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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह महीने की सजा
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मैत्रीपूर्ण संबंध के चलते 50 हजार की रकम ली थी उधार
न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। करीब दो वर्ष पहले लिए दोस्ताना ऋण को वापस न चुकाना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी रमेश को दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित पक्ष को 80 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश भी दिए हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने फैसले में कहा कि यदि दोषी मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त दो माह का कारावास भुगतना होगा। मामला वर्ष 2024 में तहसील शिलाई क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता भरत सिंह ने अदालत को बताया कि रमेश ने मार्च 2024 में मैत्रीपूर्ण संबंधों के चलते उससे 50 हजार रुपये उधार लिए थे और राशि लौटाने का वादा किया था। आरोपी तय समय में ऋण राशि लौटाने में विफल रहा। इसके बाद उसने 8 मार्च 2024 को 50 हजार रुपये का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
भरत सिंह ने बताया कि आरोपी को कानूनी नोटिस भी भेजा गया, लेकिन उसने न तो उधार राशि लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पाया कि आरोपी अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका और शिकायतकर्ता के आरोप प्रमाणित हुए। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। करीब दो वर्ष पहले लिए दोस्ताना ऋण को वापस न चुकाना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी रमेश को दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित पक्ष को 80 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश भी दिए हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने फैसले में कहा कि यदि दोषी मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त दो माह का कारावास भुगतना होगा। मामला वर्ष 2024 में तहसील शिलाई क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता भरत सिंह ने अदालत को बताया कि रमेश ने मार्च 2024 में मैत्रीपूर्ण संबंधों के चलते उससे 50 हजार रुपये उधार लिए थे और राशि लौटाने का वादा किया था। आरोपी तय समय में ऋण राशि लौटाने में विफल रहा। इसके बाद उसने 8 मार्च 2024 को 50 हजार रुपये का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
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भरत सिंह ने बताया कि आरोपी को कानूनी नोटिस भी भेजा गया, लेकिन उसने न तो उधार राशि लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पाया कि आरोपी अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका और शिकायतकर्ता के आरोप प्रमाणित हुए। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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