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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Sirmour Court says mere marital dispute is not dowry harassment

हिमाचल: कोर्ट ने कहा- सिर्फ सामान्य वैवाहिक विवाद दहेज उत्पीड़न नहीं, साक्ष्य के अभाव में पति और सास बरी

Tue, 10 Feb 2026 09:40 AM IST
शिमला ब्यूरो दीपक मेहता, नाहन (सिरमौर)।
दीपक मेहता, नाहन (सिरमौर)। Published by: शिमला ब्यूरो Updated Tue, 10 Feb 2026 09:40 AM IST
सार

केवल सामान्य वैवाहिक विवाद को दहेज उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। ये टिप्पणी की है न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) विशाल तिवारी की अदालत ने। क्या है पूरा मामला विस्तार से जानें... 

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Himachal Sirmour Court says mere marital dispute is not dowry harassment
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दहेज प्रताड़ना और मारपीट से जुड़े एक पुराने मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते स्पष्ट किया है कि केवल सामान्य वैवाहिक विवाद को दहेज उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जब तक कि अवैध दहेज मांग से जुड़ी ठोस क्रूरता सिद्ध न हो। न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) विशाल तिवारी की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में पति और सास को बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में उत्तराखंड के ऋषिकेश निवासी गगनदीप और सुरेंद्र कौर को आईपीसी की धारा 498ए, 406, 323 व 506 के आरोपों से दोषमुक्त करार दिया।

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यह मामला जून, 2014 में पांवटा साहिब थाना में दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2013 में विवाह के बाद ससुराल पक्ष ने कार और नकदी की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया। मांग पूरी न होने पर मारपीट कर घर से निकालने और दहेज में मिले सामान हड़पने के भी आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला के पिता ने 45,000 रुपये उसके पति को दिए थे। हालांकि, सुनवाई के दौरान स्वयं शिकायतकर्ता ने बयान दिया कि यह राशि स्कूटी खरीदने के लिए ली गई थी। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसका स्त्री धन उसे वापस मिल चुका है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता दहेज मांग की तिथि, समय और परिस्थितियों का स्पष्ट विवरण नहीं दे सकी।

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कथित मारपीट के समर्थन में कोई मेडिकल साक्ष्य भी पेश नहीं किए गए। गवाहों के बयान भी अभियोजन के पक्ष में ठोस रूप से सिद्ध नहीं हो सके, जबकि एक गवाह अपने पूर्व बयान से मुकर गया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में पति और सास को बरी कर दिया गया। मामले के तीसरे आरोपी जगजीत सिंह के खिलाफ न्यायालय ने पूर्व में 29 नवंबर 2011 की कार्यवाही के बाद मामला बंद कर दिया था।
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