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Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर हिमाचली टोपी बनेगी शौर्य का शिखर, अमन नेगी ने बनाया झांकी का डिजाइन
Fri, 02 Jan 2026 10:53 AM IST
अंकेश डोगरा
हर्षित शर्मा, शिमला।
हर्षित शर्मा, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Fri, 02 Jan 2026 10:53 AM IST
सार
Himachal Tableau On Republic Day: हिमाचल की झांकी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर दिखेगी। झांकी में कुल चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और दस महावीर चक्र विजेताओं का प्रतिनिधित्व है। झांकी का डिजाइन आचार्य अमन नेगी ने तैयार किया है। जानें विस्तार से...
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हिमाचल की झांकी का मॉडल।
- फोटो : स्रोत : विभाग
विस्तार
26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस पर इस बार दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हिमाचल की झांकी देश-दुनिया के सामने वीर सपूतों और शौर्य की गाथा प्रस्तुत करेगी। झांकी का डिजाइन जवाहरलाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय शिमला में सहायक आचार्य अमन नेगी ने तैयार किया है। झांकी के पहले हिस्से में पारंपरिक हिमाचली काठकुणी वास्तुकला की छत है, जो भूकंपरोधी तकनीक और दृढ़ता का प्रतीक है। छत के ऊपर स्थापित हिमाचली टोपी झांकी की पहचान है।
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टोपी के शिखर पर चार परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं बनाई गई हैं, जो हिमाचल के वीर सपूतों को देश और प्रदेश के सबसे बड़े गौरव के रूप में दर्शाती हैं। झांकी में कुल चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और दस महावीर चक्र विजेताओं का प्रतिनिधित्व है। पहले हिस्से में शिल्प और मूर्तियों के माध्यम से उनके शौर्य को दिखाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में सभी विजेताओं के चित्र हैं। इसके साथ ही हिमालय पर तिरंगा फहराते सैनिकों की प्रतिमा, दो सेना अधिकारियों की सलामी शामिल है।
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इस झांकी में हिमाचल प्रदेश के परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा, मेजर धन सिंह थापा, कैप्टन विक्रम बत्रा और राइफलमैन संजय कुमार, अशोक चक्र कर्नल जसबीर सिंह रैना और कैप्टन सुधीर कुमार और महावीर चक्र से सुशोभित ब्रिगेडियर रतन नाथ शर्मा, ब्रिगेडियर बासुदेव सिंह मनकोटिया, कर्नल कमल सिंह, मेजर जनरल एएस पठानिया, जनरल आरएस दयाल, सूबेदार मेजर कांशी राम, मेजर जनरल केएस रतन की वीरगाथाएं शामिल हैं।
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कौन हैं अमन नेगी?
अमन नेगी मूल रूप से किन्नौर जिले के रूघी गांव से हैं। अमन नेगी ने बताया कि बचपन से ही कला में रुचि रही और उनके पिता विमल नेगी प्रेरणा देते थे।
हिमाचल प्रदेश की झांकी गणतंत्र दिवस परेड में कई बार चुनी गई है, जो राज्य की सांस्कृतिक, पर्यटन और विरासत को उजागर करती रही है।
हिमाचल की झांकी कर्तव्य पथ पर कब-कब दिखी?
1993: पर्यटन और बर्फबारी
1998: कुल्लू दशहरा और रघुनाथ रथ यात्रा
2007: लाहौल-स्पीति के मठ और भिक्षु
2012: किन्नौर की जनजातीय संस्कृति और शिल्पकला
2017: चंबा रुमाल (पारंपरिक कढ़ाई)
2018: लाहौल-स्पीति के हजार वर्ष पुराने मठ की विरासत
2020: कुल्लू दशहरा
हिमाचल की झांकी कर्तव्य पथ पर कब-कब दिखी?
1993: पर्यटन और बर्फबारी
1998: कुल्लू दशहरा और रघुनाथ रथ यात्रा
2007: लाहौल-स्पीति के मठ और भिक्षु
2012: किन्नौर की जनजातीय संस्कृति और शिल्पकला
2017: चंबा रुमाल (पारंपरिक कढ़ाई)
2018: लाहौल-स्पीति के हजार वर्ष पुराने मठ की विरासत
2020: कुल्लू दशहरा