोर्ड कर्मचारी एवं पेंशन धारकों को अब तक पेंशन और मानदेय नहीं मिल सका है। इसके विरोध में भोजन अवकाश के दौरान बोर्ड के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों समेत पेंशनर वेलफेयर संघ और संयुक्त मोर्चा संगठनों ने जमकर नारेबाजी की।
विद्युत संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर इस दौरान बद्रीपुर कार्यालय परिसर में बोर्ड के प्रबंधन निदेशक का पुतला फूंका गया।
यूनियन के वरिष्ठ राज्य उपाध्यक्ष भगवान दास, उपाध्यक्ष सुनील कुमार ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन निदेशक की कार्यप्रणाली से 52 वर्षों के इतिहास में पहली बार कमाऊपूत बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है।
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सेवानिवृत्तों को पेंशन 5 जनवरी तक नहीं मिल सकी है। जब तक वेतन और पेंशन नहीं मिलता धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। अब 6 जनवरी के बाद संयुक्त मोर्चा निर्णय के बाद आगामी संघर्ष की रूप रेखा तैयार करेगा।
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सरकार को इस धरना प्रर्दशन के माध्यम से संदेश है कि बोर्ड प्रबंधन स्थायी नियुक्ति कर बोर्ड प्रबंधक हरिकेश मीणा को तुरंत प्रभाव से हटाए, पुरानी पेंशन बहाल, कर्मचारियों को वेतन व पेंशनरों को पेंंशन जारी नहीं की तो प्रदर्शन उग्र रूप से सकता है, जिसकी जिम्मेदार सरकार व बोर्ड प्रबंधन खुद होगा।
पांवटा इकाई के अध्यक्ष निर्मल सिंह और महामंत्री संजय कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष इम्तियाज हाशमी, पेंशनर संघ पांवटा इकाई के प्रधान एससी गुप्ता, एस खंभा, नगर इकाई प्रधान हंसराज, महामंत्री जगदीश चंद्र व टेक्नीकल कर्मचारी अध्यक्ष राकेश चौहान व सचिव बहादुर सिंह नेगी संबोधित करते हुए कहा कि प्रबंधन के प्रति लगातार रोष बढ़ता जा रहा है।
कोरोना काल में अपनी जान की परवाह न करते हुए कर्मचारियों ने बेहतरीन कार्य किया। कई कर्मचारियों ने अपनी जान तक गंवा दी। आज कर्मचारियों के बलिदान और सेवा भावना को दरकिनार किया जा रहा है। कहा कि सरकार और बोर्ड प्रदेश में करीब 50 हजार परिवार ऐसे हैं जो सीधा सीधा बिजली बोर्ड कर्मचारियों के वेतन पर व आय पर निर्भर रहते हैं। परिवार का पालन पोषण, बच्चों की शिक्षा समेत सभी खर्चे भी कर्मचारियों के वेतन से ही होते हैं।
कर्मचारियों को अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है। सरकार एवं बोर्ड ने शीघ्र कोई फैसला नहीं लिया तो प्रदेश संयुक्त मोर्चा के हर फैसले के साथ कर्मचारी साथ खड़ा मिलेगा।
संवाद
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