{"_id":"5eb825158ebc3e90896a1f04","slug":"agriculture-nahan-news-sml3326001101","type":"story","status":"publish","title_hn":"फूलों के खरीदार न मिलने से करोड़ों का नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फूलों के खरीदार न मिलने से करोड़ों का नुकसान
विज्ञापन
राजगढ़ क्षेत्र में खेतों में लहला रहे फूल।
- फोटो : NAHAN
राजगढ़ (सिरमौर)। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन और कर्फ्यू की सबसे अधिक मार क्षेत्र के पुष्प उत्पादकों को झेलनी पड़ रही है। राजगढ़ क्षेत्र पुष्प उत्पादन में प्रदेशभर में अग्रणी स्थान रखता है। यहां के किसान पिछले कई वर्षों से विभिन्न प्रजाति के फूलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिसमें ग्लेडयूल्स, गुलदावदी, सरफ व बाबुना इत्यादि प्रमुख हैं।
इन दिनों बाबुना फूल की फसल तैयार हो चुकी है लेकिन इसके खरीदार न होने से क्षेत्र के किसानों का करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया है। बाबुना फूल गत वर्ष अधिकतम 250 रुपये प्रति किलो और न्यूनतम 100 रुपये किलो तक बिका था। इसे देखते हुए किसानों ने बड़े पैमाने पर इस साल बाबुना फूल लगाया था लेकिन कोरोना महामारी के कारण देश भर में जारी लॉकडाउन और कर्फ्यू ने किसानों की आशाओं पर पानी फेर दिया है। कई किसानों ने फूल उखाड़ कर उसमें फ्रांसबीन की बिजाई कर दी है। जबकि, कई किसान अभी तक भी उम्मीद लगाए हैं कि शायद कुछ मांग हो जाए तो उन्हें थोड़ी बहुत आय मिल जाए।
दीदग निवासी अग्रणी पुष्प उत्पादक किसान लेखराम ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने एक खेत में बाबुना फूल लगाया था, जिससे उन्हें करीब चार लाख रुपये की आमदनी हुई थी। इस वर्ष उन्होंने लहसुन न लगाकर तीन खेतों में फूल लगाया, लेकिन अब उन्हें इसके ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने अभी तक फूल नहीं उखाड़े हैं लेकिन आढ़तियों का कहना है कि अभी फूलों की कोई मांग नहीं है, इसलिए फूल न भेजें। लेखराम ने कहा कि उन्हें करीब पांच छ: लाख रुपये का नुकसान होगा। इसके अतिरिक्त धार निवासी अशोक चौधरी ने भी एक खेत से फूल नहीं उखाड़े हैं। उन्हें भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। जबकि सुधीर, अरुण, जयपाल, विनोद, राजेंद्र आदि किसानों का कहना है कि उन्होंने बाबुना फूल की लगी फसल उखाड़ दी है और उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है। राजगढ़ विकास खंड की भुईरा, दीदग, दाहन, बोहल टालिया, भाणत, हाब्बन, जदोल टपरोली, शरगांव, नई नेटी, रानाघाट और पझौता तथा रासुमांदर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुष्प उत्पादन किया जाता है। सैकड़ों किसानों को करोड़ों की चपत इस वर्ष लगी है। किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इन दिनों बाबुना फूल की फसल तैयार हो चुकी है लेकिन इसके खरीदार न होने से क्षेत्र के किसानों का करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया है। बाबुना फूल गत वर्ष अधिकतम 250 रुपये प्रति किलो और न्यूनतम 100 रुपये किलो तक बिका था। इसे देखते हुए किसानों ने बड़े पैमाने पर इस साल बाबुना फूल लगाया था लेकिन कोरोना महामारी के कारण देश भर में जारी लॉकडाउन और कर्फ्यू ने किसानों की आशाओं पर पानी फेर दिया है। कई किसानों ने फूल उखाड़ कर उसमें फ्रांसबीन की बिजाई कर दी है। जबकि, कई किसान अभी तक भी उम्मीद लगाए हैं कि शायद कुछ मांग हो जाए तो उन्हें थोड़ी बहुत आय मिल जाए।
विज्ञापन
दीदग निवासी अग्रणी पुष्प उत्पादक किसान लेखराम ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने एक खेत में बाबुना फूल लगाया था, जिससे उन्हें करीब चार लाख रुपये की आमदनी हुई थी। इस वर्ष उन्होंने लहसुन न लगाकर तीन खेतों में फूल लगाया, लेकिन अब उन्हें इसके ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने अभी तक फूल नहीं उखाड़े हैं लेकिन आढ़तियों का कहना है कि अभी फूलों की कोई मांग नहीं है, इसलिए फूल न भेजें। लेखराम ने कहा कि उन्हें करीब पांच छ: लाख रुपये का नुकसान होगा। इसके अतिरिक्त धार निवासी अशोक चौधरी ने भी एक खेत से फूल नहीं उखाड़े हैं। उन्हें भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। जबकि सुधीर, अरुण, जयपाल, विनोद, राजेंद्र आदि किसानों का कहना है कि उन्होंने बाबुना फूल की लगी फसल उखाड़ दी है और उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है। राजगढ़ विकास खंड की भुईरा, दीदग, दाहन, बोहल टालिया, भाणत, हाब्बन, जदोल टपरोली, शरगांव, नई नेटी, रानाघाट और पझौता तथा रासुमांदर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुष्प उत्पादन किया जाता है। सैकड़ों किसानों को करोड़ों की चपत इस वर्ष लगी है। किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।
विज्ञापन