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लोटा लूण से वोट पक्का करने की जुगत में पार्टी कार्यकर्ता

Tue, 07 Nov 2017 11:10 PM IST
Updated Tue, 07 Nov 2017 11:10 PM IST
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लोटा लूण से वोट पक्का करने की जुगत में पार्टी कार्यकर्ता
नगर निकाय चुनाव - फोटो : self
अमर उजाला ब्यूरो
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सतौन (सिरमौर)।
चुनाव प्रचार थमने के बाद पार्टी कार्यकर्ता लोटा-लूण से वोट पक्का करने की जुगत में पड़ गए हैं। गिरिपार इलाका खासकर शिलाई विधानसभा क्षेत्र में लोटा लूण से वोट पक्का करने की जुगत पहली बार नहीं हो रही है। बल्कि, यह प्रथा पिछले काफी सालों से चली आ रही है।

इस प्रथा से पार्टी कार्यकर्ता यहां तक कि कई बार प्रत्याशी भी अपने लिए समर्थन मांगने के लिए मतदाताओं से लोटे में नमक डालकर वोट पक्का करने की कसमें दिलाता है। यदि वोटर ने अपनी लोटे में पानी भरकर उसमें नमक डालकर कसम खा ली तो समझो वोट पक्का हो गया।
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इसके बाद वोटर को उसी प्रत्याशी को वोट करना होता है जिसके लिए वोट देने की उसने कसम ली हो। 9 नवंबर को मतदान होगा। इसके लिए 7 नवंबर को चुनाव प्रचार भी खत्म हो गया। मंगलवार को चुनाव प्रचार थमने के बाद अब असली परीक्षा पार्टी कार्यकर्ताओं की होगी। यह एक तरह से अग्नि परीक्षा है। चुनाव से ठीक एक दिन पहले संबंधित पार्टी के कार्यकर्ता शिलाई क्षेत्र में लोटा-लूण की कसम देकर मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षिक करने का प्रयास करेंगे।
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वोटर पक्का करने के लिए जोर शोर से यह कसम खिलाई जा रही है। लोटा लूूण कसम के तहत कार्यकर्ता वोटर से एक पानी के भरे लोटे (बर्तन) में नमक डलवाता है और कसम खिलाई जाती है कि मैं आपकी पार्टी को वोट करूंगा, यदि नहीं करूंगा तो मैं इस नमक के तरह पानी में गलूंगा। माना जाता है कि क्षेत्र में इस कसम से बढ़कर और कोई भी कसम नहीं है। यह कसम एक तरह से वोटर का संबंधित दल को वोट कास्ट करने आखिरी फैसला है और कार्यकर्ता के लिए भी यह किसी बड़े हथियार से कम नहीं है। कार्यकर्ता का भी यह आखिरी हथियार है।


हालांकि ऐसी कसम खाने के लिए वह वोटर तैयार नहीं होता, जिसके मन में अपने वोट के लिए शंका हो। बुधवार को दिन रात कार्यकर्ता अपने अपने इलाके में अपने वोटरों की रखवाली में लग जाएंगे जिससे दूसरी पार्टी का कार्यकर्ता वहां पर कोई खरीद फरोख्त न कर सकें। ज्यादातर लोटा लूूण की कसम वहीं ज्यादा खिलाई जाती है जहां पर वोटर की खरीद फरोख्त होने की संभावना प्रबल हो।
 
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