फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla Yug Murder Case After killing accused kept demanding ransom sent a locket as a token

Shimla Yug Murder Case : मासूम की हत्या के बाद मांगते रहे फिरौती, निशानी के तौर पर भेजा था लॉकेट; जानें

Tue, 23 Sep 2025 09:19 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 23 Sep 2025 09:19 PM IST
सार

Shimla Yug Murder Case : 14 जून 2014 को चार साल के मासूम युग का अपहरण किया गया और 22 जून को उसकी हत्या कर दी गई। दरिंदगी की कहानी दिल दहला देने वाली थी।

विज्ञापन
Shimla Yug Murder Case After killing accused kept demanding ransom sent a locket as a token
चार साल का मासूम युग/पानी का टैंक जिसमें युग की हत्या कर फेंक दिया गया था। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बहुचर्चित युग अपहरण और हत्याकांड की जांच में सामने आई दरिंदगी की कहानी दिल दहला देने वाली थी। 14 जून 2014 को दोषियों ने चार साल के मासूम का अपहरण किया और उसके कारोबारी पिता से भारी भरकम फिरौती की मांग की।

विज्ञापन

दोषी हत्या के बाद भी परिजनों से फिरौती मांगते रहे। दोषियों ने 14 जून 2014 को अपहरण करने के बाद 22 जून को युग की हत्या कर दी थी। शातिर और कोई नहीं बल्कि पिता के करीबी और जान पहचान वाले ही थे। अपहरण के बाद मासूम को एक घर में सात दिन तक छिपाकर रखा गया। इस दौरान फिरौती के लिए कई बार पत्र भी लिखे गए। आरोपियों को मासूम को छिपाना मुश्किल हो गया तो उन्होंने उसे कलस्टन में पानी के बड़े टैंक में पत्थर से बांधकर फेंक दिया। अपहरण के 13 दिन बाद पहली बार फिरौती का पत्र युग के जन्मदिन पर 27 जून 2014 को भेजा गया। सादे कागज पर हाथ से लिखकर पत्र को युग के पिता विनोद की दुकान के शटर के नीचे से डाला गया। इस पत्र में 3.60 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। निशानी के तौर पर युग का लॉकेट भी भेजा। पत्र में घर में काम करने वाले नौकर का नाम लिखकर उसके पास ही 3.60 करोड़ रुपये अंबाला भेजने के लिए कहा गया। परिजनों ने पत्र मिलते ही नौकर को शाम को ही अंबाला रवाना कर दिया। इस दौरान पुलिस ने उसका पीछा भी किया लेकिन वहां कोई नहीं मिला।

विज्ञापन
विज्ञापन

दूसरी बार फिर पत्र भेजकर फिरौती की मांग की गई और मांग स्वीकार होने की स्थिति में परिजनों से घर के बाहर सफेद रंग का कपड़ा लटकाने के लिए कहा गया। तीसरी बार फिरौती का पत्र रक्षा बंधन से पहले भेजा गया। इसके बाद चौथी बार फिर फिरौती का पत्र भेजा गया। दूसरी, तीसरी और चौथी बार भेजे गए फिरौती के पत्र पर चौड़ा मैदान पोस्ट ऑफिस की मुहर लगी थी। हैरानी इस बात की है कि युग हत्याकांड मामले में शिमला पुलिस महीनों तक अपहरणकर्ता को साथ लेकर युग का पता खोजती रही।

विज्ञापन

युग गुप्ता की हत्या के आरोप में दोषी चंद्र शर्मा, गुप्ता परिवार का पड़ोसी है। युग का अपहरण होने के बाद वह केस में ज्यादा ही दिलचस्पी ले रहा था। बड़ी की चालाकी से वह युग के परिजनों का विश्वासपात्र बन गया। पड़ोसी होने के कारण वह गुप्ता परिवार की हर गतिविधि में भी शामिल रहता। पुलिस और परिजन युग को अगवा करने वालों के खिलाफ क्या रणनीति बना रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी उसे थी, लेकिन जब चंद्र शर्मा ने युग के पिता विनोद की चल-अचल संपत्ति की जानकारी जुटाने में दिलचस्पी दिखाई तो परिजनों को उस पर शक हुआ। युग के हम उम्र दोस्त के घर के दरवाजे के साथ चंद्र शर्मा के घर का दरवाजा है। युग की दो बहनें टीशा और भूमि, चंद्र शर्मा के घर इसकी मां से ट्यूशन पढ़ने जाती थीं। सीआईडी ने मामले की गहनता जांच के बाद 20 अगस्त 2016 को अपहरण के करीब दो साल बाद विक्रांत को गिरफ्तार किया। इसकी निशानदेही पर सीआईडी ने कलस्टन पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद किया। इसी दिन चंद्र शर्मा और तेजेंद्र पाल को भी गिरफ्तार किया गया।

नवबहार में एकांत फ्लैट में युग को छिपाया
नवबहार के फोरेस्ट रोड पर राम चंद्रा चौक के नजदीक फ्लैट को चंद्र शर्मा ने किराये पर लिया था। सीआईडी को घटना वाले दिन इन तीनों के फोन की लोकेशन नवबहार के उस गुप्त घर की ही मिली थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक इसी स्थान पर अपहरण के बाद युग को छिपाकर रखा गया था। मुश्किल युग को संभालने और उसे छिपाने की थी। यह काम मुश्किल हो गया तो दरिंदों ने 22 जून को उसे मार डाला लेकिन वह फिरौती मांगने की फिराक में लगे रहे।

सड़कों पर उतरे थे सैकड़ों कारोबारी
मासूम युग को इंसाफ दिलाने के लिए शहर के सैकड़ों कारोबारी सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान कार्टरोड से लेकर लोअर बाजार तक कारोबारियों ने रैली निकाल कर रोष प्रदर्शन भी किया। युग के पिता विनोद गुप्ता और परिजनों की अगुवाई में कारोबारियों ने राज्य विधानसभा में जाकर तत्कालीन मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट में जाकर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की। कारोबारियों ने मासूम युग के हत्यारों को फांसी देने और उनके परिजनों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग भी रखी। कारोबारियों ने उपायुक्त ऑफिस शिमला के बाहर भी प्रदर्शन किया था।

जज ने खड़े होकर सुनाया था फैसला, तोड़ दी थी कलम
पांच सितंबर 2018 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने चार वर्षीय मासूम के हत्यारों को खड़े होकर सजा सुनाई थी। एक-एक कर तीनों की सजा का एलान करने में जज ने करीब दस मिनट का वक्त लिया। सजा पर फैसला सुनाने के बाद जज वीरेंद्र सिंह ने कलम को तोड़कर पीछे की ओर फेंका और सीधे चैंबर की ओर चले गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed