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Sirmour News: 12 साल बाद शिलाई पहुंचे चालदा महासू, स्वागत को उमड़े लोग
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शिलाई में चालदा महासू की पालकी के दौरान शोभा यात्रा में शामिल लोग। संवाद
कोटी मंदिर से निकली पवित्र यात्रा, गांव-गांव में हो रहा भ्रमण
पारंपरिक वाद्य और नृत्य से हुआ देवता का स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। क्षेत्र के 52 गांवों की परिक्रमा पर निकले कोटी गांव के चालदा महासू वीरवार को शिलाई गांव पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने देव पालकी का पारंपरिक और भव्य तरीके से स्वागत किया। करीब 12 वर्षों के अंतराल के बाद कोटी स्थित मंदिर से निकली यह पवित्र यात्रा शिलाई खत के गांवों का भ्रमण कर रही है।
शिलाई उपमंडल की बाली कोटी पंचायत के कोटी गांव में महासू महाराज का प्राचीन मंदिर है। यहां चालदा और बोठा महासू विराजमान हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार महासू देवता हनोल से शिलाई क्षेत्र की रक्षा के लिए आए थे।
लोक कथा के अनुसार चूड़धार यात्रा पर निकले 19 यात्रियों में से 18 की एक विवाद के चलते हत्या कर दी गई थी। एक व्यक्ति को जीवित छोड़कर संदेशवाहक बनाया गया। बताया जाता है कि यह घटना रोनहाट के निकट मीनस क्षेत्र की एक गुफा में हुई। इसके बाद वह व्यक्ति हनोल स्थित महासू मंदिर पहुंचा और पूरी घटना देवता को सुनाई। मान्यता है कि इसके पश्चात महासू महाराज ने न्याय का आश्वासन दिया और शिलाई क्षेत्र में प्रकट होकर यहां मंदिर की स्थापना की।
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समय के साथ शिलाई गांव का विकास हुआ। उस घटना से जुड़े दूसरे गांव की स्थिति कमजोर होती चली गई। करीब दो दशक पहले शिलाई और रास्त गांव के लोगों के बीच महासू महाराज की प्रेरणा से समझौता हुआ। इसके बाद दोनों गांवों के संबंध सामान्य हो गए और अब रिश्तेदारी भी स्थापित हो चुकी है।
महासू महाराज के आगमन को लेकर शिलाई में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों, नृत्य और गहरी आस्था के साथ देवता का स्वागत कर भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।
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पारंपरिक वाद्य और नृत्य से हुआ देवता का स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। क्षेत्र के 52 गांवों की परिक्रमा पर निकले कोटी गांव के चालदा महासू वीरवार को शिलाई गांव पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने देव पालकी का पारंपरिक और भव्य तरीके से स्वागत किया। करीब 12 वर्षों के अंतराल के बाद कोटी स्थित मंदिर से निकली यह पवित्र यात्रा शिलाई खत के गांवों का भ्रमण कर रही है।
शिलाई उपमंडल की बाली कोटी पंचायत के कोटी गांव में महासू महाराज का प्राचीन मंदिर है। यहां चालदा और बोठा महासू विराजमान हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार महासू देवता हनोल से शिलाई क्षेत्र की रक्षा के लिए आए थे।
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लोक कथा के अनुसार चूड़धार यात्रा पर निकले 19 यात्रियों में से 18 की एक विवाद के चलते हत्या कर दी गई थी। एक व्यक्ति को जीवित छोड़कर संदेशवाहक बनाया गया। बताया जाता है कि यह घटना रोनहाट के निकट मीनस क्षेत्र की एक गुफा में हुई। इसके बाद वह व्यक्ति हनोल स्थित महासू मंदिर पहुंचा और पूरी घटना देवता को सुनाई। मान्यता है कि इसके पश्चात महासू महाराज ने न्याय का आश्वासन दिया और शिलाई क्षेत्र में प्रकट होकर यहां मंदिर की स्थापना की।
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समय के साथ शिलाई गांव का विकास हुआ। उस घटना से जुड़े दूसरे गांव की स्थिति कमजोर होती चली गई। करीब दो दशक पहले शिलाई और रास्त गांव के लोगों के बीच महासू महाराज की प्रेरणा से समझौता हुआ। इसके बाद दोनों गांवों के संबंध सामान्य हो गए और अब रिश्तेदारी भी स्थापित हो चुकी है।
महासू महाराज के आगमन को लेकर शिलाई में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों, नृत्य और गहरी आस्था के साथ देवता का स्वागत कर भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।

शिलाई में चालदा महासू की पालकी के दौरान शोभा यात्रा में शामिल लोग। संवाद