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धनतेरस पर करें कुबेर यंत्र की स्थापना : सेमवाल
Sirmour
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। ज्योतिषाचार्य आचार्य बलराम सेमवाल व ज्योतिषी पंडित कमलकांत और विमलकांत सेमवाल ने बताया कि पंचपर्वीय दीपावली आरंभ धनत्रयोदशी के शुभ दिन से हो जाता है। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि कृष्ण पक्ष में कार्तिक मास के 13वें दिन धनतेरस मनाते है। इस बार, यह पर्व मंगलवार कार्तिक कृष्ण पक्ष 21 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन धन के देवता कुबेर यंत्र की स्थापना करनी चाहिए। पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप विशेष फलदायी होता है। कहा जाता है कि इसी दिन धनवन्तरी अपने आयुर्वेदिक ज्ञान के साथ जनमानस के कल्याण को समुद्र से बाहर आए थे।
समुद्र मंथन से प्राप्त होने वाले चौदह रत्नों में से एक है, इसलिए इस दिन को धनवंतरी जयंती के रूप में मनाया जाने लगा। इसी दिन मां लक्ष्मी भी समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से प्रकट हुई थी। धनवंतरी देव के साथ मां लक्ष्मी व कुबेर जी की पूजन परंपरा रही है। यमदेव की विशेष पूजा होती है। इस दिन संध्या के समय स्नान करके यमराज को प्रसाद व दीया चढ़ाया जाता है, जिसमें आकस्मिक मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है। इस दिन नए बर्तन खरीद कर उसमें अन्न भर कर पूजा स्थल पर रखते हैं, जिससे अन्न व धन की कमी नहीं रहती। धनतेरस में गणेश गौरी, महालक्ष्मी व कुबेर का पूजन खास महत्व रखता है।
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विशेष होते दीपावली के पांच दिन
ज्योतिषाचार्य बलराज सेमवाल का कहना है कि पंचपर्वीय दीपावली के पांच दिन विशेष होते हैं। इसमें धनतेरस, हनुमान जयंती, छोटी दीपावली-बड़ी दीपावली, गोवर्धन पूजा-अन्नकूट तथा पांचवा दिन भैया दूज शामिल है। दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस से पंचपर्वीय त्यौहार मनाया जाना शुरू हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि कृष्ण पक्ष में कार्तिक मास के 13वें दिन धनतेरस मनाते है। इस बार, यह पर्व मंगलवार कार्तिक कृष्ण पक्ष 21 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन धन के देवता कुबेर यंत्र की स्थापना करनी चाहिए। पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप विशेष फलदायी होता है। कहा जाता है कि इसी दिन धनवन्तरी अपने आयुर्वेदिक ज्ञान के साथ जनमानस के कल्याण को समुद्र से बाहर आए थे।
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समुद्र मंथन से प्राप्त होने वाले चौदह रत्नों में से एक है, इसलिए इस दिन को धनवंतरी जयंती के रूप में मनाया जाने लगा। इसी दिन मां लक्ष्मी भी समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से प्रकट हुई थी। धनवंतरी देव के साथ मां लक्ष्मी व कुबेर जी की पूजन परंपरा रही है। यमदेव की विशेष पूजा होती है। इस दिन संध्या के समय स्नान करके यमराज को प्रसाद व दीया चढ़ाया जाता है, जिसमें आकस्मिक मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है। इस दिन नए बर्तन खरीद कर उसमें अन्न भर कर पूजा स्थल पर रखते हैं, जिससे अन्न व धन की कमी नहीं रहती। धनतेरस में गणेश गौरी, महालक्ष्मी व कुबेर का पूजन खास महत्व रखता है।
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विशेष होते दीपावली के पांच दिन
ज्योतिषाचार्य बलराज सेमवाल का कहना है कि पंचपर्वीय दीपावली के पांच दिन विशेष होते हैं। इसमें धनतेरस, हनुमान जयंती, छोटी दीपावली-बड़ी दीपावली, गोवर्धन पूजा-अन्नकूट तथा पांचवा दिन भैया दूज शामिल है। दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस से पंचपर्वीय त्यौहार मनाया जाना शुरू हो जाता है।