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एक ने मरने के लिए छोड़ा, दूसरा मसीहा बनकर पहुंचा

Thu, 22 Feb 2018 10:21 PM IST
Updated Thu, 22 Feb 2018 10:21 PM IST
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एक ने मरने के लिए छोड़ा, दूसरा मसीहा बनकर पहुंचा
नवजात बच्ची

हितेश शर्मा / संजय गुप्ता

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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन / कालाअंब (सिरमौर)।
जाको राखे साइंया मार सके न कोई... कहावत जनपद सिरमौर में चरितार्थ हो गई। एनएच के किनारे झाड़ियों में मरने के लिए छोड़ी गई बच्ची का न तो ठंड कुछ बिगाड़ पाई और न ही जंगली जानवरों की नजर बच्ची पर पड़ी। हालांकि, यह पता नहीं चल पाया है कि किस समय दो माह की दूधमुंही बच्ची को एनएच के किनारे फेंका गया था। हो सकता है कि रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ही पत्थर दिल कलयुगी मां-बाप ने उसे सुनसान में मरने के लिए रोता-बिलखता छोड़ दिया।

इस कुकृत्य ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे को भी तार-तार कर दिया है। हैरानी की बात है कि उस क्षेत्र में बच्ची को अकेला छोड़कर अज्ञात मां-बाप चलते बने जहां पर कोई आबादी तक नहीं है। सैनवाला से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित इस जगह पर महज के शिव काली का मंदिर है। यहां बच्ची को सड़क के किनारे फेंक दिया।
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कहते हैं कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। इस बच्ची के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। सुबह के समय एक प्रशासनिक अधिकारी जब सैर के लिए पहुंचे तो उन्हें बच्चे के रोने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। बस फिर क्या था। सेवानिवृत्त अधिकारी रामेश्वर तोमर बच्ची की आवाज सुनकर उसके पास पहुंचे। देखा कि एक कंबल में लिपटी दो माह की बच्ची जोर-जोर से रो रही है। सैनवाला निवासी रामेश्वर तोमर ने बच्ची को उठाया और अपने घर ले आए।
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विधि का विधान देखिए... बच्ची भी उनके घर पहुंची जिनके घर औलाद का सुख नहीं मिल पाया है। पता चला है कि रामेश्वर सिंह की विवाहित बेटी और भतीजे के पास कोई औलाद नहीं है। हालांकि, इस परिवार ने बच्ची को गोद लेने के लिए हामी भरी है। लेकिन, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही बच्ची को गोद लेने की अनुमति मिल पाएगी। बहरहाल, पुलिस ने मामला बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। अब बाल कल्याण समिति तय करेगी कि बच्ची को गोद लेने के लिए कौन सा परिवार उपयुक्त रहेगा। साथ ही इस मामले में अज्ञात मां-बाप के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 317 के तहत मामला दर्ज किया है।


मजबूरी में फेंकी या बेटे की चाह
झाड़ियों में बेटी को फेंकने को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। एक मां ने बेटी को इस तरह क्यों मरने के लिए फेंक दिया। इसको लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। मां की कोई मजबूरी रही होगी या फिर 21वीं सदी के इस युग में भी बेटे की चाह रखने वालों ने बेटी को मरने के लिए छोड़ दिया। पुलिस इस पहलू पर भी जांच कर रही है।

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