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Sirmour News: कमर तक पानी में उतरकर रेणुका झील को सहेज रहीं जल सहेलियां
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रेणुकाजी में रेणुका झील की सफाई करती महिलाएं। संवाद
सचित्र--
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। आस्था, समर्पण और अदम्य साहस की एक अनोखी मिसाल सिरमौर जिले में देखने को मिल रही है। मां रेणुकाजी सेवा समिति के बैनर तले चल रहे स्वच्छता अभियान में स्थानीय महिलाएं अपनी जान की परवाह किए बिना इतिहास रच रहीं हैं।
रविवार को ऐतिहासिक रेणुका झील के संरक्षण के लिए महिलाओं ने जो जज्बा दिखाया, उसने हर किसी को हैरान और प्रेरित कर दिया। रविवार सुबह जब आम लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तब आधा दर्जन महिला मंडलों की सैकड़ों महिलाएं रेणुका झील के किनारे इकट्ठा हुईं। देखते ही देखते ये महिलाएं आधी कमर तक गहरे और ठंडे पानी में उतर गईं। पानी के भीतर छिपे खतरों और अपनी जान की परवाह न करते हुए, इन जल सहेलियों ने झील के भीतर उगी खतरनाक खरपतवार, जंगली घास, सरकंडों और झाड़ियों को जड़ से उखाड़ना शुरू कर दिया। महिलाओं का यह संघर्ष और समर्पण सुबह से लेकर दोपहर बाद तक लगातार जारी रहा।
समिति के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने बताया कि झील को स्वच्छ रखने का यह संकल्प अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। रविवार के विशेष श्रमदान में महिला मंडल भाटगढ़, चाम्ला, धारला, घलजा, धार टारन, खालाक्यार और शक्ति महिला मंडल बेडौन की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाओं के इस कड़े परिश्रम की बदौलत झील के भीतर से चार बड़े ट्रैक्टर कचरा, जंगली झाड़ियां और कूड़ा-करकट बाहर निकाला गया, जिसे बाद में सुरक्षित स्थानों पर ठिकाने लगाया गया।
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हर रविवार और विशेष पर्व पर बहेगा पसीना
समिति के अध्यक्ष ने महिलाओं के इस असाधारण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि हर रविवार, धार्मिक आयोजनों और विशेष पर्वों पर यह सेवा श्रमदान इसी तरह जारी रहेगा। रेणुका झील को उसका पुराना स्वरूप लौटाने के लिए क्षेत्र की महिलाएं अब पूरी तरह कमर कस चुकी हैं। पीठ पर घर की जिम्मेदारी और हाथों में पर्यावरण संरक्षण का यह जिम्मा उठाकर इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि जब बात अपनी धरोहर को बचाने की हो, तो वे किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटने वालीं।-- -- -
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संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। आस्था, समर्पण और अदम्य साहस की एक अनोखी मिसाल सिरमौर जिले में देखने को मिल रही है। मां रेणुकाजी सेवा समिति के बैनर तले चल रहे स्वच्छता अभियान में स्थानीय महिलाएं अपनी जान की परवाह किए बिना इतिहास रच रहीं हैं।
रविवार को ऐतिहासिक रेणुका झील के संरक्षण के लिए महिलाओं ने जो जज्बा दिखाया, उसने हर किसी को हैरान और प्रेरित कर दिया। रविवार सुबह जब आम लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तब आधा दर्जन महिला मंडलों की सैकड़ों महिलाएं रेणुका झील के किनारे इकट्ठा हुईं। देखते ही देखते ये महिलाएं आधी कमर तक गहरे और ठंडे पानी में उतर गईं। पानी के भीतर छिपे खतरों और अपनी जान की परवाह न करते हुए, इन जल सहेलियों ने झील के भीतर उगी खतरनाक खरपतवार, जंगली घास, सरकंडों और झाड़ियों को जड़ से उखाड़ना शुरू कर दिया। महिलाओं का यह संघर्ष और समर्पण सुबह से लेकर दोपहर बाद तक लगातार जारी रहा।
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समिति के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने बताया कि झील को स्वच्छ रखने का यह संकल्प अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। रविवार के विशेष श्रमदान में महिला मंडल भाटगढ़, चाम्ला, धारला, घलजा, धार टारन, खालाक्यार और शक्ति महिला मंडल बेडौन की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाओं के इस कड़े परिश्रम की बदौलत झील के भीतर से चार बड़े ट्रैक्टर कचरा, जंगली झाड़ियां और कूड़ा-करकट बाहर निकाला गया, जिसे बाद में सुरक्षित स्थानों पर ठिकाने लगाया गया।
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हर रविवार और विशेष पर्व पर बहेगा पसीना
समिति के अध्यक्ष ने महिलाओं के इस असाधारण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि हर रविवार, धार्मिक आयोजनों और विशेष पर्वों पर यह सेवा श्रमदान इसी तरह जारी रहेगा। रेणुका झील को उसका पुराना स्वरूप लौटाने के लिए क्षेत्र की महिलाएं अब पूरी तरह कमर कस चुकी हैं। पीठ पर घर की जिम्मेदारी और हाथों में पर्यावरण संरक्षण का यह जिम्मा उठाकर इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि जब बात अपनी धरोहर को बचाने की हो, तो वे किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटने वालीं।