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कालाअंब में बढ़ा बेसहारा मवेशियों का आंकड़ा, परेशानी
Updated Wed, 01 Nov 2017 06:58 PM IST
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कालाअंब में बढ़ा बेसहारा मवेशियों का आंकड़ा, परेशानी
राहगीरों के साथ सड़कों पर जाम का कारण बन रहे मवेशी
अमर उजाला ब्यूरो
कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में सड़कों पर बेसहारा मवेशियों की बढ़ती संख्या से राहगीरों व लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। ये मवेशी वाहन चालकों के लिए भी किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। सड़क के बीचोंबीच या किनारे पर झुंड बनाकर बैठने से सड़क पर जाम लगना भी आम बात हो गई है। साथ ही स्थानीय लोगों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुछ सांड और बछड़े इलाके में बाहरी क्षेत्रों से लाकर छोड़े जाने की आशंका जताई जा रही है। कालाअंब-त्रिलोकपुर संपर्क सड़क और कालाअंब-नाहन नेशनल हाईवे पर दर्जनों मवेशी घूम रहे हैं और कूड़े कचरे के ढेरों से अपना पेट भर रहे हैं। स्थानीय निवासी राजिंद्र, विमल, राजू, देविंद्र, राम अवतार, मोहन व नरेंद्र आदि ने बताया कि अकसर सामाजिक संगठन गौरक्षा की बड़ी बड़ी बातें जरूर करते हैं लेकिन उन लोगों को इन मवेशियों की हालत पर तरस नहीं आता जो कूड़े कचरे के ढेर से अपना पेट पाल रहे हैं।
कुछ सांड और बैल इलाके में छोड़े गए हैं। इन मवेशियों में बूढ़ी गाय भी शामिल हैं। हैरानी की बात है कि स्थानीय निकायों के पास इस समस्या का कोई निदान नहीं है और न ही इन मवेशियों को दोसड़का स्थित गौशाला भिजवाने की कोशिशें की जा रही हैं। सड़क पर मवेशियों के दोपहिया वाहनों से टकराने से राहगीरों के चोटिल होने के कई हादसे भी चुके हैं लेकिन अभी तक इस समस्या के निदान के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से इन बेसहारा पशुओं से पैदा हो रही समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
उधर, ग्राम पंचायत सचिव हरमेश ठाकुर ने बताया कि इन मवेशियों के लिए पंचायत के पास किसी प्रकार की फंडिंग नहीं है। पंचायत में गौशाला बनाए जाने के लिए प्रक्रिया चल रही है लेकिन भूमि की दरकार है।
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राहगीरों के साथ सड़कों पर जाम का कारण बन रहे मवेशी
अमर उजाला ब्यूरो
कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में सड़कों पर बेसहारा मवेशियों की बढ़ती संख्या से राहगीरों व लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। ये मवेशी वाहन चालकों के लिए भी किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। सड़क के बीचोंबीच या किनारे पर झुंड बनाकर बैठने से सड़क पर जाम लगना भी आम बात हो गई है। साथ ही स्थानीय लोगों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुछ सांड और बछड़े इलाके में बाहरी क्षेत्रों से लाकर छोड़े जाने की आशंका जताई जा रही है। कालाअंब-त्रिलोकपुर संपर्क सड़क और कालाअंब-नाहन नेशनल हाईवे पर दर्जनों मवेशी घूम रहे हैं और कूड़े कचरे के ढेरों से अपना पेट भर रहे हैं। स्थानीय निवासी राजिंद्र, विमल, राजू, देविंद्र, राम अवतार, मोहन व नरेंद्र आदि ने बताया कि अकसर सामाजिक संगठन गौरक्षा की बड़ी बड़ी बातें जरूर करते हैं लेकिन उन लोगों को इन मवेशियों की हालत पर तरस नहीं आता जो कूड़े कचरे के ढेर से अपना पेट पाल रहे हैं।
कुछ सांड और बैल इलाके में छोड़े गए हैं। इन मवेशियों में बूढ़ी गाय भी शामिल हैं। हैरानी की बात है कि स्थानीय निकायों के पास इस समस्या का कोई निदान नहीं है और न ही इन मवेशियों को दोसड़का स्थित गौशाला भिजवाने की कोशिशें की जा रही हैं। सड़क पर मवेशियों के दोपहिया वाहनों से टकराने से राहगीरों के चोटिल होने के कई हादसे भी चुके हैं लेकिन अभी तक इस समस्या के निदान के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
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ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से इन बेसहारा पशुओं से पैदा हो रही समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
उधर, ग्राम पंचायत सचिव हरमेश ठाकुर ने बताया कि इन मवेशियों के लिए पंचायत के पास किसी प्रकार की फंडिंग नहीं है। पंचायत में गौशाला बनाए जाने के लिए प्रक्रिया चल रही है लेकिन भूमि की दरकार है।
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