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Sirmour News: सरकार जल्द एसएमसी शिक्षकों के लिए नियमितीकरण नीति बनाए
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हिमाचल गवर्नमेंट टीचर यूनियन बकरास ने प्रदेश सरकार से उठाई मांग
बोले, जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक नियमित अध्यापकों के बराबर वेतन दिया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। हिमाचल में एसएमसी अध्यापकों का 13 सालों से शोषण हो रहा है। सरकार अभी तक कोई स्थायी नीति नहीं बना पाई है। प्रदेश में 2525 एसएमसी अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार के समक्ष कई बार मुद्दा उठाया गया है लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
हिमाचल गवर्नमेंट टीचर यूनियन बकरास ब्लॉक के अध्यक्ष राय सिंह ने कहा कि इन अध्यापकों ने 13 वर्षों से लगातार सेवाएं दी हैं, लेकिन अभी तक नियमित नीति नहीं बनाई गई है, जबकि अन्य श्रेणियों में 8 वर्षों में नियमितीकरण किया गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द एसएमसी शिक्षकों के लिए नियमितीकरण नीति बनाए और 2525 एसएमसी शिक्षकों को नियमित करे।
उन्होंने कहा कि जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक नियमित अध्यापकों के बराबर वेतन दिया जाए, जिससे परिवार का पालन-पोषण ठीक से हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसएमसी अध्यापकों को 15000 से 19000 रुपये तक वेतन मिलता है, जबकि नियमित अध्यापक 90000 रुपये तक वेतन लेते हैं, जबकि दोनों का समान काम है।
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उन्होंने बताया कि सरकार ने एलडीआर नीति बनाने की बात कही थी, लेकिन 2 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ है।
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बोले, जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक नियमित अध्यापकों के बराबर वेतन दिया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। हिमाचल में एसएमसी अध्यापकों का 13 सालों से शोषण हो रहा है। सरकार अभी तक कोई स्थायी नीति नहीं बना पाई है। प्रदेश में 2525 एसएमसी अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार के समक्ष कई बार मुद्दा उठाया गया है लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
हिमाचल गवर्नमेंट टीचर यूनियन बकरास ब्लॉक के अध्यक्ष राय सिंह ने कहा कि इन अध्यापकों ने 13 वर्षों से लगातार सेवाएं दी हैं, लेकिन अभी तक नियमित नीति नहीं बनाई गई है, जबकि अन्य श्रेणियों में 8 वर्षों में नियमितीकरण किया गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द एसएमसी शिक्षकों के लिए नियमितीकरण नीति बनाए और 2525 एसएमसी शिक्षकों को नियमित करे।
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उन्होंने कहा कि जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक नियमित अध्यापकों के बराबर वेतन दिया जाए, जिससे परिवार का पालन-पोषण ठीक से हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसएमसी अध्यापकों को 15000 से 19000 रुपये तक वेतन मिलता है, जबकि नियमित अध्यापक 90000 रुपये तक वेतन लेते हैं, जबकि दोनों का समान काम है।
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उन्होंने बताया कि सरकार ने एलडीआर नीति बनाने की बात कही थी, लेकिन 2 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ है।