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Himachal News: तीसरी फेल शरणदास बुढ़ापे में विकलांगता के बाद हुनर से हरा रहे गरीबी, प्रेरणादायक है ये कहानी
Mon, 17 Mar 2025 09:27 PM IST
अंकेश डोगरा
केपी पांजला, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
केपी पांजला, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Mon, 17 Mar 2025 09:27 PM IST
सार
100 फीसदी विकलांग शरणदास हुनर से गरीबी को मात दे रहे हैं। बुरांश और जड़ी बूटियों का कारोबार कर सैकड़ों को रोजगार भी दे रहे हैं।
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डिजाइन फोटो।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
2013 में शिकार के दौरान शरीर में गोली लगने के बाद बुढ़ापे में 100 फीसदी विकलांग हुए शरणदास हुनर से गरीबी को मात दे रहे हैं। मंडी जिले के द्रंग ब्लॉक की पंचायत कजोटधार के शरणदास पहाड़ी पर घर का फायदा उठाकर बुरांश और जड़ी बूटियों का कारोबार कर सैकड़ों को रोजगार भी दे रहे हैं। चलने फिरने में असमर्थ शरणदास के घर के पास इन दिनों पहाड़ी बुरांश के फूलों की महक से गुलजार है। घर के अलावा खुले में पहाड़ी पर फूलों को सुखाया जा रहा है।
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शरणदास बताते हैं कि फूल मोवीसेरी, थाची, कदार, बठेड़, बरोट, सराज और परासर आदि पहाड़ी इलाकों से इकट्ठा कर गाड़ियों से यहां लाते हैं। उनकी एक गाड़ी है जबकि तीन अन्य गाड़ी चालकों को रोजगार दिया है। एक गाड़ी में करीब 20 क्विंटल फूल आते हैं। 300 से ज्यादा लोग उन्हें इकट्ठा करते हैं। गांवों में वह 12 रुपये किलो फूल खरीदते हैं। उनके अनुसार आसपास की दर्जनों पंचायतों के बच्चे सीजन में फूल बेचकर ही 10 से 15 हजार रुपये कमा लेते हैं। हजारों लोग और बच्चे सीजन में फूल बेचते हैं।
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फूलों को छांटने, देखरेख करने और जूस, पाउडर आदि तैयार करने के लिए 20 युवाओं को घरद्वार स्थायी रोजगार भी दिया है। सीजन में एक टन फूलों का पाउडर जबकि हजारों लीटर जूस तैयार किया जाता है। पाउडर और जूस की पंजाब के अमृतसर और गोवा के होटलों में काफी डिमांड है। जूस 100 रुपये लीटर जबकि पाउडर 500 रुपये किलो बेच रहे हैं।
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नौ साल की गद्दी की नौकरी
शरणदास बताते हैं कि तीसरी फेल थे तो नौकरी न मिलने पर नौ साल दूसरे के पास गद्दी की नौकरी की। 1997 में फिर रोपवे का काम सीखा। जिंदगी पटड़ी पर आई और किन्नौर में टनल का काम भी किया। 2013 में शिकार के दौरान गोली लगने से शरीर ने काम करना छोड़ दिया। बाद में जड़ी बूटियों और बुरांश का काम शुरू किया। उन्होंने जय ऋषि नारायण के नाम से कंपनी भी बनाई है।
रास्ता न था तो खुद लगाया 2300 मीटर लंबा तार स्पेंड
बठेढ़ पंचायत से कजोटधार अपने घर तक सामान पहुंचाने के लिए शरणदास ने 2006 में सवा छह लाख की लागत से 2300 मीटर लंबा तार स्पेंड (रोपवे) भी बनाया है। वह बताते हैं कि पहले सड़क नहीं थी तब सामान को बठेढ़ से यहां तक लाने में बहुत समय खर्च होता था। वह बताते हैं कि सूखे फूल कोई नहीं देता है। इसलिए पहाड़ी पर ऐसी व्यवस्था की है।
शरणदास बताते हैं कि तीसरी फेल थे तो नौकरी न मिलने पर नौ साल दूसरे के पास गद्दी की नौकरी की। 1997 में फिर रोपवे का काम सीखा। जिंदगी पटड़ी पर आई और किन्नौर में टनल का काम भी किया। 2013 में शिकार के दौरान गोली लगने से शरीर ने काम करना छोड़ दिया। बाद में जड़ी बूटियों और बुरांश का काम शुरू किया। उन्होंने जय ऋषि नारायण के नाम से कंपनी भी बनाई है।
रास्ता न था तो खुद लगाया 2300 मीटर लंबा तार स्पेंड
बठेढ़ पंचायत से कजोटधार अपने घर तक सामान पहुंचाने के लिए शरणदास ने 2006 में सवा छह लाख की लागत से 2300 मीटर लंबा तार स्पेंड (रोपवे) भी बनाया है। वह बताते हैं कि पहले सड़क नहीं थी तब सामान को बठेढ़ से यहां तक लाने में बहुत समय खर्च होता था। वह बताते हैं कि सूखे फूल कोई नहीं देता है। इसलिए पहाड़ी पर ऐसी व्यवस्था की है।