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Shimla News: स्कूल की छात्रा को जबरन कार में बैठाया, छेड़खानी की; पुलिस ने शुरू की जांच
Wed, 17 Dec 2025 09:53 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 17 Dec 2025 09:53 PM IST
सार
जिला शिमला में स्कूल की छात्रा को जबरन कार में बैठाकर दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया है। नाबालिग ने इसकी जानकारी परिजनों को दी जिसके बाद उन्होंने मामले की सूचना संबंधित पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
शिमला जिले के रामपुर क्षेत्र में स्कूल की छात्रा को जबरन कार में बैठाकर दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्जकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
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पुलिस को दी शिकायत में रामपुर निवासी स्कूल की छात्रा की मां ने बताया कि 16 दिसंबर को उनकी बेटी स्कूल बस का इंतजार कर रही थी। आरोप लगाया कि इस दौरान मोहिंद्र नाम के शख्स ने उनकी बेटी को जबरन अपनी कार में बैठाया। इसके बाद गाड़ी में उनकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार किया गया। नाबालिग ने इसकी जानकारी परिजनों को दी जिसके बाद उन्होंने मामले की सूचना संबंधित पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई।
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पुलिस ने मामले में फौरन कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 के तहत केस दर्जकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी को जांच का जिम्मा सौंपा है। वहीं इस तरह का मामला सामने आने के बाद स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। साथ ही अभिभावकों की भी इस मामले के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज
राजधानी शिमला की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (रेप/पॉक्सो) ने नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में आरोपी अभय कुमार उर्फ निशु की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने अपराध की गंभीरता, पीड़िता के बयान और शेष गवाहों पर प्रभाव की आशंका को आधार बनाते हुए यह फैसला सुनाया। मामले के अनुसार आरोपी अभय कुमार पर 19 मई 2025 को 15 वर्षीय नाबालिग को बहला-फुसलाकर रिश्तेदार के घर लेजाकर जबरन यौन संबंध बनाने का आरोप है।
पीड़िता स्कूली छात्रा है। आरोपी ने नाबालिग के स्कूल जाते समय उसे घुमाने के बहाने ले गया और दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता घर लौटी लेकिन धमकी के कारण शुरू में चुप रही। 12 जून 2025 को मासिक धर्म न आने की शिकायत पर उसने मां को बताया। इसके बाद पुलिस स्टेशन बालूगंज शिमला में इस संबंध में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137 (2), 64 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।
अपने फैसले में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पोक्सो एक्ट का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है और बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि ट्रायल शुरुआती चरण में है। कई महत्वपूर्ण गवाह बाकी हैं, इसलिए जमानत देने से आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है या फरार हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी के निपटारे के लिए हैं और मुख्य मामले के गुण-दोष पर प्रभाव नहीं डालेंगी।
राजधानी शिमला की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (रेप/पॉक्सो) ने नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में आरोपी अभय कुमार उर्फ निशु की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने अपराध की गंभीरता, पीड़िता के बयान और शेष गवाहों पर प्रभाव की आशंका को आधार बनाते हुए यह फैसला सुनाया। मामले के अनुसार आरोपी अभय कुमार पर 19 मई 2025 को 15 वर्षीय नाबालिग को बहला-फुसलाकर रिश्तेदार के घर लेजाकर जबरन यौन संबंध बनाने का आरोप है।
पीड़िता स्कूली छात्रा है। आरोपी ने नाबालिग के स्कूल जाते समय उसे घुमाने के बहाने ले गया और दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता घर लौटी लेकिन धमकी के कारण शुरू में चुप रही। 12 जून 2025 को मासिक धर्म न आने की शिकायत पर उसने मां को बताया। इसके बाद पुलिस स्टेशन बालूगंज शिमला में इस संबंध में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137 (2), 64 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।
अपने फैसले में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पोक्सो एक्ट का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है और बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि ट्रायल शुरुआती चरण में है। कई महत्वपूर्ण गवाह बाकी हैं, इसलिए जमानत देने से आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है या फरार हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी के निपटारे के लिए हैं और मुख्य मामले के गुण-दोष पर प्रभाव नहीं डालेंगी।