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Sirmour News: अदालत.
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सड़क हादसे से जुड़े मुआवजा मामले की
फाइल चंडीगढ़ ट्रिब्यूनल भेजने के आदेश
- पांवटा साहिब का मामला, एमएसीटी ने पहले से लंबित याचिका का दिया हवाला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे में मृतक के मुआवजे से जुड़े मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने मामला चंडीगढ़ स्थित एमएसीटी कोर्ट में भेजने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब संबंधित दावा याचिका पहले ही चंडीगढ़ की अदालत में लंबित है, तो उसी अदालत में पूरे मामले की सुनवाई होगी। इसके चलते पांवटा साहिब में दाखिल डीएआर (डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) को अब चंडीगढ़ भेजने का आदेश दिया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान मृतक राकेश कुमार की पत्नी सोनिया के बयान दर्ज किए गए। इसमें उन्होंने बताया कि हादसे से संबंधित दावा याचिका पहले ही चंडीगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (कोर्ट नंबर-3) के समक्ष दायर की जा चुकी है। यह याचिका 2 मार्च 2026 को दर्ज हुई थी और वर्तमान में 27 मई 2026 की तारीख के लिए सूचीबद्ध है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि पांवटा साहिब ट्रिब्यूनल में डीएआर (डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) 6 अप्रैल 2026 को दाखिल की गई थी। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि जिस अदालत में पहले दावा याचिका दायर हो चुकी है, उसी के पास मामले की सुनवाई का अधिकार होगा।
इसी आधार पर एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी कपिल शर्मा ने आदेश दिए कि वर्तमान डीएआर को निर्धारित तिथि से पहले चंडीगढ़ स्थित एमएसीटी कोर्ट भेजा जाए, ताकि वहां मामले की सुनवाई आगे बढ़ सके। इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता और तेजी लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। एक ही मामले की अलग-अलग अदालतों में सुनवाई से बचने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।
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फाइल चंडीगढ़ ट्रिब्यूनल भेजने के आदेश
- पांवटा साहिब का मामला, एमएसीटी ने पहले से लंबित याचिका का दिया हवाला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे में मृतक के मुआवजे से जुड़े मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने मामला चंडीगढ़ स्थित एमएसीटी कोर्ट में भेजने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब संबंधित दावा याचिका पहले ही चंडीगढ़ की अदालत में लंबित है, तो उसी अदालत में पूरे मामले की सुनवाई होगी। इसके चलते पांवटा साहिब में दाखिल डीएआर (डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) को अब चंडीगढ़ भेजने का आदेश दिया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान मृतक राकेश कुमार की पत्नी सोनिया के बयान दर्ज किए गए। इसमें उन्होंने बताया कि हादसे से संबंधित दावा याचिका पहले ही चंडीगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (कोर्ट नंबर-3) के समक्ष दायर की जा चुकी है। यह याचिका 2 मार्च 2026 को दर्ज हुई थी और वर्तमान में 27 मई 2026 की तारीख के लिए सूचीबद्ध है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि पांवटा साहिब ट्रिब्यूनल में डीएआर (डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) 6 अप्रैल 2026 को दाखिल की गई थी। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि जिस अदालत में पहले दावा याचिका दायर हो चुकी है, उसी के पास मामले की सुनवाई का अधिकार होगा।
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इसी आधार पर एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी कपिल शर्मा ने आदेश दिए कि वर्तमान डीएआर को निर्धारित तिथि से पहले चंडीगढ़ स्थित एमएसीटी कोर्ट भेजा जाए, ताकि वहां मामले की सुनवाई आगे बढ़ सके। इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता और तेजी लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। एक ही मामले की अलग-अलग अदालतों में सुनवाई से बचने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।
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